जब अमृता प्रीतम को पहली नज़्म के लिए पड़ा था ज़ोरदार तमाचा!

Akashdeep Shukla | News18Hindi
Updated: August 31, 2019, 1:42 PM IST
जब अमृता प्रीतम को पहली नज़्म के लिए पड़ा था ज़ोरदार तमाचा!
जब अमृता प्रीतम को पहली नज़्म के लिए पड़ा था ज़ोरदार तमाचा!

अमृता के बारे में उनके जीवन की पोटली खंगालें तो पता चलता है कि उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में काल्पनिक प्रेमी राजन के लिए अपनी सबसे पहली नज़्म लिखी और उस नज़्म को लिख कर वो बेहद ख़ुश थीं.

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अमृता प्रीतम, एक ऐसा नाम जिसके बारे में आज हर वो शख्स जानना चाहत है जिसे मुहब्बत की हवा ने छुआ है. अमृता आज जीवित होतीं तो अपना 100वां जन्मदिन मना रही होतीं और कहीं ना कहीं उनके चाहने वालों के लिए इससे बढ़कर कोई दूजा जश्न नहीं होता. लेकिन ये उनके चाहने वालों की बदकिस्मती है कि वो उनके साथ नहीं हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये ख़ास दिन ख़ास नहीं होगा. मुहब्बत महसूस करने वालों का मानना है कि अमृता कहीं नहीं गयीं. वो यहीं हैं इसी संसार में... बस चेहरे बदल रहे हैं!!


अमृता ने जितना ज्यादा अकेलापन जिया उतना ही उनका नाम कुछ नामों के साथ नज़र में आया. पहले पति के नाम को अपना सरनेम बना चुकीं अमृता प्रीतम, इन्द्रजीत यानी कि इमरोज़ और साहिर लुधियानवी के नाम के साथ इस क़दर जुड़ीं कि अब ये तीन नाम एक ही माने जाते हैं.

अमृता का पहला प्यार-

इन नामों के अलावा अमृता के जीवन में एक और नाम था, जो शायद उनका सबसे पहला प्यार रहा. और ये नाम था राजन... ऐसा कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि कल्पनाओं के गीत लिखने वाली अमृता बचपन से ही प्रेम की राह पर उसकी तलाश में निकल चुकीं थीं. उनकी कल्पनाओं में उनका एक प्रेमी था जिसे वो बेहिसाब मुहब्बत करती थीं. अमृता ने अपनी पहली नज़्म भी उसी के नाम लिखी.

अमृता की पहली नज़्म-

अमृता के बारे में उनके जीवन की पोटली खंगालें तो पता चलता है कि उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में काल्पनिक प्रेमी राजन के लिए अपनी सबसे पहली नज़्म लिखी और उस नज़्म को लिख कर वो बेहद ख़ुश थीं. अमृता ने जिस पन्ने पर राजन के नाम नज़्म लिखी उस पन्ने को फाड़कर स्कूल जाते वक़्त अपनी जेब में रख ली ताकि वो उसे स्कूल में अपनी सहेलियों को सुनाएंगी.
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अमृता, घर से स्कूल की तरफ निकल पड़ीं. वहीं रास्ते में उनके उनके पिता जी मिले. पिताजी को देखकर अमृता ने पैसे मांग लिए. जैसा मुझे लगता है दुनिया का हर बच्चा करता होगा. प्यारी सी अमृता की मांग पर पिताजी ने कुछ पैसे अपनी जेब से निकाले और अमृता को दिए, लेकिन ये पैसे उन्होंने खुद अमृता की जेब में डाले, अब जब पिताजी ने जेब में पैसे डाले तो उनको वो पर्ची मिली जिसमें एक नज़्म थी और लिखा था - 'राजन के प्यार के नशे में डूबी हुई अमृता की पहली नज़्म'

अमृता को पहली नज़्म के लिए पड़ा था ज़ोरदार तमाचा-

पिताजी ने जैसे ही उसे पढ़ा, अमृता के गाल पर एक जोर का तमाचा रख दिया और वो कागज जिसपर अमृता ने अपनी पहली नज़्म लिखी थी, फाड़ दिया. अमृता को उस रोज़ बहुत दुख हुआ. ऐसे में मुझे लगता है कि अमृता की ज़िंदगी में मुहब्बत के पन्ने पर लिखी नज्मों को किस्मत ने मुकम्मल ना होने दिया. अमृता प्यार में प्यार की तलाश में हमेशा तन्हा ही रहीं.

अब इसे दुखद कहें या दिलचस्प, लेकिन इश्क के बारे में ऐसा भी देखा जाता है कि ये अक्सर मंजिल पर पहुंचते-पहुंचते लड़खड़ा जाता है. शायद ऐसी ही किसी मोहब्बत के लिए साहिर ने लिखा होगा...

'वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन
उसे इक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा'

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First published: August 31, 2019, 1:27 PM IST
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