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जानिए कैसे हुआ था संसार का निर्माण, ये है गीता का ज्ञान!

जानिए कैसे हुआ था संसार का निर्माण, ये है गीता का ज्ञान!

भगवान कृष्ण

भगवान कृष्ण

श्रीमाद्भाग्वाद गीता के इस श्लोक के माध्यम से भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया थे ये बड़ा ज्ञान!

    मयाध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम्.
    हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्त्तते.

    श्रीमाद्भाग्वाद गीता के इस श्लोक के माध्यम से भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे पार्थ! मेरी अध्यक्षता में ही ये संपूर्ण प्रकृति चर और चराचर (जड़ और चेतन) संसार की रचना करती है, इसी कारण से जीवन और संसार चक्र गतिशील रहता है. इसकी वजह से विनाश के बाद भी प्रकृति नष्ट नहीं होती और नया निर्माण होता है.

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    उपनिषद के अनुसार, ईश्वर ने ऐसा निश्चय किया है कि वो एक हैं लेकिन खुद को कई रूपों में प्रकट कर सकते हैं. इसके बाद ही प्रकृति में परिवर्तन हुए और धीरे-धीरे पूरी सृष्टि का निर्माण हुआ.

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    जिस समय प्रकृति में नए निर्माण का काम चल रहा था उस समय खुद ईश्वर उसकी गहनता से निगरानी कर रहे थे. इसी वजह से प्रकृति में सबकुछ व्यवस्थित और आवश्यकता के अनुसार ही है.

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    ईश्वर ने मानव शरीर की जटिल संरचना की तरह ही संपूर्ण सृष्टि का निर्माण होते वक्त बड़ी बारीकी से अवलोकन किया है. ईश्वर की अध्यक्षता के कारण ही जीवन चक्र हमेशा गतिशील रहता है. कई लोग मरते हैं तो कई लोग जन्म भी लेते हैं. इसी व्यवस्था के कारण नश्वर होने के बावजूद विश्व में जीवन बरकरार रहता है.

    Tags: Bihar News, Lifestyle, Religion, Up news in hindi

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