पाइल्स, डायबिटीज, त्वचा से जुड़ी कई बीमारियों का रामबाण इलाज है बरमूडा घास

पाइल्स, डायबिटीज, त्वचा से जुड़ी कई बीमारियों का रामबाण इलाज है बरमूडा घास
बरमूडा घास (Bermuda Grass) कई बीमारियों का रामबाण इजाज है. पाइल्स, त्वचा रोग (skin disease), आंखों से संबंधित समस्याएं, गर्भाशय, कुष्ठ रोग (leprosy), रक्तस्राव और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं में बरमूडा घास बहुत ही लाभदायक है.

बरमूडा घास (Bermuda Grass) कई बीमारियों का रामबाण इजाज है. पाइल्स, त्वचा रोग (skin disease), आंखों से संबंधित समस्याएं, गर्भाशय, कुष्ठ रोग (leprosy), रक्तस्राव और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं में बरमूडा घास बहुत ही लाभदायक है.

  • Last Updated: July 28, 2020, 1:58 PM IST
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किसी घास की उयोगिता के बारे में अगर आपसे बात की जाए तो आप उसकी कितनी ज्यादा उपयोगिता के बारे में बता सकतै हैं. दो- चार बातें बस, लेकिन बरमूडा घास एक ऐसी घास हैं जो कई बीमारियों का रामबाण इजाज है. पाइल्स, त्वचा रोग, आंखों से संबंधित समस्याएं, गर्भाशय, कुष्ठ रोग, रक्तस्राव और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं में बरमूडा घास बहुत ही लाभदायक है.बरमूडा घास को दूर्वा घास या दूब भी कहा जाता है, जो भारत जैसे देश में एक पवित्र पौधा माना जाता है. इसको भगवान गणेश की पूजा में चढ़ाया जाता है. लेकिन इसका इस्तेमाल कई बीमारियों से बचने के लिए किया जाता है. हजारों वर्षों से बरमूडा घास से मिलने वाले औषधि और नैदानिक गुणों का उपयोग आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा में किया गया है.

myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधित गुणों के कारण इस घास ने काफी लोकप्रियता हासिल की है. दुर्वा घास कैल्शियम, फास्फोरस, फाइबर, पौटेशियम और प्रोटीन से भरपूर है. यह कई बीमारियों में राहत देने वाला है. आइए आपको बताते हैं कि किन बीमारियों में इसका उपयोग होता है.

पाइल्स : गाय का घी लें और इसे घास के अर्क के साथ मिलाएं और राहत पाने के लिए प्रभावित हिस्से पर लगाएं. इसके अलावा महिलाओं के लिए यह घास दही के साथ लेने से अच्छे परिणाम होते हैं.



दस्त : ताजा दूर्वा घास का अर्क पीने से दस्त को नियंत्रित करने में आसानी होती है.
त्वचा की बीमारियां : खुजली, कुष्ठ रोग, स्किन रेशेस और एक्जिमा जैसे त्वचा विकारों से राहत के लिए हल्दी पाउडर के साथ इस घास का पेस्ट मिलाएं और प्रभावित जगह पर लगाएं.

सिरदर्द : बराबर मात्रा में घास और चूना लें और पानी के साथ इसका पेस्ट बनाएं. माथे पर पेस्ट लगाएं और तुरंत राहत मिलेगी.

पाचन : पाचन में सुधार और कब्ज का इलाज करने के अलावा यह घास पेट की बीमारियों का खतरा कम करती है. इसे नैचुरल डिटोक्सिफायर भी कह सकते हैं जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ नष्ट हो जाते हैं.

पेशाब से जुड़ी समस्या : इस घास की जड़ों की चाय बनाएं और घूंट-घूंट में 30 मिलीलीटर पीएं.

नेत्र रोग : दूर्वा का पेस्ट बनाकर पलकों पर लगाएं। यह आंखों से निकलने वाली गंदगी को रोकने में बहुत उपयोगी होगा.

मुंह से संबंधित घाव : मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करती है. इसमें एंटी अल्सर गुण हैं. यह घास न केवल मसूड़ों के रक्तस्त्राव के उपचार में मदद करती है बल्कि सांसों की बदबू का भी मुकाबला करती है.

नाक से संबंधित समस्याएं : अनार के फूलों का अर्क लें और इसे दुर्वा घास के अर्क के साथ मिलाएं. नथुने में एक से दो बूंद डालें तुरंत खून बहना रोकने के लिए नथुने में दुर्वा रस की एक से दो बूंदें डालें.

इम्यून सिस्टम : दूर्वा घास में प्रोटीन का अंश होता है जो कि इम्यूनोमॉड्यूलेटरी एक्टिविटी के लिए पहचानी जाती है. इससे इम्यून सिस्टम को सुधारने में मदद मिलती है. इसके एंटीवायरल और एंटी माइक्रोबियल गुण इम्यून के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करते हैं.

तनाव से राहत : दूब घास पर चलने से तनाव कम होता है. साथ ही तनाव से छुटकारा पाने के लिए पैरों के तलवे पर इस घास का पेस्ट भी लगाया जाता है.

घावों के लिए : बरमूडा घास और लहसुन का पेस्ट बनाकर घाव पर बांधने से राहत मिलती है.

डायबिटीज के लिए : कई शोधों में साबित हुआ है कि इस घास के अर्क से डायबिटीज के मरीजों पर हाइपोग्लाइसीमिक इफेक्ट पड़ता है जो ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मददगार होता है. दूर्वा के रस के साथ नीम के पत्तों का रस ब्लड ग्लूकोज के स्तर को सामान्य करता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, दूब घास के अन्य फायदों के बारे में पढ़ें।

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