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Covid Lockdown: अजीब वजह से स्कूल खोलने पर जोर दिया जा रहा है जिम्बाब्वे में

Covid Lockdown: अजीब वजह से स्कूल खोलने पर जोर दिया जा रहा है जिम्बाब्वे में

जिम्बाब्वे (Zimbabwe) के स्कूल मार्च 2020 से बंद हैं और पूरी तरह से अभी तक नहीं खुले हैं. (तस्वीर: Richard Juilliart / Shutterstock)

जिम्बाब्वे (Zimbabwe) के स्कूल मार्च 2020 से बंद हैं और पूरी तरह से अभी तक नहीं खुले हैं. (तस्वीर: Richard Juilliart / Shutterstock)

जिम्बाबवे (Zimbabwe) ने मार्च 2020 में सख्त लॉकडाउन (Lockdown) लगाया था जिसमें स्कूल कॉलेज भी बंद थे जो बाद में बीच बीच में खोले भी गए. लेकिन इस प्रक्रिया के कारण इस देश में एक पुरानी समस्या फिर से सिर उठाने लगी है. लॉकडाउन के कारण स्कूल कॉलेज बंद होने से लड़कियों (Girls of Zimbabwe) के जल्दी विवाह होने और उनके जल्दी गर्भवती हो जाने की दर में बहुत ही तेजी से इजाफा हुआ है. इससे अब फिर से स्कूल खोलने पर जोर दिया जा रहा है.

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    कोविड-19 (Covid-19) महामारी फैलने से दुनिया के बहुत से देशों में लॉकडाउन (Lockdown) कई तरह की समस्याएं लेकर आया था. फिलहाल ओमिक्रॉन के फैलने से यूरोप के कुछ देश लॉकडाउन लगा रहे हैं. लॉकडाउन को लागू करना भी आसान काम नहीं होता है. जिम्बाब्वे  (Zimbabwe) भी उन्हीं देशों में एक था जिसने दो साल पहले लॉकडाउन लगाया था. लेकिन लॉकडाउन के कारण इस देश को एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ा. यहां की लड़कियां लॉकडाउन के दौरान गर्भधारण करने की गति बहुत ही ज्यादा तेजी से बढ़ गई है. महामारी के दौरान ऐसा सिर्फ जिम्बाब्वे के साथ ही नहीं बल्कि दक्षिणी अफ्रीका के कई देशों में देखने को मिला है.

    पुरानी समस्या
    जिम्बाब्वे लंबे समय से इस तरह के गर्भधारणों और बाल विवाहों से संघर्ष कर रहा है.  कोविड-19 के पहले भी देश में 18 साल से कम उम्र की हर तीन में से एक लड़की की शादी हो जाती थी. इसमें अधिकांश अनियोजित गर्भवती हो जाती थीं क्योंकि गर्भनिरोधक उपायों संबंधी कानूनों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता था. इसके अलावा गरीबी, सांस्कृतिक और धार्मिक कारण भी थे.

    बंद ही रहे स्कूल
    पहले हालात इतने बेकाबू या चिंताजनक नहीं थे, लेकन कोरोना वायरस के फैलने से स्थिति गंभीर हो गई.  मार्च 2020 से देश के 1.5 करोड़ लोगों पर सख्ती से लॉक़डाउन लागू कर दिया गया. इससे छह महीने के लिए स्कूल पूरी तरह बंद हो गए उसके बाद में वे बीच बीच में ही खोले जा सके.

    लड़कियों पर पड़ा असर
    इससे लड़कियां खास तौर से अकेली पड़ गईं और उनकी गर्भनिरोधक साधनों और क्लीनिकों तक पहुंच खत्म हो गी. इससे गरीबों की समस्याएं बहुत बढ़ गई. कई लोगों का कहना है कि बहुत सारी लड़की यौन शोषण का शिकार हो गई या फिर शादी और गर्भधारण के विकल्प को अपनाने को मजबूर हो गईं.

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    जिम्बाब्वे (Zimbabwe) में लड़कियों को गर्भवती होने के बाद स्कूल जाने पर जिल्लत सहनी पड़ती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    नए नियम की नाकामी
    इस तरह की घटनाएं महामारी के पहले हुआ करती थीं लेकिन कम होती थीं. लेकन अगस्त 2020 में ऐसे मामलों के बढ़ने से सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए गर्भवती छात्राओं पर लंबे समय से स्कूल में आने पर लगी रोक हटा दी जिसका सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों ने स्वागत किया. लेकिन अभी तक यह नीति भी नाकाम होती नजर आ रही है.

    क्या रही वजह
    अधिकांश लड़कियां स्कूल वापस नहीं आई हैं. परिवारों और अधिकारियों का कहना है कि इसकी वजह आर्थिक मुश्कलें,  गहराई में जड़े जमाए सामाजिक मान्यताएं, बदनामी और कक्षा में दादागिरी जैसी समस्याएं बताई हैं. कई लड़कियों ने स्कूल जाने का प्रयास भी किया, लेकिन वे लगातार स्कूल नहीं जा सकीं.

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    पूरी तरह से छूटा स्कूल
    अधिकारियों ने भी लड़कियों और उनके परिवार वालो को स्कूल भेजने केलिए मनाया, लेकिन ऐसी लड़कियां छेड़खानी और तानों का शिकार हो कर निराश हो गईं और अन्य वजहों के कारण उन्होंने अंततः स्कूल जाना ही छोड़ दिया. वहीं कई लड़कियां धोखे का शिकार हुईं और गर्भवती होने के बाद उनसे विवाह नहीं किया गया अब वे अपने बच्चे को पालने के लिए आर्थिक समस्याओं से भी घिरी हैं.

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    इस तरह की समस्याएं जिम्बाब्वे ही नहीं पूरे दक्षिणी अफ्रीका (Africa) में देखने को मिल रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    कानून भी है लेकिन
    यहां लड़कियों के साथ यौनाचार कर धोखा देना भी अपवाद नहीं है. कई बार ऐसे मामलों की पुलिस में रिपोर्ट भी नहीं की जाती जबकि जिम्बाब्वे का कानून 16 साल की लड़की से बिना सहमति संबंध बनाने को गैरकानूनी मानता है. इसके मुताबिक अगर कोई 16 साल से कम उम्र की लड़की से शारीरिक संबंध बनाने का दोषी पाया जाता है तो उसे 10 साल जेल का भी प्रावधान है.

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    परिवारों में अक्सर पिड़िता के साथ बातचीत कर उन्हें शादी के लिए मनाने की कोशिश की जाती है. इसके लिए उसके परिवार को पैसा या मवेशी देने की पेशकश भी की जाती है. पुलिस का कहना है कि अंततः  पुलिस में रिपोर्ट ना करने पर सहमति ऐसे अपराधों को और बढ़ावा ही देती है. इससे ऐसे शोषण की मामलों के वास्तविक आंकड़े भी नहीं मिल पाते हैं. स्कूल छोड़ने कई लड़कियां बिना किसी बड़ी वजह से भी स्कूल छोड़ देती हैं. इस तरह की समस्या बोट्सवाना, नामीबिया, लेसोथो मलावी, मैडागास्कर, दक्षिण अफ्रिका और जांबिया में भी देखने को मिली है.

    Tags: COVID 19, Research, World, Zimbabwe

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