सिंदूर और बिंदी में मौजूद घातक तत्वों की जांच करेगा AIIMS

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Updated: September 1, 2019, 1:25 PM IST
सिंदूर और बिंदी में मौजूद घातक तत्वों की जांच करेगा AIIMS
अभी हाल ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एम्स और देश के कई बड़े सरकारी संस्थानों के त्वचा रोग विशेषज्ञयों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है

अभी हाल ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एम्स और देश के कई बड़े सरकारी संस्थानों के त्वचा रोग विशेषज्ञयों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है

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  • Last Updated: September 1, 2019, 1:25 PM IST
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जब भी सिंदूर और बिंदी में मौजूद घातक तत्वों पर बहस होना शुरू होता है, लोग इसे धर्म के चश्मे से देखने लगते हैं. लेकिन एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जल्द ही इसमें मिलाए जाने वाले घातक तत्वों की जांच कर सच सामने लाने वाली है. अभी हाल ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एम्स और देश के कई बड़े सरकारी संस्थानों के त्वचा रोग विशेषज्ञयों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. इन संस्थान द्वारा करवाए जाने वाले जांच में आए परिणाम को देखते हुए सरकार सिंदूर और बिंदी के निर्माण संबंधी नियमों को तैयार कर सख्ती से लागू कर सकती है.

आज छोटे शहरों में भी बिंदी और सिंदूर का निर्माण हो रहा है. इसे लेकर न ही किसी तरह का नियम है न कानून. यही कारण है कि सिंदूर और बिंदी जैसे प्रोडक्ट में एजीडाई नामक घातक तत्व मिलाया जा रहा है. एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि सिंदूर और बिंदी का असर त्वचा पर पड़ रहा है. कुछ मामलों में तो ऑपरेशन तक की नौबत आ गई है.

एजीडाई एक ऐसा रासायनिक तत्व है जो न सिर्फ त्वचा को भीतर से जलाकर पतला करता है बल्कि कई बार एलर्जेंट का भी काम करता है.

डॉक्टरों का कहना है कि हर्बल उत्पाद, मेंहदी आदि में इन रासायनिक तत्वों की जांच के लिए दिल्ली और अन्य राज्यों से 55 सैंपल एकत्रित किए गए हैं. इन सैंपल की जांच चल रही है. अगले महीने एम्स पूरी दुनिया के सामने हर्बल उत्पादों की सच्चाई सामने लेकर आएगा. डॉक्टरों का कहना है कि यहां तक की बालों की डाई, मेहंदी में पीपीडी रसायन का इस्तेमाल हो रहा है. इसीलिए एम्स के शोध में आईआईटी रुड़की और ऋषिकेश एम्स की मदद ली गई है.

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First published: September 1, 2019, 1:25 PM IST
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