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रिश्तों को 'मजबूती' देने वाला पान गुणों से है भरपूर, जानें इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें

वैज्ञानिक आधार पर पान की छह प्रमुख प्रजातियां हैं.

वैज्ञानिक आधार पर पान की छह प्रमुख प्रजातियां हैं.

पान भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया है. शादी-समारोहों से लेकर फिल्मों तक हर जगह पान की मौजूदगी मिल जाएगी. मुंह को महका देने वाला पान गुणों से भरपूर है और ये कई बीमारियों में लाभदायक होता है. पान से जुड़ी कई दिलचस्प बातें भी हैं जो आप ज़रूर जानना चाहेंगे...

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हिंदी फिल्मों के गीत ‘पान खाए सैंया हमार’ और ’खाइके पान बनारस वाला’ से लेकर ‘चली आना पान की दुकान पर’ या ‘मैं हूं पान वाली’ व ऐसे बहुत से गीत बताते हैं कि पान का भारतीय जीवन में गहरा जुड़ाव है. भारत के प्राचीन ग्रंथ देख लीजिए या आयुर्वेद की पुस्तकों को पढ़ लीजिए, सब जगह पान की महिमा है. पान भारत के धर्म और संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है. असल में यह इसलिए जुड़ा है कि इसमें गुणों की भरमार है. पान में कोशिकारक्षक (antioxidants), गर्मीनाशक (anti- inflammatory), सूक्ष्मजीवी रोधी (anti-microbial) और शुगररोधी (anti-diabetic) तत्व पाए जाते हैं. पुरुषों और स्त्रियों के बीच ‘प्रेम’ को भी बढ़ाता है पान.

पुराणों से लेकर संस्कृत साहित्य में है खूब वर्णन

हिंदू धर्मग्रंथों पुराणों, स्तोत्र, आयुर्वेदिक ग्रंथ के अलावा संस्कृत साहित्य में तांबूल (पान) से जुड़े अनगिनत वृत्तांत हैं. हिंदू धर्म में यह भी माना जाता है कि पान के पत्ते के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न देवी-देवता निवास करते हैं. इसलिए कोई भी पूजा-यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठानों में पान की उपस्थिति आवश्यक है. देश में तंत्र-मंत्र से जुड़े आख्यानों में पान को सिद्धि-प्राप्ति में सहायक बताया गया है. जीवन के जो भी महत्वपूर्ण कर्म या जीवन-चक्र जैसे यश, धर्म, ऐश्वर्य, वैराग्य और मुक्ति में पान अपनी भूमिका निभाएगा.

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देश में तंत्र-मंत्र से जुड़े आख्यानों में पान को सिद्धि-प्राप्ति में सहायक बताया गया है.

स्कंद पुराण में वर्णन है कि जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, उस दौरान जो आकाशीय पिंड निकले, उनमें पान भी एक था. महाभारत के तीन अध्यायों मे पान का खास संदर्भ में वर्णन किया गया है. भागवत पुराण और विष्णु पुराण मे पान की महिमा का विस्तार से वर्णन है.

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पान पर लिखी हैं कविताएं, मुरकियां

जीवन के श्रृंगार रस और ‘प्रेम’ में पान को बहुमूल्य बताया गया है. संस्कृत साहित्य के अनेक आख्यानों, वृतांत्तों में पान को प्रेयसी-प्रियतम के बीच कामोद्दीपक बढ़ाने वाला बताया गया है. तीसरी शताब्दी में वात्सायन द्वारा लिखित ग्रंथ ‘कामसूत्र’ में जानकारी दी गई है कि वेश्यालयों के आसपास पान की दुकानें होती थीं जहां विभिन्न स्वाद व ‘रस’ के तांबूल मिलते थे. पान का मसला यहीं तक सीमित नहीं है.

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कवि अमीर खुसरो ने पान के स्वाद और सुंदरता को लेकर कविताएं और मुकरियां लिखी हैं.

रीतिकाल के काव्य भी इसका खूब वर्णन है. तेरहवीं शताब्दी के भारतीय कवि अमीर खुसरो ने पान के स्वाद और सुंदरता को दर्शाने वाली कविताएं और मुकरियां लिखी हैं. और तो और आज भी भारतीय शास्त्रीय गायक पान खाकर अपनी आवाज को गले के संक्रमण से बचाकर उसे सुरीला बनाए रखते हैं.

