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गुस्सा और ज्यादा शारीरिक मेहनत बन सकता है स्ट्रोक की वजह: स्टडी

गुस्सा और ज्यादा शारीरिक मेहनत बन सकता है स्ट्रोक की वजह: स्टडी

कठिन शारीरिक श्रम करने  वालों में स्ट्रोक का खतरा 60 फीसद अधिक होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

कठिन शारीरिक श्रम करने वालों में स्ट्रोक का खतरा 60 फीसद अधिक होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Anger & Physical Exertion Triggers of Stroke : एक नई स्टडी में साइंटिस्टों ने पाया है गुस्सा (Anger) और भारी शारीरिक परिश्रम ( Heavy Physical Exertion) भी स्ट्रोक की बड़ी वजह हो सकते हैं. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड (National University of Ireland) की साझेदारी में हुई एक स्टडी में साइंटिस्टों ने पाया कि कई लोगों को स्ट्रोक या पक्षाघात (stroke or paralysis) से करीब घंटे भर पहले काफी गुस्सा आ रहा था या वे अवसाद (Depression) में चले गए थे. इस स्टडी के नतीजों को यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित किया गया है.

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    Anger & Physical Exertion Triggers of Stroke: आजकल के लाइफस्टाइल में स्ट्रोक (Stroke)या पक्षाघात (paralysis) यानी लकवा मारना पूरी दुनिया में मौत या विकलांगता (disability) का बड़ी वजह बनता रहा है. आमतौर पर इसकी वजह हार्ट या ब्रेन से जुड़े डिसऑडर, या कई तरह के नशे की लत मानी जाती रही है. लेकिन अब एक नई स्टडी में साइंटिस्टों ने पाया है गुस्सा (Anger) और भारी शारीरिक परिश्रम ( Heavy Physical Exertion) भी स्ट्रोक की बड़ी वजह हो सकते हैं. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड (National University of Ireland) की साझेदारी में हुई एक स्टडी में साइंटिस्टों ने पाया कि कई लोगों को स्ट्रोक या पक्षाघात (stroke or paralysis) से करीब घंटे भर पहले काफी गुस्सा आ रहा था या वे अवसाद (Depression) में चले गए थे. इस स्टडी के नतीजों को यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित किया गया है. आपको बता दें कि ब्रेन अटैक (Brain Attack) यानी स्ट्रोक (Stroke) एक ऐसी इमरजेंसी सिचुएशन है जिसमें ब्रेन में ब्लड सप्लाई बाधित हो जाती है. या फिर दिमाग के अंदर कोई रक्त नलिका यानी ब्लड वेसल (blood vessel) फट जाती है. इन दोनों ही सिचुएशन में ब्रेन तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है.

    इसका नतीजा यह होता है कि ब्रेन की एक्टिविटी संचालित नहीं हो पाती हैं. ब्रेन की किसी नस के डैमेज होने से पीड़ित व्यक्ति को उस अंग विशेष का पक्षाघात (Paralysis) यानी लकवा भी मार सकता है. जैसे ब्रेन में अगर पैर को संचालित करने वाली नस डैमेज हो जाती है, तो पैर लकवाग्रस्त हो सकते हैं. इसी तरह हाथ भी लकवाग्रस्त हो सकता है.

    स्टडी में 32 देश रहे शामिल
    नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड (National University of Ireland) के नेतृत्व में हुई इस स्टडी पाया गया कि 20 में से एक स्ट्रोक पीड़ित भारी शारीरिक श्रम करता रहा था. ग्लोबल इंटरस्ट्रोक स्टडी (Global Interstroke Study) का हिस्सा रहे इस शोध में गंभीर स्ट्रोक के 13,462 मामलों का विश्लेषण किया गया. स्टडी में आयरलैंड समेत 32 देश शामिल रहे.

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    क्या कहते हैं जानकार
    एनयूआइ गालवे (NUI Galway) में क्लीनिकल एपिडेमियोलाजी (Clinical Epidemiology) के प्रोफेसर और इस स्टडी को लीड करने वाले एंड्रयू स्मिथ (Andrew Smyth) कहते हैं, ‘स्ट्रोक की रोकथाम (prevention) डाक्टरों की प्राथमिकता है. एडवांस्ड टेक्नीक्स के बावजूद स्ट्रोक के खतरे का अनुमान लगाना मुश्किल होता है. हमने अपनी स्टडी में यह पता करने का प्रयास किया कि किन वजहों से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.’

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    भावनात्मक परेशानी भी एक वजह
    एंड्रयू स्मिथ (Andrew Smyth)आगे कहते हैं, ‘रिसर्चर्स ने पाया कि भावनात्मक परेशानी (emotional distress) के कारण स्ट्रोक का खतरा 30 फीसद बढ़ जाता है. उन्हें स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है, जिन्हें अवसाद (Depression) की कभी कोई समस्या नहीं रही. ये भी पाया गया कि कठिन शारीरिक श्रम करने ( Heavy Physical Exertion) वालों में स्ट्रोक का खतरा 60 फीसद अधिक होता है. हालांकि, जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) सामान्य होता है, उनमें स्ट्रोक का खतरा कम होता है.’

    Tags: Health, Health tips, Lifestyle, Mental health

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