अगस्त क्रांति दिवस: 'भारत छोड़ो आंदोलन' के पांच साल बाद अंग्रेजों ने छोड़ा था भारत

'भारत छोड़ो आंदोलन' मुम्बई के जिस पार्क से शुरू हुआ उसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:42 AM IST
अगस्त क्रांति दिवस: 'भारत छोड़ो आंदोलन' के पांच साल बाद अंग्रेजों ने छोड़ा था भारत
भारत छोड़ो आंदोलन मुम्बई के जिस पार्क से शुरू हुआ उसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है
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Updated: August 9, 2019, 11:42 AM IST
9 अगस्त, 1942 जब महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' का नारा दिया और ठीक पांच साल बाद 15 अगस्त को देश ने आजादी को गले लगाया. इस दिन को 'अगस्त क्रांति दिवस' के रूप में याद किया जाता है. 200 सालों की गुलामी के खिलाफ ये पांच साल का संघर्ष था, जिसने देश को आजादी जैसा बहुमूल्य तोहफा दिया था.

ब्रिटिश सरकार की गुलामी के खिलाफ शुरू हुई 1857 की क्रांति के बाद यह दूसरा मौका था जब इतने व्यापक स्तर पर विद्रोह होना शुरू हुआ था. देश के भीतर जहां आजादी के लिए खींच तान चल रही थी, वहीं विश्वस्तर पर दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था.

अगस्त क्रांति मैदान जहां से शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन

'भारत छोड़ो आंदोलन' मुम्बई के जिस पार्क से शुरू हुआ उसे अब अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेज़ों को देश से भगाने के लिए 4 जुलाई, सन् 1942 को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि यदि अंग्रेज़ भारत नहीं छोड़ते हैं तो उनके ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा.

हालांकि आंदोलन के लिए कांग्रेस को सभी दलों का समर्थन हासिल नहीं हुआ. मुस्लिम लीग, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और हिन्दू महासभा ने इस आंदोलन का विरोध किया. 8 अगस्त,1942 ई. को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के बम्बई सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया गया.

प्रस्ताव पारित होते ही कांग्रेस के आमूमन सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया.जेल में रहने के दौरान भी यह आंदोलन जारी रहा, लेकिन दिन प्रतिदिन गांधी जी की तबीयत बिगड़ने लगी. 1944 में गांधी जी के स्वास्थ्य में अत्यधिक गिरावट देखने के बाद अंग्रेजों ने उन्हें रिहा कर दिया. इधर भारत छोड़ो आंदोलन का असर गहराता जा रहा था. अंग्रेजों को लगने लगा कि अब उनका सूरज अस्त होने वाला है. अगस्त क्रांति ने दुनिया को दिखाया कि आज़ादी मनुष्य का मूल अधिकार है और 15 अगस्त, 1947 को भारत अपना यह मूल अधिकार हासिल करने में कामयाब हो गया.

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First published: August 9, 2019, 11:42 AM IST
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