बच्‍चों के साथ निभाएं दोस्‍ती का रिश्‍ता, बढ़ेंगी नजदीकियां

अपने बच्‍चों के बन जाएं दोस्‍त. Image:Any-Lane/Pexels

अपने बच्‍चों के बन जाएं दोस्‍त. Image:Any-Lane/Pexels

पैरेंट्स (Parents) होने के नाते यह और अहम हो जाता है कि आप अपने बच्‍चों की हर बात को समझें और उन्‍हें अपनी बात समझाने में भी कामयाब रहें. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चों के दोस्‍त (Friend) बनें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 2:42 PM IST
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बच्‍चों की परवरिश में पैरेंट्स (Parents) की भूमिका अहम होती है. खासतौर पर बढ़ती उम्र में बच्‍चों के साथ रिश्‍ते बेहतर बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता. माता-पिता की अपनी दिक्‍कतें होती हैं, तो बच्‍चों की भी अपनी समस्‍याएं होती हैं जिन्‍हें वे कई बार संकोचवश अपने पैरेंट्स से भी शेयर नहीं करते. ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि उनकी बात को समझा जाए और उन्‍हें बेहतर तरीके से समझाया जा सके. कोशिश करनी चाहिए कि आपके बच्‍चों के लिए आपका अनुभव (Experience) फायदेमंद साबित हो. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चों के दोस्‍त (Friend) बन कर उसके करीब जाएं और उनकी बातों को समझें, ताकि वे हर बात आपसे शेयर कर सकें और जिंदगी (Life) के किसी भी मोड़ पर खुद को अकेला न महसूस करें.

जरूरी है अहम मुद्दों पर की जाए बात
जब बच्‍चे बड़े होने लगें तो यह बहुत जरूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्‍चों के साथ ज्‍यादा सख्‍ती न दिखाते हुए दोस्‍ताना रवैया रखें. उनकी अगर वे कुछ गलत करते हैं तो उन्‍हें प्‍यार से समझाएं. उन्‍हें ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप अपनी चीजें अपने बच्‍चों पर थोप रहे हैं. बल्कि वे आपकी बातों को गंभीरता से लेकर उन पर अमल करें. यह तभी संभव है जब वे अपनी समस्‍याएं आपसे डिस्‍कस करने लगें. यानी आप उनके दोस्‍त बन जाएं.

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उनमें जगाएं आत्‍मविश्‍वास


जीवन में अक्‍सर ऐसा समय भी आता है जब उम्‍मीद के बावजूद परिणाम अच्‍छा नहीं आता. कई बार बच्‍चे परीक्षा में अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर पाते. ऐसे में अपने बच्‍चों को दोषी ठहराने की बजाय उनको फिर से मेहनत करने के लिए प्रेरित करें. वरना अगर आप सख्‍ती करेंगे तो हो सकता है कि इससे आपके बच्‍चों का मनोबल टूटने लगे और वे हताशा में कोई गलत कदम उठा लें. इसलिए जरूरी है कि उनमें आत्‍मविश्‍वास जगाया जाए. एक दोस्‍त बन कर उनकी समस्‍या को साझा किया जाए.

बेहतर समझ विकसित करें
अक्‍सर टीनएजर उम्र में किसी के प्रति आकर्षण हो जाना आम बात है. इस उम्र में लड़कों-लड़कियों दोनों से दोस्‍ती भी होती है. ऐसे में अपने बढ़ते बच्‍चों में यह समझ विकसित करें कि वे सही व्‍यक्ति का चुनाव अपने दोस्‍त के तौर पर करें. यह उनके लिए बेहतर रहेगा.

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मार्गदर्शक बन कर चलें साथ
शिक्षा से लेकर करियर तक बच्‍चों के जीवन में अपने पैरेंट्स की भूमिका बहुत खास होती है. बच्‍चे जीवन में बुलंदियों को छू लें और अहम मुकाम हासिल करें यह सभी माता पिता की इच्‍छा होती है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चों के मार्गदर्शक बन कर और एक दोस्‍त की तरह उनके इस सफर में उनके साथ रहें. ताकि वे आपसे दुख भी बांटें और सुख भी और कभी भी अकेलेपन के अंधेरे उन्‍हें निराशा की ओर न ले जाएं.
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