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मिस्र में ममी पर होता था अजवाइन का लेप, जानें इस मसाले से जुड़ी रोचक बातें

भारत में अजवाइन का औषधि और मसाले दोनों के रूप में प्रयोग किया जाता है.

भारत में अजवाइन का औषधि और मसाले दोनों के रूप में प्रयोग किया जाता है.

अजवाइन हर प्रकार के अन्न को पचाने में सक्षम है. पेट में गैस व दर्द में इसका चूर्ण रामबाण है. एक पोटली में अजवाइन बांधकर बार-बार सूंघने से सिरदर्द और जुकाम से आराम मिलता है. गले में दर्द हो तो अजवाइन की पोटली बांधने से राहत महसूस होती है.

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भारत में मसाले के रूप में प्रयोग आने वाली अजवाइन का वैश्विक इतिहास रहस्य से भरा है. भारत में इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल में लाया जाता है. लेकिन मिस्र और यूनान आदि देशों में शुरुआती दौर में इसका प्रयोग चौंकाने वाला है. वैसे इस बात में कोई दो-राय नहीं कि अजवाइन जादुई गुणों से भरपूर है. भारत में तो पेट दर्द, गैस से छुटकारा पाने के लिए सालों से इसका उपयोग किया जा रहा है.

अजवाइन का इतिहास हजारों साल पुराना
अजवाइन का इतिहास भी हजारों साल पुराना है. कई देशों में शुरू में इसे जड़ी-बूटी माना गया तो भारत में इसे मसाला और औषधि भी समझा गया. इसके मूल निवास को लेकर कई दावे हैं. वैसे पड़ताल में पता चला है कि अजवाइन कुछ सालों के अंतराल के बाद किसी देश में नजर आई तो कुछ सालों बाद किसी और देश में. एक पक्ष यह कहता है कि अजवाइन स्पेन से इटली तक दक्षिणी यूरोप से निकली है. इसके बाद यह ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी एशिया, उत्तरी अफ्रीका, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा होना शुरू हो गई. भारत में भी इसका इतिहास हजारों साल पुराना है, क्योंकि आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका विस्तार से वर्णन है. कहा यह भी गया कि अजवाइन का पौधा ईरान, मिस्र, भारत में पैदा होकर दूसरे देशों में पहुंचा. आजकल भारत में इसकी सबसे अधिक खेती दक्षिण भारत में होती है.

अजवाइन का पौधा ईरान, मिस्र, भारत में पैदा होकर दूसरे देशों में पहुंचा.

अजवाइन का पौधा ईरान, मिस्र, भारत में पैदा होकर दूसरे देशों में पहुंचा.

मिस्र में ममी पर होता था अजवाइन का लेप
पुराने समय की ओर लौटें तो पाएंगे कि अजवाइन काफी रहस्यमयी जड़ी-बूटी मानी गई. मिस्र में ममी को सहेजने का रिवाज रहा है. ममी को सुरक्षित रखने के लिए शवों पर अजवाइन और मेहंदी का लेप भी किया जाता था. प्राचीनकाल में यूनान के लोग अपने मंदिरों में धूप के रूप में अजवाइन को जलाते थे और मानते थे कि ऐसा करने से ईश्वर उनकी रक्षा करता है. यूनानी लोग स्नान करने से पहले पानी में अजवाइन ओर उसकी पत्तियों को छोड़ देते थे, ताकि शरीर स्वस्थ व निरोगी रहे. अजवाइन को घरों में जलाया जाता था ताकि हवा शुद्ध रहे. यूरोप में भी मध्य युग में यह मान्यता थी कि अजवाइन की पत्तियों को तकिए के नीचे रखकर सोया जाए तो बुरे सपनों से मुक्ति मिलती है.

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इसकी विशेषताओं की बात करें तो उसी दौर में युद्ध में जाने वाले शूरवीरों को घरों की महिलाएं अजवाइन और उसके पत्ते पेश करती थीं, ताकि उनमें साहस भर जाए और वे विजयी होकर लौटें. बाद में मिस्र में अजवाइन और उसके फूलों का दर्द निवारक के लिए भी होने लगा. विक्टोरियन काल में युद्ध के दौरान नर्सें घायल हुए सैनिकों के घावों पर अजवाइन के घोल की पट्टी बांधती थी, ताकि घाव जल्द सूख जाए.

आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में कहा गया है कि अजवाइन हृदय के लिए हितकर है, यह पित्त की उत्पत्ति को रोकती है और वात का शमन करती है.

आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में कहा गया है कि अजवाइन हृदय के लिए हितकर है, यह पित्त की उत्पत्ति को रोकती है और वात का शमन करती है.

भारत में मसाले के तौर पर होता है प्रयोग
भारत में अजवाइन को मसाले और औषधि दोनों के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है. सातवीं-आठवीं ईसा पूर्व लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में कहा गया है कि अजवाइन हृदय के लिए हितकर है, यह पित्त की उत्पत्ति को रोकती है और वात का शमन करती है. इसे रक्तशोधक भी बताया गया है.

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मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन व वैद्यराज दीनानाथ उपाध्याय के अनुसार अजवाइन हर प्रकार के अन्न को पचाने में सक्षम है. पेट में गैस व दर्द में इसका चूर्ण रामबाण है. एक पोटली में अजवाइन बांधकर बार-बार सूंघने से सिरदर्द और जुकाम से आराम मिलता है. गले में दर्द हो तो अजवाइन की पोटली बांधने से राहत महसूस होती है. वैद्यराज के अनुसार अजवाइन का प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए, वरना मुंह में छाले व एसिडिटी की दिक्कत आ सकती है. इसकी तासीर गर्म मानी जाती है, इसलिए गर्मियों में इसका अल्प प्रयोग उचित है.

देश की अन्य भाषाओं में अजवाइन का नाम- बंगाली में जोवन या जोन, गुजराती में यवन, कन्नड़ में ओमा, मलयालम में ओउम, उड़िया में जुआन, तमिल में ओमम, तेलुगु में वामु, मराठी में ओन्वा, इंग्लिश में Ajova seeds या Ajowan.

Tags: Food, Lifestyle

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