Astronomy: ब्लैक होल के नाम रहा था साल 2020, जानिए क्यों

पिछले साल ब्लैक होल (Black Hole) पर बहुत से शोध हुए और उनसे बहुत सारी जानकारी हासिल हुई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पिछले साल ब्लैक होल (Black Hole) पर बहुत से शोध हुए और उनसे बहुत सारी जानकारी हासिल हुई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

साल 2020 में ब्लैक होल (Black Hole) को लेकर बहुत सारी खगोलीय खोजें (Astronomical findings) हुईं यहां तक कि भौतिकी (Physics) का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) भी ब्लैक होल की दो खोजों के नाम रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2021, 6:07 AM IST
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पूरी दुनिया यह दुआ कर रही है कि साल 2021 पिछले साल से बेहतर साबित हो. पिछले साल अंतरिक्ष (Space) की दुनिया को लेकर लोगों में भले ही मंगल (Mars) और चंद्रमा (Moon) पर इंसान के भेजने की तैयारी की बातें हुई हों, लेकिन वास्तव में वह साल ब्लैक होल (Black Hole) के नाम रहा. खगोलविज्ञान (Astronomy) की बात करें तो पूरे साल ब्लैक होल संबंधी शोध छाए रहे. यहां तक नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) भी ब्लैक होल पर शोध करने वालों के नाम ही रहा.

ब्लैक होल की दो खोजों को नोबेल

पिछले साल यूके की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोजर पेनरोज को आधा नोबेल पुरस्कार “ब्लैक होल का निर्माण सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत का सटीक पूर्वानुमान” सिद्ध करने वाले उनके शोध को मिला. वहीं शोध का दूसरा हिस्सा भी ब्लैक होल संबंधी एक खोज को मिला. UCLA की एड्रिया गेज और बॉन यूनिवर्सिटी के रिनहार्ड गेंजल ने हमारी गैलेक्सी के केंद्र में सुपरमासिव ब्लैक होल की खोज की.

सबसे बड़ा ब्लैक होल विलय
LIGO और VIRGO वेधशालाएं पिछले पांच साल से गुरुत्व तरंगों का अवलोकन कर रही हैं और उससे उन्होंने कई अहम खोजें भी की हैं लेकिन पिछले साल मई में उन्होंने घोषणा की कि उन्होंने अब तक का अवलोकित सबसे विशाल ब्लैक होल विलय होता पाया है. इसमें से एक ब्लैक होल हमारे सूर्यसे 66 गुना तो दूसरा 85 गुना बड़ा था दोनों ने मिल कर सूर्य से142 गुना ज्यादा बड़े भार का ब्लैक होल का निर्माण किया. ये मध्य आकार के ब्लैक होल की पहली खोज थी.

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ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में इस साल विलय से लेकर कई प्रक्रियाओं की जानकारी मिली. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


ब्लैक होल की स्ट्रिंग थ्योरी से व्याख्या



पिछले साल ब्लैक होल की एक असहज स्थिति की व्याख्या के प्रयास में अक्टूबर में हुए अध्ययन में बताया गया  कि यदि न्यूट्रॉन तारे,  जिसमें परमाणु ब्लैक होल के निर्माण के लायक घने नहीं हो पाते हैं, वास्तव में स्ट्रिंग के पुंज होते हैं. इन स्ट्रिंग की सिकुड़ने से ही ब्लैक होल नहीं बल्कि एक फजबॉल का निर्माण करते हैं. सामान्य तौर पर माना जाता है कि ब्लैक होल तब बनते हैं जब पदार्थ और उर्जा एक असीम घनत्व तक एक बिंदु में सिमट जाते हैं. वैज्ञानिक काफी लंबे समय से इस समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन स्ट्रिंग थ्योरी से यह ब्लैक होल की इस तरह की पहली व्याख्या है.

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SLAB-विशालतम ब्लैक होल

सितंबर में प्रकाशित हुए एक शोध में खगोलविदों ने स्टुपेंडसली लार्ज ब्लैक होल (SLAB) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये विलालतम ब्लैक होल हमारे सूर्य से एक ट्रिलयन गुना ज्यादा भारी हैं और ब्रह्माण्ड में ज्ञान ब्लैक होल से दस गुना ज्यादा बड़े हैं. इस तरह के कुछ ब्लैक होल ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय हैं और इनसे उस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के बारे में जानकारी भी मिल सकती है.

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शोधकर्ताओं ने इस साल विशालतम ब्लैक होल (SLAB) की भी खोज की. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


बहुत असामान्य ब्लैक होल विलय

आमतौर पर जब भी दो ब्लैक होल का विलय होता है, तब उनका भार करीबन एक ही सा रहता है. अगर उनमें अंतर भी हो तो बहुत ज्यादा नहीं होता. अप्रैल में LIGO और VIRGO वेधशालाओं ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि उन्होंने अब तक का सबसे असमान्य विलय देखा है. 2.4 अरब प्रकाश वर्ष दूर हुए इस विलय में दोनों ब्लैक होल का भार सूर्य के मुकाबले 8 और 30 गुना था. इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल विलय के बारे में अपनी कई धारणाओं को बदलना पड़ा है.

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पिछले साल अक्टूबर में यूरोपीय साउदर्न ऑबजर्वेटरी ने तारे के स्पैगेटिफिकेशन की घटना को स्पष्टता से अवलोकित किया जो कि किसी ब्लैक होल के कारण होती है. इस प्रक्रिया में जब तारा ब्लैक होल के नजदीक जाता है को ब्लैक होल के गुरुत्व के कारण पदार्थ छितरने लगता है. यह घटना आसापास के गैस और धूल के बादलों के कारण दिखाई नहीं देती.
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