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Amir Khusrau Paheli: 'शाम बरन और दाँत अनेक लचकत जैसे नारी...' अमीर ख़ुसरो की पहेलियां बूझो तो जानें

Amir Khusrau Paheli: 'शाम बरन और दाँत अनेक लचकत जैसे नारी...' अमीर ख़ुसरो की पहेलियां बूझो तो जानें

अमीर ख़ुसरो की पहेलियां

अमीर ख़ुसरो की पहेलियां

Amir Khusrau Paheli: ख़ुसरो अपनी 'पहेलियों' के लिए बहुत लोकप्रिय हुए. कहा जाता है कि अमीर ख़ुसरो उन हस्तियों में से रहे हैं जो सदियों बाद कभी जन्म लेती हैं. अमीर ख़ुसरो का मूल नाम अबुल हसन यमीनुद्दीन था.

    Amir Khusrau Paheli, Ghazal: अमीर ख़ुसरो (Amir Khusrau) को किसी परिचय की जरूरत नहीं है. मशहूर सूफ़ी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शागिर्द और संगीतज्ञ, तबला और सितार जैसे साज़ों का अविष्कार करने वाले अमीर ख़ुसरो का मूल नाम अबुल हसन यमीनुद्दीन था. ख़ुसरो अपनी ‘पहेलियों’ के लिए बहुत लोकप्रिय हुए.

    कहा जाता है कि अमीर ख़ुसरो उन हस्तियों में से रहे हैं जो सदियों बाद कभी जन्म लेती हैं. पढ़ें उनकी लिखी पहेलियां और ग़ज़ल (Amir Khusrau Paheli, Ghazal)

    पहली पहेली

    फ़ारसी बोली आई ना
    तुर्की ढूँडी पाई ना
    हिन्दी बोलूँ आरसी आए
    ‘ख़ुसरव’ कहे कोई न बताए

    जवाब- आईना

    दूसरी पहेली

    जल कर बने जल में रहे
    आँखों देखा ख़ुसरव कहे

    जवाब- काजल

    तीसरी पहेली

    बरसा बरस वो देस में आवे
    मुँह से मुँह लगा रस पियावे
    वा ख़ातिर में ख़र्चे दाम
    ऐ सखी साजन ना सखी आम

    जवाब- आम

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    चौथी पहेली

    तेली का तेल
    कुम्हार का हण्डा
    हाथी की सूंड
    नवाब का झंडा

    जवाब- चराग़

    पांचवी पहेली

    इन्दर चिलमन बाहर चिलमन बीच कलेजा धड़के
    अमीर-‘ख़ुसरव’ यूँ कहें वो दो दो अंगुल सरके

    जवाब- क़ैंची

    छठी पहेली

    सब सखियन का पिया पियारा
    सब में है और सब सों नियारा
    वा की आन मुझे ये भा
    जा की है बिन देखी चा

    जवाब- ख़ुदा

    सांतवी पहेली

    जल जल चलता बस्ता गाँव
    बस्ती में ना वा का ठाओं
    ‘ख़ुसरव’ ने दिया वा का नाँव
    बूझो अर्थ नहीं छाडो गाँव
    जवाब- नाव

    आठवीं पहेली

    शाम बरन और दाँत अनेक लचकत जैसे नारी
    दोनों हाथ से ‘ख़ुसरव’ खींचे और यूँ कहे तू आरी

    जवाब- आरी

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    नवीं पहेली

    एक नार तरवर से उतरी मासू जनम न पायो
    बाप का नाँव जो वा से पूछो आधो नाम बतायो
    आधो नाम बतायो ‘ख़ुसरव’ कौन देस की बोली
    वा का नाम जो पूछा मैं ने अपने नाँव नबोली

    जवाब- नीम की निबोली

    दसवीं पहेली 

    बाला था जब सब को भाया
    बड़ा हुआ कुछ काम न आया
    ‘ख़ुसरव’ कह दिया उस का नाँव
    अर्थ करो नहीं छाडो गाँव

    जवाब- दिया

    ग्यारहवीं पहेली

    नर नारी की जोड़ी डीठी
    जब बोले तब लागे मीठी
    इक नहाए इक तापन हारा
    चल ‘ख़ुसरव’ को कूच नक़ारा

    जवाब- नक़्क़ारा

    अमीर ख़ुसरो की ग़ज़ल (Amir Khusrau Paheli)

    ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ
    कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ

    शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह
    सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ

    यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं
    किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ

    चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़ मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर
    न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ

    ब-हक़्क़-ए-आँ मह कि रोज़-ए-महशर ब-दाद मारा फ़रेब ‘ख़ुसरव’
    सपीत मन के दुराय राखूँ जो जाए पाऊँ पिया की खतियाँ(साभार-रेख़्ता)

    Tags: Lifestyle, Literature

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