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बेटी सदा के लिए: बेटियों को समर्पित समृद्धि की कविता संग्रह

भाषा
Updated: October 20, 2019, 5:22 PM IST
बेटी सदा के लिए: बेटियों को समर्पित समृद्धि की कविता संग्रह
महज आठ साल की उम्र से कविताएं लिख रही समृद्धि का कविता संग्रह 'बेटी सदा के लिए' अभी कुछ दिन पहले ही प्रकाशित हुआ है.

सामाजिक मसलों और मानवीय संवेदनाओं की बात करें तो आठवीं की छात्रा समृद्धि किसी मंझे हुए साहित्यकार की तरह अपनी बात बेबाकी से रखती हैं.

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'मैं महादेवी वर्मा के गिल्लू की संवेदना हूं, मैं दिनकर की मेहनत का पसीना हूं, मैं निराला की मानवीयता का भाल हूं, मैं सुर लहिरी सी बहती, प्रकृति का ताल हूं.' प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और इसे साबित कर दिखाया है 13 वर्षीय समृद्धि उपाध्याय ने. महज आठ साल की उम्र से कविताएं लिख रही समृद्धि का कविता संग्रह 'बेटी सदा के लिए' अभी कुछ दिन पहले ही प्रकाशित हुआ है. समृद्धि ने कहा, 'कविताएं और कहानी लिखने के अलावा मुझे पेंटिंग और संगीत का शौक है. मेरी कविताएं यथार्थवादी हैं जो चुभती हैं और सामाजिक बुराइयों से रूबरू कराती हैं. आप मेरी कविता संग्रह को अपने आसपास की सामाजिक घटनाओं से जुड़ा हुआ पाएंगे.' सामाजिक मसलों और मानवीय संवेदनाओं की बात करें तो आठवीं की छात्रा समृद्धि किसी मंझे हुए साहित्यकार की तरह अपनी बात बेबाकी से रखती हैं.

उम्र छोटी सी, बातें सधी और अपनत्व से भरी

'तुझ सा ना कोई मां' कविता इसी संवेदना का प्रतीक है. 'छाती सूख चुकी थी फिर भी स्तनपान जारी था, मां और बच्चे दोनों के लिए ये पड़ाव भारी था.' समृद्धि 'भ्रूण हत्या' पर लिखती हैं. 'कोख ने औजार से रोते हुए पूछा, गर्भ गिराने से तुम्हें डर नहीं लगता.' समृद्धि इन दिनों बचपन के मनोविज्ञान को लेकर एक उपन्यास पर काम कर रही हैं. वह बाल फिल्म 'बाल भूतनी' के दो गीत लिख चुकी हैं. जब सवाल किया गया कि क्या काव्य लेखन को ही पेशे के रूप में अपनाएंगी, तो जवाब आया कि फिलहाल तो शौक ही है लेकिन मौका मिला तो इसे 'फुलटाइम' भी कर सकती हूं. वह लेखनी के जरिए समाज को एक सोच प्रदान करने का जज़्बा रखती हैं. उम्र छोटी सी, बातें सधी और अपनत्व से भरी और लेखनी की धार ऐसी की व्यवस्था को सोचने पर विवश कर दे.

कविता संग्रह में नारी शक्ति पर जोर

लिखने की प्रेरणा कहां से मिली, इस सवाल पर समृद्धि बताती हैं, 'दादा यथार्थवादी कवि हैं. पिता सूर्य कुमार उपाध्याय बालीवुड में फिल्मकार हैं. वह लेखन, गीत और निर्देशन से जुडे हैं. ये माहौल प्रेरित करता है और मेरा लिखा सब मन लगाकर सुनते हैं. इससे मुझे बेहतर करने का हौसला आता है.' समृद्धि ने अपने कविता संग्रह में नारी शक्ति, पर्यावरण, आतंकवाद, प्रकृति और मानवीय मूल्यों पर जोर दिया है. वह भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि भी देती हैं. 'भारत को गौरव दिला समा गए इतिहास में, वो अटल पथ तैयार कर खो गए अनंत आकाश में.'

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर प्रहार

उन्होंने कहा, 'यथार्थवादी होने के साथ साथ मैंने अपनी कविताओं के माध्यम से उन सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किया है, जिन पर मंथन करने की आवश्यकता है.' शीर्षक 'बेटी सदा के लिए' से ही जाहिर है कि समृद्धि ने अपनी कविता के जरिए बेटियों के महत्व को सामने लाने का प्रयास किया है. आतंकवाद को लेकर समृद्धि ने पाकिस्तान पर प्रहार किया है- 'हम बुद्ध हैं, हम नानक हैं, हम संत कबीर, हैं महावीर लेकिन जब जंग करोगे तो ना छोडेंगे तुम्हें देंगे चीर.' वह बताती हैं, 'मैंने गरीब गुरबों की पीड़ा को भी सामने लाने की कोशिश की है.' भविष्य में क्या बनना चाहती हैं, सवाल सुनते ही तपाक से जवाब आया, 'मैं साहित्य के साथ साथ राजनीति में आना चाहती हूं ताकि महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने में योगदान कर सकूं.'

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First published: October 20, 2019, 5:22 PM IST
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