न भूल प्यारे कि हिन्दोस्तान तेरा है, पढ़ें हास्य कवि अशोक चक्रधर की कविताएं

अशोक चक्रधर की कविताएं
अशोक चक्रधर की कविताएं

अशोक चक्रधर की कविताएं (Ashok Chakradhar Poems): तू गर दरिन्दा है तो ये मसान तेरा है, अगर परिन्दा है तो आसमान तेरा है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 9:16 AM IST
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अशोक चक्रधर की कविताएं (Ashok Chakradhar Poems): अशोक चक्रधर जानेमाने हास्य कवि हैं. अशोक चक्रधर की कविताओं में हास्य के साथ तगड़ा व्यंग भी होता है. अशोक चक्रधर की कुछ प्रमुख कृतियां हैं- चुटपुटकुले, बोल-गप्पे, ए जी सुनिये, इसलिये बौड़म जी इसलिये. उन्हें पद्म श्री अवार्ड से भी नवाज़ा जा चुका है. आज हम कविताकोश के साभार से आपके लिए लेकर आए हैं हास्य कवि अशोक चक्रधर की कविताएं...

1. डॉक्टर बोला-
दूसरों की तरह
क्यों नहीं जीते हो,
इतनी क्यों पीते हो?



वे बोले-
मैं तो दूसरों से भी
अच्छी तरह जीता हूँ,
सिर्फ़ एक पैग पीता हूँ.
एक पैग लेते ही
मैं नया आदमी
हो जाता हूँ,
फिर बाकी सारी बोतल
उस नए आदमी को ही
पिलाता हूँ.

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2. तू गर दरिन्दा है तो ये मसान तेरा है,
अगर परिन्दा है तो आसमान तेरा है.

तबाहियां तो किसी और की तलाश में थीं
कहां पता था उन्हें ये मकान तेरा है.

छलकने मत दे अभी अपने सब्र का प्याला,
ये सब्र ही तो असल इम्तेहान तेरा है.

भुला दे अब तो भुला दे कि भूल किसकी थी
न भूल प्यारे कि हिन्दोस्तान तेरा है.

न बोलना है तो मत बोल ये तेरी मरज़ी
है, चुप्पियों में मुकम्मिल बयान तेरा है.

तू अपने देश के दर्पण में ख़ुद को देख ज़रा
सरापा जिस्म ही देदीप्यमान तेरा है.

हर एक चीज़ यहां की, तेरी है, तेरी है,
तेरी है क्योंकि सभी पर निशान तेरा है.

हो चाहे कोई भी तू, हो खड़ा सलीक़े से
ये फ़िल्मी गीत नहीं, राष्ट्रगान तेरा है.



3. एक बार
बरखुरदार!
एक रुपए के सिक्के,
और पाँच पैसे के सिक्के में,
लड़ाई हो गई,
पर्स के अंदर
हाथापाई हो गई.
जब पाँच का सिक्का
दनदना गया
तो रुपया झनझना गया
पिद्दी न पिद्दी की दुम
अपने आपको
क्या समझते हो तुम!
मुझसे लड़ते हो,
औक़ात देखी है
जो अकड़ते हो!

इतना कहकर मार दिया धक्का,
सुबकते हुए बोला
पाँच का सिक्का-
हमें छोटा समझकर
दबाते हैं,
कुछ भी कह लें
दान-पुन्न के काम तो
हम ही आते हैं.

4. एक घुटे हुए नेता ने
छंटे हुए शब्दों में
भावुक तकरीर दी,
भीड़ भावनाओं से चीर दी.
फिर मानव कल्याण के लिए
दिल खोल दान के लिए
अपनी टोपी घुमवाई,
पर अफ़सोस
कि खाली लौट आई.

टोपी को देखकर
नेता जी बोले-अपमान जो होना है सो हो ले.
पर धन्यवाद,
आपकी इस प्रतिक्रिया से
प्रसन्नता छा गई,
कम से कम
टोपी तो वापस आ गई.
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