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यह पोर्टेबल 3D स्किन प्रिंटर मिनटों में भर देगा झुसले हुए निशान, यहां जानें सबकुछ

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 9:33 AM IST
यह पोर्टेबल 3D स्किन प्रिंटर मिनटों में भर देगा झुसले हुए निशान, यहां जानें सबकुछ
यह रिसर्च जर्नल बायो फेब्रिकेशन में प्रकाशित हुई है. (फोटो साभारः फेसबुक/Engineering360)

यह प्रिंटर बड़े घावों को भरने के लिए उसके ऊपर त्वचा की परतें जमा कर देता है.

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  • Last Updated: February 7, 2020, 9:33 AM IST
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वैज्ञानिकों ने एक ऐसे 3 डी स्किन प्रिंटर को विकसित करने में सफलता हासिल की है, जो जलने के घावों को तेजी से भर सकता है. यह प्रिंटर पेंट रोलर की तरह काम करता है. जिसमें जमा बायो इंक घावों को भरने में मदद करती है.

यह उपकरण यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो इंजीनियरिंग और सनीब्रुक हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है.

 

यह प्रिंटर बड़े घावों को भरने के लिए उसके ऊपर त्वचा की परतें जमा कर देता है.
यह प्रिंटर बड़े घावों को भरने के लिए उसके ऊपर त्वचा की परतें जमा कर देता है.


कैसे काम करता है यह प्रिंटर
इसके बारे में विस्तृत जानकारी जर्नल बायो फेब्रिकेशन में प्रकाशित की गई है. यह प्रिंटर बड़े घावों को भरने के लिए उसके ऊपर त्वचा की परतें जमा कर देता है. इलाज का बदलेगा तरीका जलने के घाव को भरने के लिए वर्तमान में ऑटोलॉगस स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है. लेकिन पूरे शरीर के झुलस जाने पर उसे ठीक करना एक बड़ी चुनौती होती है.

 
इस नई तकनीक से अब इसका इलाज संभव हो जाएगा.
इस नई तकनीक से अब इसका इलाज संभव हो जाएगा.


इस प्रक्रिया से बनेगी नई त्वचा
इस नई तकनीक से अब इसका इलाज संभव हो जाएगा. त्वचा को बनाते हैं सेल्स रोलर द्वारा फैलाई जाने वाली जैविक स्याही मेसेनकाइमल स्ट्रोमा सेल्स से बनी होती है. इसी वजह से यह कोशिकाएं त्वचा को दोबारा बनने में सहायक होती हैं और घाव के निशान को कम देती है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2018 में आया था.

 

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि हम जानते हैं कि रोपी गई चीज में असल में रक्त और पोषक तत्वों का ट्रांसफर हुआ जो रोपी गई चीज को जीवित रख रहे हैं. चिकित्सा स्तर पर इसे इस्तेमाल योग्य बनाने के लिए शोधकर्ताओं को सीआरआईएसपीआर जीन संपादन प्रौद्योगिकी जैसी चीज का इस्तेमाल करते हुए दानदाताओं की कोशिकाओं को संपादित करने में समर्थ होने की जरूरत है, जिससे वाहिकाएं एकीकृत हो सकें और रोगी के शरीर द्वारा स्वीकार की जा सकें. उन्होंने कहा कि अभी हम उस स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उसके करीब हैं.

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First published: February 7, 2020, 9:32 AM IST
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