बच्चे की पिटाई करने से उसके मानसिक स्वास्थ्य पर हो सकता है नकारात्मक असर

बच्चे की अक्सर पिटाई उनको विद्रोही बनाती है-Image credit /pexels-august-de-richelieu

बच्चे की अक्सर पिटाई उनको विद्रोही बनाती है-Image credit /pexels-august-de-richelieu

बच्चे की गलती और शैतानी के चलते (Due to child fault) गुस्सा आने पर कुछ पैरेंट्स उन पर अक्सर हाथ उठा देते हैं. कई बार इस पिटाई का बच्चों के मानसिक स्वास्थ पर गहरा और नकारात्मक असर (Negative impact of beating) होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2021, 8:55 AM IST
  • Share this:
बच्चों की शैतानी और गलत हरकतों के चलते (Due to wrong antics) गुस्सा आने पर कई पैरेंट्स उनको समझाने की बजाय उनकी पिटाई करने लगते हैं. उनको लगता है कि बच्चों को सुधारने के लिए ये बेहतर विकल्प ( Better options to improve) है. लेकिन कई बार इस पिटाई का बच्चों के मानसिक स्वास्थ पर गहरा और नकारात्मक असर (Negative impact of beating) होता है जो बिल्कुल सही नहीं है. आइये जानते हैं कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ पर ये किस तरह से असर डालते हैं.

डर ख़त्म हो जाता है

बच्चों की पिटाई अगर अक्सर की जाये तो उनके अंदर से पिटाई का डर निकल जाता है. अगली बार बच्चा फिर वही गलती ये सोच कर दोहराता है कि ज्यादा से ज्यादा पिटाई तो होगी. इस तरह उसकी गलती दोहराने की रफ़्तार बढ़ती जाती है और वो सुधरने की बजाय बिगड़ने लगता है.

ये भी पढ़ें: बच्चों के कमरे में कभी न रखें ये चीजें, हो सकती हैं खतरनाक
 पेरेंट्स से दूर होने लगते हैं


किसी भी वजह से बच्चे की पिटाई अगर एक-दो बार की जाये तो अलग बात है लेकिन अगर ये अक्सर ही होने लगे तो बच्चे ये सोचने लगते हैं कि उसके पेरेंट्स उससे प्यार नहीं करते और उनको मेरी ज़रूरत नहीं है. इस तरह से वो पेरेंट्स से भावनात्मक तौर पर दूर होने लगते हैं.

विद्रोही बनने लगते हैं



बच्चों की पिटाई अगर अक्सर होने लगे तो उनके अंदर विद्रोह की भावना बनने लगती है. वो अपनी गलती को सही करने की बजाय उस गलती को दोहराता रहता है. वो अपने पेरेंट्स की कही बात नहीं सुनते हैं और विद्रोही हो जाते हैं.

गुस्से की भावना जन्म लेती है

अक्सर ही मार-पिटाई सहते हुए बच्चों के अंदर गुस्से की भावना जन्म लेने लगती है. कई बार कुछ बच्चे पेरेंट्स को जवाब देकर या किसी और तरह की प्रतिक्रिया देकर गुस्सा शांत कर लेते हैं लेकिन कई बच्चे इस गुस्से को अपने अंदर रख लेते हैं जिसको वो किसी और इंसान पर निकालते है. ये स्थिति किसी के लिए भी सही नहीं होती.

ये भी पढ़ें: बच्चों के लिए खिलौने खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

आत्मविश्वास में आती है कमी


बच्चों की अक्सर पिटाई से उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होती जाती है. उनको लगने लगता है मैं किसी भी काम के लायक नहीं हूं. न ही कोई काम सही से कर सकता हूं. ये भावना उनके अंदर जब पैदा होती है तो इसका नकारात्मक असर उनके भविष्य पर भी पड़ता है.

डिप्रेशन का हो जाते हैं शिकार

जो बच्चे अधिकतर हिंसा का शिकार होते हैं या जिनको शारीरिक दंड ज्यादा दिया जाता है उनके दिमाग पर इसका खासा असर पड़ता है और उनमें डिसीजन लेने और सिचुएशन को हेंडल करने की शक्ति ख़त्म होने लगती है. साथ ही वो डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज