जानिए क्यों सरकारी कर्मचारियों के इन 6 भत्तों को योगी सरकार ने किया खत्म

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Updated: August 23, 2019, 4:52 PM IST
जानिए क्यों सरकारी कर्मचारियों के इन 6 भत्तों को योगी सरकार ने किया खत्म
योगी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के 6 भत्तों को खत्म किया

यूपी में योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) की सरकार ने 6 भत्तों (allowances) को खत्म कर दिया है. इसका असर यूपी के सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर पड़ेगा...

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  • Last Updated: August 23, 2019, 4:52 PM IST
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यूपी में योगी (Yogi Aditynath) की सरकार ने सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के 6 भत्तों (allowances) को खत्म कर दिया है. यूपी के सरकारी कर्मचारियों को लंबे वक्त से ये अलाउंस मिल रहे थे. योगी सरकार (Yogi Government) ने जिन भत्तों को खत्म किया है, उसमें दो या दो से कम बच्चे पर मिलने वाला भत्ता भी शामिल है.

इनमें से कई भत्ते तो ऐसे हैं, जिनका मौजूदा हालात में कोई मतलब नहीं रह गया था. लेकिन इसके बावजूद सरकारी कर्मचारियों को ये भत्ते मिल रहे थे. सरकारी कर्मचारियों के भत्तों में कटौती का सीधा असर उनके वेतन पर पड़ेगा.

इन 6 भत्तों को किया गया खत्म

यूपी में सरकारी कर्मचारियों के जिन भत्तों को खत्म किया गया है, वो हैं- दो भाषाएं जानने पर मिलने वाला भत्ता, कंप्यूटर ऑपरेट करने की जानकारी होने पर मिलने वाला भत्ता, पोस्ट ग्रैजुएशन डिग्री अलाउंस, कैश हैंडल करने पर मिलने वाला भत्ता, प्रोजेक्ट अलाउंस और दो या दो से कम बच्चे होने पर मिलने वाला भत्ता.

इस बारे में यूपी के फायनेंस डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजीव मित्तल ने आदेश पारित किया है. इस आदेश पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपनी मुहर लगा दी है. इसके साथ ही वो 6 भत्ते तुरंत प्रभाव से खत्म हो गए हैं.

yogi adityanath government scraps 6 allowances for employees including family planning in up
फैमिली प्लानिंग अलाउंस भी खत्म किया गया


सरकारी सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों को मिलने वाले इन भत्तों का मौजूदा दौर में कोई अर्थ नहीं रह गया था, इसलिए इन्हें खत्म किया गया है.
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आपातकाल के दौरान शुरू हुआ था फैमिली प्लानिंग अलाउंस

दो या दो से कम बच्चे होने पर मिलने वाला भत्ता 1976 में शुरू हुआ था. उस वक्त केंद्र और सूबे में कांग्रेस की सरकार थी. वो आपातकाल का दौर था. पहले इंदिरा गांधी की सरकार ने फैमिली प्लानिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए इस तरह के भत्ते की शुरुआत की थी. जिसके बाद यूपी सरकार ने भी इसे अपने यहां लागू करने का फैसला किया था.

सरकार अपने उन कर्मचारियों को ये भत्ता दे रही थी, जिनकी 40 की उम्र तक 2 या 2 से कम बच्चे थे. उस वक्त इसे परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रेरित करने वाला कदम माना गया था. लेकिन मौजूदा हालात में इस भत्ते का कोई ज्यादा मतलब नहीं रह गया था. क्योंकि अभी ज्यादातर लोगों के 2 या उससे कम बच्चे हैं.

जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने भी खत्म किया था भत्ता

पहले केंद्र सरकार के सरकारी कर्मचारियों को भी ये भत्ता मिला करता था. लेकिन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद जुलाई 2017 में इस भत्ते को केंद्र सरकार ने भी खत्म कर दिया था.

यूपी में फैमिली प्लानिंग अलाउंस के नाम पर 250 से लेकर 650 रुपए महीने का भत्ता दिया जा रहा था. पे बैंड के हिसाब से इसका आकलन होता था.

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पिछले दिनों उत्तराखंड सरकार ने भी खत्म किए थे 15 भत्ते


उत्तराखंड में खत्म हुए ऐसे 15 भत्ते

इसी तरह से कंप्यूटर ऑपरेट करने वाले कर्मचारियों को अलाउंस के तौर पर 200 रुपए महीने मिल रहे थे. अब इस भत्ते को भी खत्म कर दिया गया है.

इसी तरह का एक भत्ता कैश हैंडल करने का भी है. सरकारी दफ्तरों में कैशियर को ये भत्ता मिला करता था. अब सरकारी दफ्तरों में सैलरी कैश में नहीं मिलती. कर्मचारियों के खाते में सीधे चली जाती है. इसलिए कैश हैंडल अलाउंस का कोई मतलब नहीं रह गया था.

उत्तराखंड सरकार ने भी हाल ही में ऐसे 15 भत्तों को खत्म कर दिया था. इन भत्तों के जरिए सरकारी कर्मचारियों को बहुत ही मामूली पैसे मिल रहे थे. उन्हें महीने के 20 से 100 रुपए तक इन भत्तों के जरिए हासिल हो रहे थे.

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First published: August 23, 2019, 4:50 PM IST
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