हड्डी से जुड़े रोगों से हैं परेशान? 3डी तकनीक है इसका रामबाण इलाज

हड्डी से जुड़े रोगों से हैं परेशान? 3डी तकनीक है इसका रामबाण इलाज
3डी प्रिंटर (3d Printer) में रोगी के चोटिल हिस्से का कम्प्यूटर (Computer) पर त्रिआयामी (3डी) चित्र बनाया जाता है. जो चित्र के जैसा ही एक प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) तैयार कर देता है.

3डी प्रिंटर (3d Printer) में रोगी के चोटिल हिस्से का कम्प्यूटर (Computer) पर त्रिआयामी (3डी) चित्र बनाया जाता है. जो चित्र के जैसा ही एक प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) तैयार कर देता है.

  • Last Updated: August 7, 2020, 6:28 AM IST
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चोट लगने पर जोड़ों का घाव तो थोड़े दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन जोड़ों की हड्डी टूटने और फैक्चर को ठीक होने में बहुत सारा समय लगता है. कई बार तो जोड़ों के हिस्से ठीक भी नहीं होते. myUpchar के अनुसार ऐसे में उस हिस्से में मूवमेंट (हिलाने-डुलाने) में भी अधिक परेशानी होती है. आजकल ऐसी कई तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे ऐसी गंभीर शारीरिक समस्याओं का उपचार संभव है. इसी प्रकार जोड़ों के दर्द को ठीक करने की एक ऐसी ही नई टेक्नोलॉजी है, जिसे थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक कहते हैं. आइए इस तकनीक के बारे में जानते हैं...

क्या है 3 डी प्रिंटिंग तकनीक
थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक कई लोगों के लिए वरदान है. इसमें रोगी के उस चोटिल हिस्से का कम्प्यूटर पर त्रिआयामी (3डी) चित्र बनाया जाता है. इसके लिए एक 3डी प्रिंटर होता है, जो इस चित्र के जैसा ही एक प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) तैयार कर देता है. इस कृत्रिम अंग का उपयोग करके जोड़ों को पहले जैसी अवस्था में लाया जा सकता है. 3डी प्रिंटर तकनीक द्वारा कुछ ही घंटों में बिल्कुल उसी तरह का कृत्रिम अंग तैयार किया जा सकता है. इससे सर्जरी में भी समय कम लगता है. गंभीर शारीरिक समस्याओं के निराकरण के लिए यह तकनीक वरदान है.

प्रोस्थेटिक इस तरह होता है तैयार
प्रोस्थेटिक को तैयार करने के लिए एक्सरे, एमआरआई और सीटी स्कैन की मदद ली जाती है और इनसे एक 3डी इमेज तैयार की जाती है. थ्रीडी प्रिंटर इस थ्रीडी इमेज को मूर्त रूप से तैयार करता है. इसमें कोई गलती की गुंजाइश नहीं होती है. यह मरीज की शारीरिक जरूरत के हिसाब से उपयोग में आने वाले अंग की 3-डी पिक्चर तैयार कर देता है.



गलती की आशंका न के बराबर
इस तकनीक से पहले डॉक्टर को कृत्रिम अंगों को रोगी की आवश्यकता के अनुसार बनाने में काफी मेहनत लगती थी. इसके लिए प्रोस्थेटिक को शरीर के जरूरत के अनुसार काटना छिलना होता था. उसके बाद मरीज को लगाया जाता था. फिर भी इस बात की पूरी गारंटी नहीं रहती थी तो वह सही तरह से कार्य करेगा. वहीं 3डी प्रिंटर तकनीक से यह काम आसान हो गया है.

लागत भी ज्यादा नहीं
3डी प्रिंटर द्वारा तैयार प्रोस्थेटिक में काफी कम लागत लगती है, क्योंकि इसमें कम साधनों की जरूरत होती है. इस नवीन तकनीक में काटने छिलने की भी जरूरत बिल्कुल नहीं होती है और ना ही इसे बनाने में ज्यादा समय लगता है. इस कारण कृत्रिम शारीरिक अंगों को बनाने में ज्यादा लागत भी नहीं आती है.

अधिक उत्पादन है संभव
चूंकि 3डी तकनीक में शारीरिक अंगों को तैयार करने में काफी कम समय लगता है और मेहनत भी कम लगती है इसलिए इसका अधिक मात्रा में उत्पादन किया जा सकता है. जटिल से जटिल जोड़ों के विकारों के लिए सटीक कृत्रिम अंग बनाए जा सकते हैं. ऑपरेशन के बाद ये कृत्रिम अंग ज्यादा समय तक सेवा देते हैं और मरीज को तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता है. जोड़ों के दर्द से पीड़ित व्यक्ति एक सामान्य जिंदगी जी सकता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, 4डी स्कैन क्या है, क्यों की जाती है और इसके परिणाम पढ़ें।

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