दुनिया का सबसे बर्बर युद्ध अपराध, जब दिव्यांग बच्चों को ओवन में भून दिया गया

नाजियों के इस प्रोग्राम को अक्शन टी4 (Aktion T4) कहा गया
नाजियों के इस प्रोग्राम को अक्शन टी4 (Aktion T4) कहा गया

आर्मेनिया और अजरबैजान की जंग (Armenia and Azerbaijan conflict) के बीच युद्ध अपराध (war crime) की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे ही अपराध पहले और दूसरे विश्वयुद्ध (first and second world war) के दौरान हुए थे, जब नृशंसता की हदें पार हो गईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 12:43 PM IST
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पूर्व सोवियत संघ (Soviet Union) का हिस्सा रह चुके आर्मेनिया और अजरबैजान में लगातार जंग (Armenia and Azerbaijan conflict) हो रही है. अब वहां से युद्ध अपराधों की खबरें भी आने लगी हैं. बता दें कि नागोर्नो-काराबाख इलाके (Nagorno-Karabakh) पर कब्जे को लेकर दोनों के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है. इस बीच कई ऐसे वीडियो मिले, जो इन देशों के आम लोगों पर हिंसा दिखा रहे हैं.

अब काउंसिल ऑफ यूरोप (Council of Europe) में इसकी जांच हो रही है. वैसे दो देशों के बीच जंग छिड़ने पर युद्ध अपराध नई समस्या नहीं, बल्कि दशकों से इसका जिक्र मिलता रहा है.

जापान का टॉर्चर लैब 
यूनिट 731 को सबसे खतरनाक वॉर क्राइम में गिना जाता है. जापान की सेना ने कई साल तक चीन की जनता पर खतरनाक प्रयोग किए. यूनिट 731 के नाम से जाने वाली लैब में ये प्रयोग होते थे, जिसे इतिहास का सबसे खौफनाक टॉर्चर लैब भी कहा जाता है.
यूनिट 731 को सबसे खतरनाक वॉर क्राइम में गिना जाता है- सांकेतिक फोटो




होती थी फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग
साल 1930 से 1945 के दौरान चले इस लैब में जिंदा इंसानों को यातना देने के लिए एक खास प्रयोग था फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग. Yoshimura Hisato नाम के एक वैज्ञानिक को इसमें खास मजा आता था. वो ये देखने के लिए प्रयोग करता था कि जमे हुए तापमान पर शरीर का क्या होता है. इसे जांचने के लिए चीनियों के हाथ-पैर ठंडे पानी में डुबो दिए जाते. जब इंसान पूरी तरह से सिकुड़ जाता, तब उसके हाथ-पैर तेज गर्म पानी में डाल दिए जाते. इस प्रक्रिया में हाथ-पैर पानी में लकड़ी के चटकने की तरह आवाज करते हुए फट जाते.

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सबसे भयावह प्रयोग था सिफलिस प्रयोग
उस दौर में सैनिकों में यौन रोग सिफलिस आम था. तब लाइलाज होने के कारण काफी सैनिक इस बीमारी से मरते थे. यही वजह है कि इस लैब ने चीनियों पर इसका प्रयोग शुरू किया. इसके तहत चीनी कैदियों को सिफलिस से संक्रमित किया जाता और फिर उन्हें तरह-तरह की दवाएं दी जाती थीं. कई बार यौन रोग के शिकार पुरुषों को स्वस्थ चीनी महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने को कहा जाता ताकि ये देखा जा सके कि यौन बीमारी फैलती कैसे है. इस दौरान ज्यादातर कैदियों की बीमारी से मौत हो जाती थी.

कितने लाख लोग इस तरह से मारे गए, उसका कोई हिसाब नहीं मिल सका


मानसिक तौर पर कमजोर बच्चों को मौत 
इसी तरह से एक और प्रोग्राम को अक्शन टी4 (Aktion T4) कहा गया. ये प्रयोग मानसिक या शारीरिक तौर पर कमजोर बच्चों पर किया जाता था, जो साल 1939 से लेकर दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने यानी 1945 तक चलता रहा. खुद हिटलर ने ये प्रोग्राम चलवाया था. इसके तहत उन बच्चों और लोगों को मार दिया जाता था, जो किसी भी तरह से कमजोर हों. उनके दौर में माना जाने लगा कि मानसिक या शारीरिक तौर पर अपंग लोगों का जीना किसी काम का नहीं.

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ओवन में भून दिया जाता था
नाजियों का कहना था कि ऐसे लोग “useless eaters” हैं और इनका मरना ही ठीक है. इन्हें मारने का तरीका भयंकर बर्बर था. इनको शावर फसलिटी के नाम पर गैस चैंबर में डाल दिया जाता, जहां उनकी मौत हो जाती. मृत शरीरों को पेरेंट्स को सौंपने या अंतिम क्रिया करने की बजाए विशालकाय ओवन में डालकर जला दिया जाता था.

नरसंहार के लिए जिम्मेदार हेनरी विर्ज को मौत की सजा दी गई लेकिन तब तक लाखों जानें जा चुकी थीं


न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार में इस बारे में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें लिखा था कि कितने लाख लोग इस तरह से मारे गए, उसका कोई हिसाब नहीं मिल सका.

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अमेरिका में गृह युद्ध के दौरान गईं जानें
लोकतांत्रिक देश अमेरिका में भी युद्ध अपराध हो चुके हैं. ये सिविल वार के दौरान हुआ था, जिसमें एक अनुमान के मुताबिक 620,000 जानें गईं. इस नरसंहार के लिए केवल एक ही शख्स जिम्मेदार था, जिसका नाम था हेनरी विर्ज. सेना के इस कमांडर ने जॉर्जिया के Camp Sumter में ये खून-खराबा किया, जहां युद्ध बंदियों को रखा गया था. कैंप में खाने-पीने को नहीं के बराबर मिलता था. इसके अलावा 10 लोगों के रहने की जगह में 200 लोगों को ठूंसकर रखा जाता था. इससे दम घुटने से ही बहुतों की जान गई. बहुत से लोग भूख से मरे तो बहुत से लोग गंदे पानी के कारण डायरिया से नहीं बचे. अगर किसी को बीमारी नहीं मार पाती थी, तो जेल के प्रहरी मार दिया करते थे. कहा जाता है कि इसके लिए उन्हें ऊपर से आदेश थे.

बाद में नरसंहार के लिए जिम्मेदार हेनरी विर्ज को मौत की सजा दी गई लेकिन तब तक लाखों जानें जा चुकी थीं.
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