भूपेन हजारिका, जिन्हें मरणोपरांत मिल रहा है भारत रत्न

2012 में भूपेन दा को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 12:22 PM IST
भूपेन हजारिका, जिन्हें मरणोपरांत मिल रहा है भारत रत्न
2012 में भूपेन दा को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था
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Updated: August 8, 2019, 12:22 PM IST
'असम को मैं भूपेन हजारिका के नाम से जानती हूं', ये बात लता मंगेशकर ने कही थी. वहीं गुलजार की माने तो भूपेन हजारिका का परिचय कराना बड़ा मुश्किल काम है. जिसके परिचय में शब्द कम पड़ जाते हों, जिसकी उपलब्धियों को बताते हुए जुबान थक जाती हो, उस शख्स के बारे में भला कोई एक पंक्ति में कैसे बता दे?

गीतकार, संगीतकार, अभिनेता, फिल्म निर्देशक, पत्रकार, कवि, चित्रकार, लेखक, पटकथा लेखक, गायक असम की संगीत-संस्कृति और फिल्मों को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाला सबसे पुराना और शायद इकलौता कलाकार. ये सारे परिचय एक ही शख्सियत के हैं, नाम था भूपेन हजारिका.

भूपेन हजारिका को आज पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ भारत रत्न दिया जा रहा है. हालांकि वो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके पुत्र तेज हजारिका उनकी जगह यह सम्मान लेंगे.

जन्म और शिक्षा

भूपेन हजारिका 1926 में असम के सादिया कस्बे में पैदा हुए. 1942 में गुवाहाटी से इंटर पास किया और बीए करने लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आ गए. बीएचयू से उन्होंने 1944 में बीए और 1946 में पॉलिटिकल साइंस में एमए किया. इसके बाद वो न्यूयॉर्क चले गए और पांच साल वहीं रहकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से जनसंचार में पीएचडी की. वहीं पर भूपेन दा की मुलाकात पॉल रॉब्सन से हुई. पॉल रॉब्सन लोकगायक थे जो अमेरिका में रंगभेद से उस दौर में लड़ रहे थे जब वहां किसी काले या इंडियन को मारने पर मुकदमा तक नहीं चलता था. हजारिका की सोच और आवाज पर पॉल रॉब्सन का गहरा असर पड़ा.

भूपेन दा संगीत और कला की दुनिया में जब पहली बार नोटिस हुए तो उनकी उम्र दस साल से भी कम थी. इस उम्र में ही उन्होंने गीत लिखना और गाना शुरू कर दिया था. 1939 में वो असमिया फिल्म इतिहास की दूसरी रंगीन फिल्म ‘इंद्रमालती’ में बाल कलाकार के रूप में दिखे. भूपेन दा अरुणाचल प्रदेश की पहली रंगीन हिंदी फीचर फिल्म ‘मेरा धरम, मेरी मां’ के निर्माता, निर्देशक और संगीत निर्देशक रहे.

हजारिका ने एक हजार से ज्यादा गीत और कविताएं लिखी हैं. पंद्रह बड़ी किताबें लिखी हैं. जिनमें लघुकथाएं, निबंध, यात्रा वृतांत और बच्चों के लिए कविताएं शामिल हैं. उन्हें 1977 में पद्मश्री दिया गया. 1993 में उन्हें भारत का ऑस्कर कहे जानेवाले दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया.
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5 नवंबर 2011 को 85 साल की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में हजारिका की मृत्यु हो गई. 2012 में भूपेन दा को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया. वहीं आज यानी 8 अगस्त, 2019 को उन्हें भारत रत्न के सम्मान से नवाजा जा रहा है.

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First published: August 8, 2019, 12:22 PM IST
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