#BiggBoss गाइड : वो बातें जिन्हें आप जिंदगी में उतार सकते हैं

बिग बॉस देखते हुए अक्सर आपकी मुलाकात अपने अंदर के ऐसे ही दस बीस आदमियों से होती है.
बिग बॉस देखते हुए अक्सर आपकी मुलाकात अपने अंदर के ऐसे ही दस बीस आदमियों से होती है.

भारत के सबसे लोकप्रिय रिएलटी शो में से एक बिग बॉस को देखते हुए अक्सर आपकी मुलाकात अपने अंदर के ऐसे ही दस बीस आदमियों से होती है. हमारे व्यक्तित्व के कई पहलुओं को आईना दिखाता यह शो कई मायनों में हमें हमारी रिएलटी से रू ब रू करवाता है. आइए जानते हैं बिग बॉस की कुछ ऐसी बातें, जिन्हें असल जीवन में आज़माएंगे तो कुछ बात बन सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2018, 7:53 AM IST
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‘हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखना कई बार देखना’

अगर कोई आपसे पूछे कि बिग बॉस क्यों देखते हो तो निदा फाज़ली का यह शेर एक अच्छा जवाब हो सकता है. भारत के सबसे लोकप्रिय रिएलटी शो में से एक बिग बॉस देखते हुए अक्सर आपकी मुलाकात अपने अंदर के ऐसे ही दस बीस आदमियों से होती है. हमारे व्यक्तित्व के कई पहलुओं को आईना दिखाता यह शो कई मायनों में हमें हमारी रिएलटी से रू ब रू करवाता है. आइए जानते हैं बिग बॉस की कुछ ऐसी बातें, जिन्हें असल जीवन में आज़माएंगे तो कुछ बात बन सकती है.

टास्क करना – कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. सुनने में यह काफी घिसी पीटी नसीहत लग सकती है लेकिन बिग बॉस में अक्सर एक छोटे से टास्क से प्रतिभागियों को जीवन दान मिला है. असल जिंदगी में भी अक्सर हम मौके को छोटा सोचकर साइड से निकल जाते हैं. बाद में वही मौका किसी और के लिए बड़ा साबित हो जाता है और हम सिर्फ हाथ मलते रह जाते हैं. फिल्मों के वो किस्से तो आपने सुने ही होंगे जिसमें सुपरस्टार जिस रोल को छोटा समझकर नकार देता है, वही रोल किसी और के लिए लोकप्रियता की कहानी बन जाता है.



जजमेंटल न होना – कैमरे की तीसरी आंख से जब हम शो के प्रतिभागियों को एक दूसरे को लेकर राय बनाते देखते हैं तो लगता है कि ऐसा कई बार हम भी जाने अनजाने कर बैठते हैं. दफ्तर में आए किसी नए साथी को लेकर या किसी नए पड़ोसी को देखकर अक्सर हम पहले ही दिन तय कर लेते हैं कि यह व्यक्ति ऐसा या ऐसा होगा. वहीं छह महीने बीत जाने के बाद आप उसी शख्स के साथ बैठकर चाय पी रहे होते हैं. समझदारी इसी में है कि किसी के बारे में राय बनाने से पहले वक्त दीजिए, खुद को भी और सामने वाले को भी. मनुष्य के व्यक्तित्व की इतनी सारी परतें होती हैं कि कई बार उसे जानने में जिंदगी कम पड़ जाती है. इसलिए जल्दबाज़ी मत कीजिए.
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परिस्थितियों से झल्लाइए मत – ज्यादातर हमें परिस्थितियां अपने विपरीत ही दिखाई देती हैं. ऐसे में गुस्सा आना स्वाभाविक भी है लेकिन उतना ही मुश्किल है गुस्से को शांत करना. बिग बॉस में ऐसे प्रतिभागी ही ज्यादातर आगे बढ़े हैं जिन्होंने कभी गुस्से पर, तो कभी परिस्थिति पर काबू करना सीखा है. कई बार ख़ासा बड़ा नाम भी सिर्फ अपने गुस्से की वजह से शो में पिछड़ गया. वहीं सीज़न का पहला सीज़न जीतने वाले राहुल रॉय सिर्फ शांत रहने की वजह से आगे बढ़ते चले गए. एक बार फिर यह घिसी पिटी बात लग सकती है लेकिन रिएलटी शो हा या रियल लाइफ, मुश्किलों को वही पार कर पाया है जिसने संयम बनाए रखा.

यह भी गुज़र जाएगा - इस सोच के साथ सोने जाएंगे तो अगला दिन बेहतर होगा. शो में कई बार प्रतिभागियों के साथ ऐसा होता आया है जब वह अकेले पड़ गए हैं. लेकिन परेशान न होकर खुद को यह समझाना कि यह दौर भी गुज़र जाएगा, धीरे धीरे समीकरण को बदल देता है. असल जिंदगी में भी ऐसा होता है जब हम सबके होते हुए भी अकेले होते हैं. ऐसी मुसीबतें जिनसे हमें अकेले निपटना होता है. ऐसे बुरे दौर में खुद से सिर्फ इतना कहिए - यह दौर भी गुज़र जाएगा. जिस तरह एक खतरनाक झूले को हम आंख बंद करके झूल लेते हैं, उसी तरह जिंदगी का यह बुरा दौर भी उतार चढ़ाव के बाद गुजर ही जाता है और आपका व्यक्तित्व और उभरकर बाहर निकलता है. आत्मविश्वास जो बढ़ता है, सो अलग.

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लोगों का साथ हो तो अच्छा.. - बिगबॉस 11 की विजेता शिल्पा शिंदे की यही खासियत थी. वह अकेली थी भी और नहीं भी. घर में शिंदे ने अपनी लड़ाई अकेले लड़ी, 18-19 लोगों के घर में सबके होते हुए भी वह अकेली ही खेली, अपने मुद्दों को सामने रखने के लिए उन्होंने किसी और को आगे नहीं किया. ऐसला करते हुए उन्होंने दुश्मन कम, दोस्त ज्यादा बनाए. हमें भी अकेले ही लड़ना होता है, कोई साथ दे दे तो अच्छा, नहीं दे तो किसी के भरोसे अपनी जिंदगी नहीं जी जा सकती. खुद पर भरोसा पहले कीजिए, दूसरे पर बाद में.

जिंदगी के गेम का आनंद लीजिए - गेम नहीं खेलना कोई विकल्प नहीं है. शायद खेलकर भी आप बाहर हो जाएं लेकिन कम से कम अफसोस तो नहीं होगा कि खेल लेते तो शायद कुछ और होते. फाइटर की प्रवृत्ति हमें कभी निराश नहीं करती. बिग बॉस में पिछले साल के विजेता मनवीर गुर्जर और उनके साथी मन्नु को कोई नहीं जानता था. लेकिन - मुझे कोई नहीं जानता है - की सोच से बाहर निकलकर उन्होंने गेम में 100 प्रतिशत दिया और अंत में यह दोनों ही प्रतिभागी, सेलिब्रेटी की भीड़ में खुद की पहचान बनाने में कामयाब रहे. आप भी लाइफ को गेम की तरह देखिए, हर शेड का आनंद लीजिए, नतीजा अच्छा हाथ लगेगा.
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