यूरेनस से आ रही हैं X-Rays, वैज्ञानिक स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं इसकी वजह

यूरेनस (Uranus) के विशेष परिस्थितियों के कारण वैज्ञानिकों को एक्स रे स्रोत को स्पष्ट करने में परेशानी हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

यूरेनस (Uranus) के विशेष परिस्थितियों के कारण वैज्ञानिकों को एक्स रे स्रोत को स्पष्ट करने में परेशानी हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नासा (NASA) की चंद्रा वेधशाला (Chandra X Rays Observatary) के आंकड़ों से वैज्ञानिकों ने पता किया है कि यूरेनस ग्रह (Uranus) से एक्स रे विकिरण उत्सर्जित हो रही है लेकिन इसके स्रोत को स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं.

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नासा (NASA) के खगोलविदों को हमारे सौरमंडल के ग्रह यूरेनस (Uranus) की ओर से एक्स रे विकिरण (X Ray Radiations) आती हुई दिखाई दी हैं. नासा के चंद्रा एक्स रे वेधशाला (Chandra X Ray Observatory) की सहायता से उन्हें इससे संबंधित जानकारियां मिलीं. यह अध्ययन वेधशाला के द्वारा साल 2002 से लेकर साल 2017 के अवलोकनों के आधार पर किया गया था.

दो तस्वीरों को मिलाया

हाल ही में हुए विश्लेषण में पाया गया कि दो दशक पहले सबसे पहले इस एक्स रे के स्पष्ट संकेत मिले थे. 2017 में शोधकर्ताओं ने एक्स रे की एक ज्वाला को देखा. खगोलविदों ने 2002 की तस्वीर में -1 साल 2004 में केक-1 टेलीस्कोप की प्रकाशीय तस्वीर को मिलाया. केक-1 टेलीस्कोप एक दूसरे अध्ययन का हिस्सा था. इसमें पाया गया कि यूरेनस उसी दिशा में था जहां वह 2002 के अवलोकनों में था.

सौरमंडल में होते रहते हैं एक्स रे विकरण
हमारे सौरमंडल से एक्स रे विकिरणों का निकलना कोई नई बात नहीं है. यहां शुक्र, शनि और गुरू के चंद्रमा भी एक्स रे और अन्य विकिरण उत्सर्जित करते हैं. गुरू के मामले में खगोलविदों ने पाया है कि सूर्य एक्स रे विकिरणों का स्रोत है. खगोलविदों ने पाया है कि यह वैसा ही है जैसे सूर्य की रोशनी चंद्रमा पर बिखरती है.

यूरेनस में कुछ अलग ही है प्रक्रिया

लेकिन यूरेनस से आने वाली एक्स रे सूर्य के प्रकाश के बिखराव का नतीजा नहीं है. खगोलविदों को ऐसे संकेत मिले हैं जिससे पता चला है कि इनका स्रोत यूरेनस ग्रह के पर ही मौजूद हो सकता है. अभी तक खगोलविद यह स्पष्ट रूप से पता नहीं कर सके हैं कि वास्तव में ये एक्स रे विकरण आ कहां से रही हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने इसकी दो संभावित व्याख्याएं दी हैं.



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यूरेनस की यह जानकारी नासा के चंद्रा एक्स रे वेधशाला (Chandra X Ray Observatory) के आंकड़ों से मिली. (तस्वीर: NASA)


यूरेनस के छल्लों की वजह से

पहली व्याख्या के मुताबिक यूरेनस के छल्लों में इस विकरण के प्रक्रिया छिपी हो सकती है. इन छल्लों से ग्रह के पास के अंतरिक्ष वातावरण में मौजूद आवेशित कण जैसे इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन के टकराव हो सकता है. इस टकराव से ये छल्ले एक्सरे में चमक सकती हैं.

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यूरेनस के ऑरोर के कारण

दूसरी संभावित व्याख्या के अनुसार कुछ एक्स रे यूरेनस ग्रह के ऑरोर से आ सकती हैं. यूरेनस में पहले भी ऑरोर की प्रक्रियाएं देखी जाने के जानकारी मिल चुकी है. पृथ्वी पर उसकी मैग्नेटिक फील्ड और सौर पवनों की अंतरक्रिया से ध्रुवीय क्षेत्रों के आकाश में आयनीकृत कण रंगीन प्रकाश उत्सर्जित करते हैं जिसे ऑरोर कहते हैं.

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एक्स रे उत्सर्जन हमारे सौरमंडल (Solar System) में दूसरे ग्रहों से भी आता है. (फाइल फोटो)


वैज्ञानिकों को यह उम्मीद

पृथ्वी और गुरू ग्रह पर एक्स रे मैग्नेटिक लाइन्स में इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की वजह से पैदा होती हैं. गुरु ग्रह पर धनात्मक आवेशित परमाणु और अणुओं की ध्रुवीय इलाकों में बारिश इसका अन्य कारण है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चंद्रा वेधशाला के जरिए वे यूरेनस की इस प्रक्रिया को समझने में सफल हो सकेंगे.

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वैज्ञानिक एक्स रे के स्रोत का पता नहीं लगा पा रहे हैं इसकी भी एक खास वजह है. यूरेनस का असमान्य अक्ष जिस पर वह घूमता है और उसकी मैग्नेटिक फील्ड इसमें जटिलता पैदा कर रहे हैं. इसके अलावा यूरेनस की घूर्णन का अक्ष सूर्य के जैसा नहीं हैं. ऐसा सौरमंडल के दूसरे ग्रहों के साथ नहीं हैं. मैग्नेटिक फील्ड भी झुकाव के कारण केंद्र से हटकर है. इस वजह से यूरेनस पर बहुत जटिल और विविध तरह के ऑरोर देखने को मिलते हैं.
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