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सौदागर व विद्वानों ने दी है इसकी जानकारी

ये तथ्य बताते हैं कि भारत में पान का प्रचलन हजारों सालों से है. इसके बावजूद कहा जाता है कि पान भारत का आहार नहीं है. ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार फिलीपींस में पांच हजार साल पूर्व पान चबाने का प्रमाण मिलता है. वहां के पालावान द्वीप के डुयोंग गुफा स्थल में खुदाई के दौरान मिले कंकालों के दांत दागदार पाए गए. यह लाल रंग के थे, जो पान खाकर पैदा होते हैं. उनकी कब्र में चूने के गोले भी मिले. दक्षिण भारत में वर्ष 1923 में पैदा हुए पोषण विशेषज्ञ व खाद्य इतिहासकार केटी आचार्य ने अपनी अपनी पुस्तक ‘A Historical Dictionary of Indian Food’ में दावा किया है कि पान दक्षिण पूर्व एशियाई मूल का पत्ता है.

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भारत में पान का प्रचलन हजारों सालों से है.

वैसे वर्ष 1292 में भारत आए इतालवी सौदागर व खोजकर्ता मार्को पोलो दक्षिणी भारतीय के कोरोमंडल तट पर उतरते समय लिखा कि ‘हालांकि अधिकांश लोग शराब से परहेज करते थे, लेकिन कई लोग तंबूर (पान) नामक एक पत्ती को चबाने के आदी थे, कभी-कभी इसे कपूर और अन्य मसालों के साथ मिलाते थे.’ इसके अलावा 14वीं शताब्दी में भारत आने वाले मोरक्को के विद्वान इब्न बतूता ने लिखा है कि दिल्ली सल्तनत में महल का भोजन पान के साथ समाप्त होता था.

गुणों व संरचना के आधार पर पान की प्रजाति

विशेष बात यह है कि भारत में पान का प्रचलन आज भी जारी है. भारत में किसी भी राज्य में जाइए, लोग पान खाते जरूर मिलेंगे. लोगों को खाने में इतना मजा आता है कि वे घरों में खूबसूरत पानदान रखते हैं. लखनवी और हैदराबादी कल्चर में तो पान ही रस भरता है. वैसे तो पान की दो किस्में कही जाती है, देसी व बनारसी. लेकिन वैज्ञानिक आधार पर इसकी छह प्रमुख प्रजातियां हैं, बंगला, मगही, सांची, देशावरी, कपूरी और मीठी पत्ती वाला पान. यह वर्गीकरण पत्तों की संरचना व उनके रासायनिक गुणों के आधार पर किया गया है. पान में गुण ही गुण भरे पड़े हैं. इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-डायबिटिक गुणों सहित एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी यौगिक अवयव पाए जाते हैं. शामिल हैं. पान का सेवन हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल को रोकने में भी सहायक होता है.

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वैज्ञानिक आधार पर इसकी छह प्रमुख प्रजातियां हैं, बंगला, मगही, सांची, देशावरी, कपूरी और मीठी पत्ती वाला पान.

घावों व सूजन का भी इलाज कर देता है

आयुर्वेदाचार्य डॉ. आरपी पराशर व आहार विशेषज्ञ रमा गुप्ता के अनुसार पान की पत्तियों में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है. इसके अलावा इसमें कैरोटीन, कैल्शियम और विटामिन जैसे बी3, बी2, बी1 और सी भी पाया जाताह है. पान को अगर सुंगधित सुपारी व अन्य सात्विक वस्तुओं से चबाना बेहद लाभकारी है, इससे बलगम रुकता है, मुंह शुद्ध होता है, अपच व सांस संबंधी बीमारी दूर होती है. यह भोजन को पचाता है. आधुनिक अध्ययनों में सिद्ध किया गया है कि पान को घावों और सूजन के इलाज के लिए खासा लाभकारी माना जा रहा है. पान खाने से दांत मजबूत होते हैं, जीभ व होंठ के रोग करीब नहीं आते और छाती में सूजन तक कम हो जाती है.
पान का पत्ता मुंहासों और छालों से भी छुटकारा दिलाने में भी कुछ हद तक मदद कर सकता है. अगर तंबाकू के साथ पान खाया जाएगा तो वह शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो जाएगा. लगातार और अधिक पान का सेवन भी शरीर के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. इससे दांत तो खराब होते ही हैं, कैंसर भी हो सकता है. ज्यादा पान के सेवन से मुंह का स्वाद चला जाता है और शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है. इसका ज्यादा सेवन शरीर में एलर्जी पैदा कर सकता है.

Tags: Food, Lifestyle

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