युवा पृथ्वी पर थे आज के शुक्र ग्रह के वायुमंडलीय हालात, जानिए कैसे पता चला ये

जैसा वायुमंडल (Atmosphere) आज शुक्र ग्रह (Venus) पर वैसा एक समय में पृथ्वी (Earth) पर हुआ करता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) की पुरातन चट्टानों से संबंधित शोध से पता चला है कि पुराने समय में हमारे ग्रह का वायुमंडल (Atmosphere) वैसा ही था जैसा आज के शुक्र ग्रह (Venus) का वायुमंडल है.

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    आज हमारे वैज्ञानिक पृथ्वी (Earth) से बाहर के ग्रहों (Planets) में जीवन की संभावनाएं (Possibility of life) तलाश रहे हैं. सुदूर बाह्यग्रहों (Exoplanets) में जीवन की अनुकूलता के पैमाने तो पृथ्वी के आधार पर ही तय किए गए हैं. ऐसा लगता है कि पृथ्वी जीवन की अनुकूलता का सबसे सटीक उदाहरण हैं. लेकिन अरबों साल पहले ऐसा नहीं था. पृथ्वी वैसी नहीं थी जैसी कि आज है बल्कि आज जैसे वायुमंडलीय (Atmospheric) हालात शुक्र ग्रह (Venus) के हैं बिलकुल वैसे ही हालात एक समय में पृथ्वी पर ही थे.

    बहुत से प्रमाण देते हैं ये संकेत
    बहुत सारे वैज्ञानिक अध्ययन और भूगर्भीय प्रमाण ये संकेत देते हैं कि करीब साढ़े चार अरब साल पहले पृथ्वी पूरी तरह से मैग्मा से ढकी थी जो ज्वालामुखी प्रस्फोटों से निकला करता था. उस समय का वायुमंडल कैसा हुआ करता था यह ऐसा विषय है जिस पर शोध नहीं हो सका है. लेकिन अब ETH ज्यूरिक और NCCR PlantS के यूरोपीय वैज्ञानिकों ने इस विषय से उपजे अंतर को कम करने की कोशिश की है. उनके शोध ने पृथ्वी के पुराने वायुमंडलीय हालातों पर रोशनी डालने का काम किया है.

    इस बात पर दिया अध्ययन में जोर
    इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बार बार किए जाने वाले बहुत सारे प्रयोग किए और यह पता लगाने का प्रयास किया कि जिस समय पूरी पृथ्वी की सतह पर मैग्मा छाया हुआ था, उस समय वायमंडल कैसा हुआ करता था. उस समय पृथ्वी पर होने वाले वायुमंडलीय हालातों को सिम्यूलेट करने के लिए वैज्ञानिकों ने ऑक्सीजन  तत्व पर ध्यान केंद्रित किया और यह जानने की कोशिश की कि उन हालातो में वह कैसे दूसरे तत्वों से प्रतिक्रिया करती थी.

    मैग्मा और वायुमंडल में संबंध
    इस अध्ययन के प्रमुख लेखक पाओलो सॉसी ने बताया, “साढ़े चार अरब साल पहले मैग्मा लगातार अपने ऊपर के वायुमंडल से गैसों का आदान प्रदान किया करता था. इसलिए दोनों ही एक दूसरे पर असर डाला करते थे. इसलिए आप एक से दूसरे के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं.”

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    पुराने समय में पृथ्वी (Earth) पर ज्वालामुखी गतिविधियां (volcanic activity) ज्यादा थी जिसकी वजह से मैग्मा (Magna) पूरे ग्रह पर फैल गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    क्या किया प्रयोगों में
    इसके लिए शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के पिघले हुए मैंटल की सरंचना वाले रसायनों के साथ एक पाउडर मिलाया और उसे लेसर की मदद से 1900 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा तापमान पर गर्म कर पिघलाया. इसके बाद टीम ने गैसों के विभिन्न मिश्रणों का उपयोग कर प्रयोगों को दोहराया जिससे उन्हें पृथ्वी के शुरुआती वायुमंडल की संरचना का पता चल सके.

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    क्या खोजने का प्रयास था
    इस अध्ययन में पता चला कि हर गैस के मिश्रण के साथ मैग्मा ने महीन बदालाव प्रदर्शित किए. सॉसी ने बताया, “जिस खास बदलाव को हम जानना चाह रहे थे वह था कि मैग्मा के अंदर लोहा ऑक्सीकृत होकर कैसा हो जाता है. बदलावों का अध्ययन करन के बाद, ठंडे मैग्मा के ऑक्सीकृत लोहे के स्तर की तुलना पृथ्वी की मैंटर पेरीडोटाइट चट्टानों के नमूनों से की गई जिनमें हमारे ग्रह के पुरातन वायुमंडल के संकेत छिपे हुए हैं.

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    शुक्र ग्रह (Venus) का रासायनिक संयोजन वैसा ही है जैसा कभी पृथ्वी (Earth) पर था.(तस्वीर: Pixabay)


    इन तत्वों की बहुतायत
    सॉसी ने बताया, “हमने पाया कि मैग्मा से ठंडे होने क बाद युवा पृथ्वी का वायुमंडल ऑक्सीकरण करने वाला था जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड प्रमुख तत्व था जबकि साथ में नाइट्रोजन और पानी भी मौजूद थे.” इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि युवा पृथ्वी में एक घना वायुमंडल था जिसमें कार्बनडाइऑक्साइड भरपूर था और नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइट कम हुआ करती थी.

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    यह बिलकुल वैसा ही है जैसा आज शुक्र ग्रह पर माहौल हैं. शोधकर्ताओं के अध्ययन ने यह निष्कर्ष भी निकाला कि पृथ्वी और शुक्र ग्रहों का वायुमंडल शुरुआती सालों में एक ही जैसा था. शुक्र ने जहां अपना पानी उच्च तापमान और सूर्य के पास होने की वजह से खो दिया. वहीं कार्बन ऑक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैस की बहुतायत ने शुक्र को और ज्यादा गर्म बना दिया. वहीं पृथ्वी का पानी कायम रहा और यहां महासागर बन गए जिससे लाखों सालों में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हो गई.

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