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क्‍या आप हैं अपनी बेटी की दोस्‍त? ऐसे निभाएं दोस्‍ती का ये अनूठा रिश्‍ता

क्‍या आप हैं अपनी बेटी की दोस्‍त? ऐसे निभाएं दोस्‍ती का ये अनूठा रिश्‍ता


दोस्‍त की तरह रहें जिंदगी के सफर में साथ. Image Credit/Pexels

दोस्‍त की तरह रहें जिंदगी के सफर में साथ. Image Credit/Pexels

कोशिश करनी चाहिए कि एक मां के तौर पर आपका अनुभव (Experience) आपकी बेटी के लिए फायदेमंद साबित हो. इसलिए एक मां होने के साथ ही यह ज्‍यादा अहम है कि अपनी बड़ी होती बेटी की दोस्‍त (Friend) बन कर उसकी बातों को समझा जाए.

    बच्‍चों की परवरिश में खासकर मां (Mother) की भूमिका अहम होती है. बात जब बेटियों (Daughters) की हो तो मां होने के नाते इस बात का ज्‍यादा ख्‍याल रखना पड़ता है. बढ़ती उम्र के साथ बेटियों की कई समस्‍याएं होती हैं, जो वह कई बार संकोचवश मां से भी शेयर नहीं करतीं. ऐसे में और जरूरी हो जाता है कि उनकी बात को समझा जाए और उन्‍हें बेहतर तरीके से समझाया जा सके. कोशिश करनी चाहिए कि एक मां के तौर पर आपका अनुभव (Experience) आपकी बेटी के लिए फायदेमंद साबित हो. इसलिए एक मां होने के साथ ही यह ज्‍यादा अहम है कि अपनी बड़ी होती बेटी की दोस्‍त (Friend) बन कर उसकी बातों को समझें, ताकि वह हर बात आपसे शेयर कर सके और जिंदगी (Life) के किसी भी मोड़ पर खुद को अकेला न महसूस करे.

    अहम मुद्दों पर करें बात: जब बेटी बड़ी होने लगे तो यह बहुत जरूरी है कि मां अपनी बेटी की दोस्‍त बन कर उसे हर माह होने वाले पीरियड्स के बारे में बताएं. इसकी जानकारी अगर बेटी को पहले से होगी तो वह ज्‍यादा सावधान रहेंगी और पीरियड्स का समय आने पर वह इसको लेकर अंजान नहीं होंगी. साथ ही इससे जुड़ी कोई समस्‍या होगी तो अपनी मां से बिना संकोच के शेयर कर पाएंगी.

    उनमें जगाएं आत्‍मविश्‍वास: जीवन में अक्‍सर ऐसा समय भी आता है जब उम्‍मीद के बावजूद परिणाम अच्‍छा नहीं आता. कई बार वे परीक्षा में अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं. ऐसे में बेटियां खुद को दोषी समझ कर टूट न जाएं, इसलिए जरूरी है कि उनमें आत्‍मविश्‍वास जगाया जाए. एक दोस्‍त बन कर उनकी समस्‍या को साझा किया जाए. उन्‍हें मेहनत करने और आगे बढ़ने की सीख दी जाए. ताकि जब कभी जीवन में उन्‍हें निराशा हो तो वह मजबूती के साथ उसका सामना करने की आदी हों.

    सही का करें चुनाव: अक्‍सर टीनएजर उम्र में किसी के प्रति आकर्षण हो जाना आम बात है. इस उम्र में लड़कों-लड़कियों दोनों से दोस्‍ती भी होती है. ऐसे में बेटियों में यह समझ विकसित करनी चाहिए कि वे सही व्‍यक्ति का चुनाव अपने दोस्‍त के तौर पर करें.

    ये भी पढ़ें - रिश्‍तों की लंबी उम्र के लिए मजबूत करें फैमिली बॉन्डिंग

    दोस्‍त बन कर चलें साथ: शिक्षा से करियर तक बेटी के जीवन में मां की भूमिका बहुत खास होती है. बेटी जीवन में बुलंदियों को छू ले और अहम मुकाम हासिल करे यह हर मां की इच्‍छा होती है. इसलिए बेटियों की मार्गदर्शक बन कर और एक दोस्‍त की तरह उनके इस सफर में उनके साथ रहें.

    Tags: Daughter, Lifestyle, Mother, Relationship

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