कहीं आप पर्यावरण को नष्‍ट तो नहीं कर रहे! जानिए, क्‍या कहते हैं कानून

कहीं आप पर्यावरण को नष्‍ट तो नहीं कर रहे! जानिए, क्‍या कहते हैं कानून
राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर उभरी समस्याओं के मद्देनजर पर्यावरण की सुरक्षा और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई कानून बनाए गए हैं.

खतरनाक अपशिष्ट का मतलब किसी भी कचरे से है, जो उसके किसी भी भौतिक, रासायनिक, प्रतिक्रियाशील, विषाक्त, ज्वलनशील, विस्फोटक या संक्षारक विशेषताओं के कारण होता है, खतरे का कारण बनता है या जिससे स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए खतरा पैदा होने की संभावना होती है.

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राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर उभरी समस्याओं के मद्देनजर पर्यावरण की सुरक्षा और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियत बनाए गए हैं. बढ़ते औद्योगीकरण की वजह से हो रहे पेड़ों के कटान, पानी के प्रदूषित होने जैसी समस्याएं और इनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ये अधिनियम अमल में आए, ताकि लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हों और पर्यावरण की क्षति को रोका जा सके. पर्यावरण से संबंधित कानूनों को विस्तार से समझने के लिए न्यूज18 ने मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अमित साहनी से बात की.

पर्यावरण संबंधी कानून

1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 : राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम, 2010 द्वारा भारत में एक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की स्थापना भी की गई है. 18 अक्टूबर, 2010 को इस अधिनियम के तहत पर्यावरण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के साथ ही व्यक्तियों, संपत्ति के नुकसान के लिए सहायता और क्षतिपूर्ति देने या इससे जुड़े मामलों सहित पर्यावरण संरक्षण और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना की गई. यह एक विशिष्ट निकाय है, यह प्राधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया द्वारा बाध्य नहीं होगा, बल्कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाएगा.



2. वायु निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1981 : बढ़ते औद्योगीकरण के कारण पर्यावरण में निरंतर हो रहे वायु प्रदूषण और इसकी रोकथाम के लिए यह अधिनियम बनाया गया. इस अधिनयम के पारित होने के पीछे जून, 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टाकहोम (स्वीडन) में मानव पर्यावरण सम्मेलन की भूमिका रही है. इसकी प्रस्तावना में कहा गया है कि इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु समुचित कदम उठाना है. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में वायु की गुणवत्ता और वायु प्रदूषण का नियंत्रण सम्मिलित है.



3. जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1974 : इसके उद्देश्य है, जल प्रदूषण का निवारण करना, जल प्रदूषण को नियंत्रित करना, जल की स्वास्थ्य प्रदता बनाए रखना, जल को उसकी पहली जैसी अवस्था में लाना, जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण बोर्ड की स्थापना, जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण बोर्ड की शक्तियां और इनके कार्यो का उल्लेख.

4. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 : 1986 के इस पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य मानव पर्यावरण में सुधार और संरक्षण करना है. इस सिद्धांत की सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह घटित होने वाले खतरों को और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों को रोंकने का कार्य करता है.

पर्यावरण से संबंधित कानूनों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अमित साहनी ने विस्तार से समझाया.
पर्यावरण से संबंधित कानूनों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अमित साहनी ने विस्तार से समझाया.


5. खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन नियम : खतरनाक अपशिष्ट का मतलब किसी भी कचरे से है, जो उसके किसी भी भौतिक, रासायनिक, प्रतिक्रियाशील, विषाक्त, ज्वलनशील, विस्फोटक या संक्षारक विशेषताओं के कारण होता है, खतरे का कारण बनता है या जिससे स्वास्थ्य या पर्यावरण के लिए खतरा पैदा होने की संभावना होती है.

6. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 : यह अधिनियम देश के वन्य जीवन की प्रभावी रूप से रक्षा करने और वन्यजीवों में अवैध शिकार, तस्करी और अवैध व्यापार को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था. अधिनियम को जनवरी, 2003 में संशोधित किया गया और सजा और अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दंड को अधिक कठोर बना दिया गया. इसका उद्देश्य सूचीबद्ध लुप्तप्राय वनस्पतियों और जीवों और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करना है.

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First published: June 5, 2020, 2:28 PM IST
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