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प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाने में आप कितने भागीदार हैं, ऐसे नापें

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: November 1, 2019, 2:35 PM IST
प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाने में आप कितने भागीदार हैं, ऐसे नापें
जानें क्या कहते हैं प्रति व्यक्ति प्रदूषण के आंकड़े.

दिल्ली में जानलेवा होते जा रहे वायु प्रदूषण (Air Pollution) के चलते क्लाईमेट मुद्दों (Climate Change) पर फिर बहस छिड़ी है. जानिए कि आप खुद कितना प्रदूषण फैलाते हैं और इसे आप कैसे नापेंगे.

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  • Last Updated: November 1, 2019, 2:35 PM IST
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प्रदूषण (Pollution) को मापने का एक बड़ा और अहम पैमाना है कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को मापना. एक रिपोर्ट की मानें तो दुनिया की सिर्फ 100 कंपनियां दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन में से 70 फीसदी से ज़्यादा के लिए ज़िम्मेदार हैं. इस तरह की रिपोर्ट्स और बातें आप सुनते पढ़ते रहे हैं कि कौन सा सेक्टर या कौन सी कंपनी कितना प्रदूषण (Industrial Pollution) फैलाते हैं, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आप खुद कितना प्रदूषण फैलाते हैं? यानी कार्बन उत्सर्जन के हिसाब से देखा जाए तो आपका कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) क्या है, जिसे जानकर आप ये समझ सकते हैं कि दुनिया के प्रदूषण (Pollution Worldwide) में आप कितने भागीदार हैं.

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भारत की राष्ट्रीय राजधानी और राज्य दिल्ली के आसपास प्रदूषण विकराल हो चुका है और हवा घातक हो चुकी है. इससे एक महीने पहले ही जिनेवा में क्लाइमेट मीट (Climate Meet) में दुनिया के कई देशों ने पर्यावरण (Environment) को लेकर चिंताएं जताईं और विमर्श किया था. लेकिन, स्थिति यह है कि प्रदूषण भयानक समस्या के रूप में बरकरार है. इसी सिलसिले में आपको जानना चाहिए कि पर्यावरण के लिए खतरनाक कार्बन उत्सर्जन के लिए आप कितने ज़िम्मेदार (Per Capita Carbon Emission) हैं और ये आप कैसे पता लगा सकते हैं. ये भी जानें कि कार्बन फुटप्रिंट क्या होता है और आपका कितना है.

क्या होता है कार्बन फुटप्रिंट?

एक व्यक्ति, संस्था या कोई चीज़ पर्यावरण के लिए खतरनाक जितनी ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन करती है, उसे कार्बन फुटप्रिंट कहते हैं. ग्रीनहाउस गैसों के कारण ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज के खतरे बढ़ते हैं. तो आपका कार्बन फुटप्रिंट ये बताता है कि पर्यावरण पर आपकी जीवनशैली कैसे और कितना असर डालती है. ऐसे समझें कि अगर आप अपने निजी वाहन से रोज़ाना दफ्तर जाते हैं तो आपका कार्बन फुटप्रिंट उस व्यक्ति की तुलना में ज़्यादा होगा, जो सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करता है.

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भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन ग्लोबल एवरेज से हालांकि कम है लेकिन एक व्यक्ति औसतन कितना प्रदूषण फैलाने का ज़िम्मेदार है, इसके आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं. फाइल फोटो.

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कैसे नापा जाता है कार्बन फुटप्रिंट?
आप क्या खाते हैं? इससे लेकर आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में किन चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं, इन सब बातों से आपका कार्बन फुटप्रिंट नापा जा सकता है. कार्बन फुटप्रिंट को नापने की इकाई है CO2e यानी आपका कार्बन उत्सर्जन कितनी कार्बन डाइऑक्साइड के इक्विवेलेंट यानी बराबर है.

आपका कार्बन फुटप्रिंट कितना है?
आपकी जीवन शैली के बारे में जानकर कुछ ऑनलाइन कैल्कुलेटर इस मामले में आपकी मदद कर सकते हैं. वैसे मोटे तौर पर ऐसे समझिए कि आप घर में कितनी बिजली, कितना और कौन सा ईंधन इस्तेमाल करते हैं. किस तरह से ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करते हैं और रोज़ाना कितना कचरा पैदा करते हैं और क्या उसकी रिसाइकिलिंग करते हैं, जैसे सवालों के जवाब देकर आप समझ सकते हैं कि आपका कार्बन फुटप्रिंट क्या है यानी आप प्रदूषण मेंं कितने भागीदार हैं.

कितना होता है कार्बन फुटप्रिंट?
प्रति व्यक्ति कार्बन फुट​प्रिंट को लेकर देशों के हिसाब से कई शोध और आंकड़े आ चुके हैं और हर साल आते हैं. एक व्यक्ति कितने मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करता है, वह उसका कार्बन फुटप्रिंट होता है. ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट ने पिछले साल 2017 तक के आंकड़े छापते हुए बताया था कि भारत दुनिया में कार्बन उत्सर्जन के मामले में चौथे नंबर पर है और चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ से ही पीछे है.

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कार्बनब्रीफ पोर्टल से साभार.


हालांकि भारत में प्रति व्यक्ति कार्बन फुटप्रिंट 2 टन कार्बन से कम का रहा है जबकि अमेरिका में ये आंकड़ा प्रति व्यक्ति 20 टन तक का है. इस मामले में दुनिया का एवरेज 4.2 टन का है. कुल मिलाकर एक व्यक्ति भारत में करीब 2 टन कार्बन का उत्सर्जन कर रहा है. अपनी जीवन शैली पर नज़र रखें और समझें कि इस प्रदूषण में आप कितने भागीदार हैं और अपनी जीवनशैली को सुधारकर किस तरह आप इसे कम कर कुदरत के लिए मददगार साबित हो सकते हैं.

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First published: November 1, 2019, 2:35 PM IST
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