कश्मीर में अब आप जमीन खरीद सकते हैं, हिमाचल और नार्थ ईस्ट में क्यों नहीं?

हिमाचल प्रदेश स्थित स्पिति वैली की तस्वीर.
हिमाचल प्रदेश स्थित स्पिति वैली की तस्वीर.

साल 2019 में जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) के विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया गया था, तब चर्चा चली थी कि क्या देश के लोग यहां ज़मीन खरीद सकेंगे? अब कश्मीर में ज़मीन खरीदी (Land Purchase) संभव होने पर सवाल ऐसे बाकी राज्यों से जुड़ा है.

  • News18India
  • Last Updated: October 28, 2020, 5:47 PM IST
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केंद्र सरकार (Central Government) ने जो ताज़ा अधिसूचना जारी की है, उसके मुताबिक अब कोई भी भारतीय जम्मू और कश्मीर के साथ ही लद्दाख (Ladakh) में ज़मीन खरीद सकता है. इससे पहले, सिर्फ स्थायी निवासियों को ही यह अधिकार मिला हुआ था, लेकिन पिछले साल जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों (Union Territory) में बांटने के बाद हालात बदले हैं. इस ताज़ा खबर के चलते विचार करने की बात यह है कि अब भी उत्तर पूर्व के राज्यों (North East States) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में क्यों हर भारतीय को ज़मीन खरीदने का अधिकार नहीं है.

गृह मंत्रालय ने साफ किया कि केंद्रशासित प्रदेश में कुछ शर्तों के साथ कोई भी भारतीय प्रॉपर्टी खरीद बेच सकेगा और साथ ही, स्थायी निवासी संबंधी नियमों में भी तब्दीली की गई है. जैसे अब कश्मीरी व्यक्ति के पति या पत्नी को कश्मीरी नागरिक माना जाएगा. लेकिन, इस घोषणा के बाद बड़ा मुद्दा कृषि भूमि का है. कृषि भूमि के उद्योगों की भेंट चढ़ जाने का खतरा स्थानीय नेता देख रहे हैं और इस व्यवस्था की आलोचना कर रहे हैं.





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हालांकि, जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा के मुताबिक किसानों की ज़मीनें सुरक्षित रहेंगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इंडस्ट्रीज़ को ज़मीन रैंडम तरीके से अलॉट नहीं की जा सकेगी. विकास और रोज़गार के लिए उद्योग की ज़रूरत है लेकिन सरकार ने कहा है कि पहाड़ी राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण का ध्यान रखा जाएगा. नियमों में यह भी कहा गया है कि कृषि भूमि को सरकारी अप्रूवल के बाद ट्रांसफर किया जा सकेगा.

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कश्मीर और लद्दाख में बाहरी राज्यों के लोग अब ज़मीन खरीद सकेंगे.


आप हिमाचली नहीं हैं, तो हिमाचल में ज़मीन खरीद सकते हैं?
मोटे तौर पर इस सवाल का जवाब है, नहीं, लेकिन कुछ शर्तों के साथ यह मुमकिन भी होता है. टेनेंसी एक्ट के सेक्शन 118 के तहत कोई गैर हिमाचली व्यक्ति हिमाचल प्रदेश में ज़मीन नहीं खरीद सकता, लेकिन विशेष प्रावधान इसकी इजाज़त भी देते हैं.

* राज्य सरकार की इजाज़त मिलने पर आप गैर कृषि भूमि खरीद सकते हैं.
* हिमाचल प्रदेश के टेनेंसी और लैंड रिफॉर्म रूल्स 1975 के रूल 38A (3) के तहत आपको ज़मीन खरीदने के मकसद के बारे में तमाम जानकारियां देना होती हैं. यानी आप ज़मीन आवासीय/व्यावसायिक/औद्योगिक/शैक्षणिक/स्वास्थ्य सेवा या व्यापार यानी किस इरादे से खरीद रहे हैं. आपके आवेदन पर विचार के बाद 500 वर्गमीटर तक की ज़मीन के लिए परमिशन दी जा सकती है.
* अगर आप हिमाचली नहीं हैं, तो आप हिमाचल में कृषि भूमि नहीं खरीद सकते. भले ही देश के किसी हिस्से में आप किसान हों, कृषि के उद्देश्य से ही ज़मीन चाहें, तो भी आप यहां कृषि भूमि नहीं खरीदने का अधिकार नहीं रखते.

क्यों नॉर्थ ईस्ट में नहीं खरीद सकते ज़मीन?
उत्तर पूर्व के राज्य अब भी संविधान के छठे शेड्यूल में दर्ज हैं यानी विशेष दर्जा प्राप्त हैं. यहां गैर आदिवासी लोगों और बाहरी लोगों को ज़मीन खरीदने का अधिकार नहीं है. लेकिन राज्य के अनुसार नॉर्थ ईस्ट में कुछ अलग प्रावधान हैं. इन्हें जानते हैं.

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* असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के आदिवासी क्षेत्र संविधान के आर्टिकल 244 के प्रावधानों के तहत हैं.
* मिज़ोरम और नागालैंड को क्रमश: आर्टिकल 371जी और 371ए के तहत सुरक्षा मिली हुई है. यहां के मूल आदिवासियों के पास अपनी ज़मीनों के रिज़र्व अधिकार हैं.
* मिज़ोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में 1873 के बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन के तहत इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू है यानी अन्य राज्यों के लोग बगैर इस परमिट के इन राज्यों में जा नहीं सकते. और जब जा तक नहीं सकते तो ज़मीन भी नहीं खरीद सकते. मणिपुर में भी इसी तरह की व्यवस्था है.

असम का मामला थोड़ा अलग है. यहां कई इलाके ट्राइबल बेल्ट हैं, जहां गैर आदिवासी ज़मीन नहीं खरीद सकते. असम में 17 ट्राइबल बेल्ट और 30 ब्लॉक हैं, जहां बोडोलैंड काउंसिल के तहत गैर आदिवासियों को ज़मीन खरीदने का अधिकार नहीं है. इसके बावजूद, आदिवासी आरोप लगाते रहे हैं कि फर्ज़ी दस्तावेज़ों के साथ उनकी ज़मीनों पर अतिक्रमण और गैर कानूनी खरीद फरोख्त की जाती रही है. गौरतलब है कि आज़ादी के बाद से असम में चार भूमि नीतियां 1958, 1968, 1972 और 1989 में बनीं.

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कुल मिलाकर किस्सा ये है कि आप इस तरह की बातें या सवाल अक्सर सुन सकते हैं कि पंजाब में रहकर कनाडा, अमेरिका या यूरोप में ज़मीन खरीदी जा सकती है, लेकिन पड़ोसी राज्य हिमाचल में क्यों नहीं? इसी तरह नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में भी. इसका जवाब यही है कि यहां की आदिवासी परंपराओं, अधिकारों और पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से इस तरह के प्रावधान किए गए हैं.
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