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77 साल की दादी ने लॉकडाउन में शुरू किया फूड स्टार्टअप, अब लोग मदद के लिए आ रहे हैं आगे

77 साल की दादी ने लॉकडाउन में शुरू किया फूड स्टार्टअप, अब लोग मदद के लिए आ रहे हैं आगे

उर्मिला जमनादास की कहानी काफी प्रेरणा देने वाली है (credit: instagram/Gujju Ben na Nasta)

उर्मिला जमनादास की कहानी काफी प्रेरणा देने वाली है (credit: instagram/Gujju Ben na Nasta)

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान हर्ष अपनी दादी उर्मिला जमनादास के साथ थे. उर्मिला जमनादास गुजराती अचार बड़े चाव से बनाती हैं. ऐसे में हर्ष ने अपनी दादी के बनाए अचार की तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी तो लोगों ने काफी अच्छा रिस्पांस दिया.

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    77  वर्षीय उर्मिला जमनादास आशेर हर दिन सुबह 5.30 बजे अपना दिन शुरू करती हैं. वह अपनी बहू, राजश्री और पोते हर्ष के लिए चाय और नाश्ता बनाती है और फिर अखबार पढ़ती हैं. इसके बाद, वह मुंबई के लोगों द्वारा दिए गए खाने के आर्डर को पूरा करने के लिए स्नैक्स तैयार करना शुरू कर देती हैं, जो उनके रेस्तरांनुमा दूकान 'गुज्जू बेन ना नास्ता' में उनके स्वादिष्ट भोजन का स्वाद लेने आते हैं.

    राजश्री सहित दो लोगों की मदद से वह दोपहर तक ऑर्डर देना शुरू कर देती है. देखा जाए तो यह किसी आम भारतीय महिला की दिनचर्या ही प्रतीत होती है जो घर पर ही खाने का बिजनेस चलाती हैं. लेकिन उर्मिला की कहानी इससे काफी अलग है. जीवन की त्रासदी, दर्द और संघर्ष से भरे जीवन यापन के लिए उर्मिला जमनादास ने 77 साल की उम्र में अपना फूड बिजनेस शुरू किया.



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    शादी के कुछ साल बाद ही इमारत ढहने से उनकी ढाई साल की बेटी की मौत हो गई. उसके कुछ सालों बाद उनके दोनों बेटों की भी डेथ हो गई. उनके एक बेटे को ब्रेन ट्यूमर था और दूसरे की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई. ऐसे में उर्मिला जमनादास के पास बस पोता हर्ष ही बचा.

    हर्ष ने 2012 में एमबीए पूरा किया, और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओमान मंत्रालय के साथ काम किया. 2014 में, उन्होंने वाणिज्य दूतावासों और व्यापारियों के वाणिज्य दूतावासों के साथ सहयोग देने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी.

    हालांकि, 2019 में एक दुर्घटना में हर्ष ने अपना ऊपरी होंठ खो दिया. हादसे के बाद से हर्ष अपने घर से बाहर निकलने में परहेज करने लगे थे और डिप्रेशन में चले गए थे. ऐसे में वो घर की आर्थिक सहायता भी नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में दादी उर्मिला जमनादास ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और हौंसला दिया कि तुम पढ़े लिखे मेहनतकश हो खुद पर भरोसा रखो.




    पिछले साल लॉकडाउन के दौरान हर्ष अपनी दादी उर्मिला जमनादास के साथ थे. उर्मिला जमनादास गुजराती अचार बड़े चाव से बनाती हैं. ऐसे में हर्ष ने अपनी दादी के बनाए अचार की तस्वीर लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी तो लोगों ने काफी अच्छा रिस्पांस दिया.

    हर्ष बताते हैं कि जब डिमांड बढ़ने लगी तो हमने प्रोडक्ट भी बढ़ा दिए. अचार के साथ-साथ सूखा और गर्म नाश्ता भी हम लोगों तक पहुंचाने लगे. धीरे-धीरे हमने दायरा बढ़ाया और कुछ महीने बाद 'गुज्जू बेन ना नास्ता' नाम से अपनी एक दुकान खोली. चूंकि हम लोग गुजराती कम्युनिटी से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए ये नाम रखा है. इसका मतलब होता है गुजरात की बहन के हाथ का बनाया नाश्ता. यहां हम दादी के बनाए सारे प्रोडक्ट रखते हैं. लोग दुकान से भी हमारे प्रोडक्ट खरीदते हैं और हम ऑनलाइन भी सेल करते हैं. गर्म नाश्ते की डिलीवरी तो फिलहाल मुंबई तक सीमित है. लेकिन दादी के बनाए चिप्स, अचार, कुकीज, खाखरा जैसे प्रोडक्ट ऑनलाइन मुंबई के बाहर भी भेजते हैं.

    सभी प्रोडक्ट की रेसिपीज बनाने का काम उर्मिला करती हैं. जबकि हर्ष मार्केटिंग और अकाउंटेंट का काम संभालते हैं. इसके साथ ही उन्होंने दो महिलाओं और तीन लड़कों को अपनी मदद के लिए रखा है. उर्मिला की दोनों बहुएं भी उनके काम में हाथ बंटाती हैं. अब इस काम में उन्हें लोगों की मदद भी मिल रही है.

    Tags: Corona, Corona Lockdown, Lifestyle

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