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Friendship Shayari: 'दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला', फ्रेंडशिप डे पर पढ़ें ये दिलकश कलाम...

दोस्‍ती शायरी: 'दोस्तों को आज़माते जाइए...' Image/shutterstock

दोस्‍ती शायरी: 'दोस्तों को आज़माते जाइए...' Image/shutterstock

Best Shayari On Friendship: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में ज़िंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या दोस्‍ती का. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है...

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    Best Shayari On Friendship: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों की दुनिया है. इसमें हर जज्‍़बात (Emotion) को क़लमबंद किया गया है. शायरी में जहां मुहब्‍बत, दर्द से लबरेज़ जज्‍़बातों को जगह मिली है, वहीं इसमें इंसानी ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी ख़ूबसूरती के साथ जगह दी गई है. एक तरह से कहें तो शायरी (Shayari) दिल से निकली आह है, चाह है और सदा है, जिसे हर शायर ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है. इसमें अगर महबूब की ख़ूबसूरती का जिक्र है, तो दोस्‍ती जैसे रिश्‍ते को भी बेहतरीन अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है. आज शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए. आज की इस कड़ी में पेश है ‘दोस्‍ती’ पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग…

    तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़’
    दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
    अहमद फ़राज़

    कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
    सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया
    साहिर लुधियानवी

    ये भी पढ़ें – Shayari: ‘मैं फूल चुनती रही और मुझे ख़बर न हुई’, शायरों का अंदाज़े-बयां 

    दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
    दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
    अब्दुल हमीद अदम

    दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
    दोस्तों को आज़माते जाइए
    ख़ुमार बाराबंकवी

    मेरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए
    तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए
    शाज़ तमकनत

    वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
    जो पिछली रात से याद आ रहा है
    नासिर काज़मी

    दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
    मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं
    हफ़ीज़ जालंधरी

    इस से पहले कि बेवफ़ा हो जाएं
    क्यूं न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएं
    अहमद फ़राज़

    ये भी पढ़ें – Shayari: ‘उसने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं’

    ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
    कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
    मिर्ज़ा ग़ालिब

    दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
    दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
    हफ़ीज़ होशियारपुरी
    (साभार/रेख्‍़ता)

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