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भारत की 'भूत झोलकिया' से दुनिया को लगती है मिर्ची, कहानी है चौंकाने वाली

सामान्य मिर्च की तुलना में भूत झोलकिया (Ghost Chilli) 400 गुना ज्यादा तीखी होती है. इसके पौधों की ऊंचाई 45 से 120 सेंटीमीटर तक होती है.
सामान्य मिर्च की तुलना में भूत झोलकिया (Ghost Chilli) 400 गुना ज्यादा तीखी होती है. इसके पौधों की ऊंचाई 45 से 120 सेंटीमीटर तक होती है.

सामान्य मिर्च की तुलना में भूत झोलकिया (Ghost Chilli) 400 गुना ज्यादा तीखी होती है. इसके पौधों की ऊंचाई 45 से 120 सेंटीमीटर तक होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 2:59 PM IST
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वैसे तो कोई भी भारतीय खाना तब तक स्वादिष्ट नहीं माना जाता है जब तक उसमें सही तीखापन न हो. साथ ही मिर्च (Chilli) के तड़के के बिना तो दाल भी पूरी नहीं होती. मिर्च भारतीय स्टेपल फूड का हिस्सा है. हालांकि पूरी दुनिया में अलग-अलग मिर्च का इस्तेमाल खाने में होता है. लेकिन, यह जानकर आपको गर्व होगा कि दुनिया की सबसे तीखी मिर्च भारत (India) में होती है. जी हां, इसे 'भूत झोलकिया' (Ghost Chilli) के नाम से जानते हैं. यह असम, नागालैंड और मणिपुर में होती है.

गिनीज बुक ऑफ रिकॉडर्स में शामिल
यह सिर्फ कोई दावा नहीं है क्योंकि सन 2007 में भूत झोलकिया (Bhut Jolokia) को दुनिया की सबसे तीखी मिर्च का तमगा मिला था. साथ ही इसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉडर्स में शामिल किया गया था. विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य मिर्च की तुलना में यह 400 गुना ज्यादा तीखी होती है. इसके पौधों की ऊंचाई 45 से 120 सेंटीमीटर तक होती है और भूत झोलकिया मिर्च एक से सवा इंच चौड़ी और तीन इंच तक लंबी हो सकती है. 75 से 90 दिनों में मिर्च तैयार हो जाती है. इसकी मांग पूरी दुनिया में है.

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महिलाओं के लिए बनी ढाल


इस मिर्च का उपयोग सिर्फ खाने या दवा के रूप में नहीं किया जाता है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा ढाल भी यह बनती है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस मिर्च का इस्तेमाल कर 'पेपर स्प्रे' विकसित किया है. डीआरडीओ की तेजपुर यूनिट ने इस स्प्रे को विकसित किया था. महिलाएं इसे अपनी सुरक्षा में लेकर चलती हैं. इसके साथ ही आंसू गैस के गोले बनाने में भी भूत झोलकिया खूब काम आती है.

स्वास्थ्य के लिए भी है उपयोगी
मिर्च में आमतौर पर कई तरह के विटमिन्स पाए जाते हैं. इसके साथ ही कई आयुर्वेदिक और अन्य थैरेपीज में इस मिर्च का इस्तेमाल होता है. हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल के साथ ही कैंसर जैसे असाध्य रोगों में भी मरीजों को इससे बनी दवाएं दी जाती हैं. कई स्थानों पर लोकल थेरेपीज में भी भूत झोलकिया का इस्तेमाल किया जाता है.
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