होम /न्यूज /जीवन शैली /

वायु प्रदूषण से केवल सांस संबंधी ही नहीं, डिप्रेशन का भी खतरा - रिसर्च

वायु प्रदूषण से केवल सांस संबंधी ही नहीं, डिप्रेशन का भी खतरा - रिसर्च

अत्यधिक प्रदूषण वाले इलाकों में अधिकाधिक लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं. पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से लोगों का व्यवहार बदलने लगता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

अत्यधिक प्रदूषण वाले इलाकों में अधिकाधिक लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं. पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से लोगों का व्यवहार बदलने लगता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Air Pollution also threatens Depression : अपनी तरह के पहले शोध में बताया गया है कि आनुवांशिकता (Heredity) और वायु प्रदूषण (Air Pollution) मिलकर हेल्दी लोगों में अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) के खतरे को बढ़ा देते हैं. इस स्टडी के मुताबिक हवा में घुले अत्यधिक प्रदूषित कण जब सांस के जरिये उन स्वस्थ लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं जिनमें अवसाद के जींस मौजूद हैं, उन्हें यह बीमारी हो सकती है. जरनल पीएनएएस में प्रकाशित इस रिसर्च में वायु प्रदूषण(Air Pollution), न्यूरो इमेजिंग (Neuro Imaging), ब्रेन जीन एक्सप्रेशन (Brain Gene Expression) और अन्य अतिरिक्त वैज्ञानिक आंकड़ों की मदद से 40 से अधिक देशों के लोगों का अंतरराष्ट्रीय आनुवांशिक संग्रहालय (International Genetic Museum) बनाया गया है.

अधिक पढ़ें ...

    Air Pollution also threatens Depression : उत्तर भारत में दिवाली के बाद से वायु प्रदूषण (Air Pollution) अचानक से बढ़ जाता है. ऐसे में आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है. लेकिन अब अपनी तरह के पहले शोध में बताया गया है कि आनुवांशिकता (Heredity) और वायु प्रदूषण (Air Pollution) मिलकर हेल्दी लोगों में अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) के खतरे को बढ़ा देते हैं. इस स्टडी के मुताबिक हवा में घुले अत्यधिक प्रदूषित कण जब सांस के जरिये उन स्वस्थ लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं जिनमें अवसाद के जींस मौजूद हैं, उन्हें यह बीमारी हो सकती है. जरनल पीएनएएस में प्रकाशित इस रिसर्च में वायु प्रदूषण(Air Pollution), न्यूरो इमेजिंग (Neuro Imaging), ब्रेन जीन एक्सप्रेशन (Brain Gene Expression) और अन्य अतिरिक्त वैज्ञानिक आंकड़ों की मदद से 40 से अधिक देशों के लोगों का अंतरराष्ट्रीय आनुवांशिक संग्रहालय (International Genetic Museum) बनाया गया है.

    चीन की पेकिंग विश्वविद्यालय (Peking University) के सहयोग से इस रिसर्च को लीड करने वाले अमेरिका में एलआईबीडी यानी लेबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलेपमेंट (labor institute for brain development) के हाओ यांग टैन (Hao Yang Tan) ने बताया कि इस शोध का अहम संदेश यह है कि वायु प्रदूषण दिमाग की भावनात्मक और पहचान संबंधी क्षमता को प्रभावित करके बदल रहा है. यह बदलाव लोगों को अवसाद (Depression) की ओर ढकेल रहा है.

    प्रदूषण बढ़ने से बदलता है बिहेवियर
    टैन ने बताया कि अत्यधिक प्रदूषण वाले इलाकों में अधिकाधिक लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं. पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने से लोगों का व्यवहार बदलने लगता है.

    यह भी पढ़ें- प्रेग्‍नेंसी के दौरान फिट रहने के लिए एक्‍सरसाइज के अलावा इन 5 बातों का भी रखें ख्‍याल

    शोधकर्ताओं के अनुसार कमोबेश सभी लोगों में अवसाद होने की आशंका होती है, लेकिन कुछ लोगों में उनकी आनुवांशिकता के कारण इसका खतरा अत्यधिक रहता है.

    यह भी पढ़ें- सर्दियों में नाक हो जाती है ड्राई तो ट्राई करें ये 4 घरेलू नुस्खे, नहीं पड़ेगी नोज़ल ड्रॉप की जरूरत

    साइंटिस्टों का कहना है कि वायु प्रदूषण (Air Pollution) सिर्फ श्वसन रोगों (respiratory diseases) ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य (mental health) के लिए भी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. इस बारे में लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है.

    Tags: Depression, Health, Health News, Lifestyle

    अगली ख़बर