Explained: क्या वाकई China में अब कोई भी गरीब नहीं है?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (China president Xi Jinping) ने देश के पूरी तरह से गरीबी-मुक्त (poverty-free nation) होने का एलान कर दिया है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश अगर वाकई गरीबी से बाहर आ चुका है तो ये वैश्विक भुखमरी के खात्मे की ओर बड़ा कदम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 9:19 AM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ताजा बयान तहलका मचा रहा है. बकौल जिनपिंग, चीन से गरीबी पूरी तरह से खत्म हो चुकी. उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश ने संयुक्त राष्ट्र के गरीबी मिटाने के साल 2020 के लक्ष्य को 9 साल पहले ही हासिल कर लिया. यानी देखा जाए तो 140 करोड़ की आबादी वाले देश में अब सभी आराम से खा-पी रहे और शिक्षा-सेहत की सुविधा पा रहे हैं.

हाल ही में चीन के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनके यहां से गरीबी पूरी तरह जा चुकी है. ऐसा दावा करना वाला चीन दुनिया का पहला राष्ट्र बन चुका है. जिनपिंग के स्टेटमेंट के मुताबिक सत्तर के दशक से अर्थव्यवस्था में सुधार के बाद से 770 मिलियन गरीबों को आर्थिक खुशहाली मिल सकी.

xi jinping poverty in china
चीनने पिछले 8 सालों में ही गरीबी हटाने के लिए लगभग 1.6 ट्रिलियन युआन लगाए- सांकेतिक फोटो (flickr )




इसके अलावा जिनपिंग ने यह भी कहा कि उनके देश ने पिछले 8 सालों में ही गरीबी हटाने के लिए लगभग 1.6 ट्रिलियन युआन लगाए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 में सत्ता में आने के बाद से जिनपिंग का मकसद गरीबी खत्म करना था, जबकि तब वहां गरीबों की आबादी 100 मिलियन के आसपास थी. तो एकाएक क्या हुआ, जो 8 ही सालों में देश से गरीबी खत्म हो गई?
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वैसे जिनपिंग के आधिकारिक दावे से पहले से ही चीन के प्रांत इस तरह के दावे करने लगे थे. साल 2020 के नवंबर में जब सारी दुनिया कोरोना से बचाव की जुगत भिड़ा रही थी, जब चीन के दक्षिण-पश्चिम के सारे जिले खुद को गरीबी-मुक्त बता रहे थे. बता दें कि Guizhou प्रांत के जिलों में सबसे ज्यादा गरीब आबादी रहती थी, लेकिन अब ये नवंबर में ही इस प्रांत ने खुद को गरीबी मुक्त कह दिया था.

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सबसे बड़ी आबादी वाले देश होने के नाते चीन ने ग्लोबल हंगर यानी वैश्विक भुखमरी खत्म करने में 70 प्रतिशत योगदान दिया- सांकेतिक फोटो (pixabay)


चीन के मुताबिक बीते 8 ही सालों में ज्यादा लोग गरीबी से बाहर निकल सके. इस तरह से सबसे बड़ी आबादी वाले देश होने के नाते चीन ने ग्लोबल हंगर यानी वैश्विक भुखमरी खत्म करने में 70 प्रतिशत योगदान दिया. बकौल चीन उसके ग्रामीण इलाकों में गरीबी की दर में 10.2% से सीधे 0.6% की गिरावट आई. अब जिनपिंग आत्मविश्वास से भरे हुए हैं और दावे कर रहे हैं.

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इस बीच ये समझते हैं कि किसी देश से गरीबी हट गई है, ये दावा किस आधार पर किया जाता है! इसके लिए 3 मानक हैं. पहला तो है आय यानी इन्कम. लोगों के पास देश की आर्थिक खरीदी औसत के लायक पर्याप्त पैसे होने चाहिए. चीन के मुताबिक वहां ग्रामीण इलाकों में किसानों की सालाना आय 4000 युवान हो चुकी है.

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गरीबी खत्म होने का दूसरा पैमाना है चिंतामुक्त होना. यानी परिवार के पास खाने और पहनने की कोई चिंता न हो. वहीं तीसरा और आखिरी पैमाना है गारंटी. इसके तहत ये गारंटी आती है कि बच्चों को औसत शिक्षा हर हाल में मिलेगी. हर किसी को बेसिक मेडिकल सुविधा मिल सकेगी और हाउसिंग सिक्योरिटी भी होगी.

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जब दुनिया कोरोना से परेशान थी, जब चीन के दक्षिण-पश्चिम के जिले खुद को गरीबी-मुक्त बता रहे थे- सांकेतिक फोटो (pixnio)


चीन के गरीबी-मुक्त हो जाने के दावे पर हालांकि लगातार सवाल उठते रहे हैं. साल 2019 की मई में इसपर काफी बात हुई थी, जब खुद चीन की पार्टी पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइन के नेता Li Keqiang ने इसके उलट बयान दे दिया था. उन्होंने कहा था कि 600 मिलियन चीनियों की मासिक आय 100 युवान यानी 10000 रुपए है. ली ने खुद आगे आते हुए इसपर चिंता जताते हुए कहा कि इतनी कम आय में चीन के मध्यम आकार वाले शहर में घर लेना या किराया देना असंभव है.

चीन के आर्थिक तौर खुद को मजबूत बताने के दावे के बीच भी खबर आई कि चीन में अनाज की भारी कमी के कारण भुखमरी के हालात बन चुके हैं. अनाज की कमी के कारण ही चीन अपने यहां से अनाज निर्यात करने संबंधी सारे एग्रीमेंट रद्द कर चुका है. यहां तक वो अनाज की खरीदी में लग गया है. साथ ही साथ अन्न की मांग और सप्लाई में फर्क कम करने के लिए चीन दूसरे देशों में खेती लायक जमीन लीज पर लेने की शुरुआत कर चुका है. चीन ने विदेशों में कृषि भूमि खरीदने के लिए लगभग 94 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं. इसमें अफ्रीकी देशों के दक्षिण अमेरिकी देश भी हैं.
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