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Book Review: 'भारत कैसे हुआ मोदीमय' में दिखती है भविष्य के भारत की स्पष्ट झलक

Anoop Mishra | News18India
Updated: October 9, 2019, 7:12 PM IST
Book Review: 'भारत कैसे हुआ मोदीमय' में दिखती है भविष्य के भारत की स्पष्ट झलक
तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर लिखी गई वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार की पुस्तक- “भारत कैसे हुआ मोदीमय” भाजपा की चुनावी रणनीति की इनसाइड स्टोरी है.

तथ्यों, घटनाओं और उद्धरणों के विश्वसनीय डाटा के बूते संतोष कुमार यह सिद्ध करने में सफल रहे हैं कि मोदी-शाह की जोड़ी की अगुआई में यह नई भाजपा किस तरह खड़ी हुई और दमदार तरीके से आगे बढ़ रही है. संतोष की रिपोर्टर डायरी के पन्नों से निकलकर आए तथ्य यह बताते हैं कि पार्टी ने अपना कायाकल्प करते हुए न तो अपना मूल त्यागा और न ही ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का अपना चिंतन.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 7:12 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा और नरेंद्र मोदी की दूसरी बार बड़े बहुमत से जीत अभी भी लोगों के मन में कौतूहल पैदा करती है. विरोधी अभी भी इस जीत को लेकर ईवीएम पर संदेह करते हैं तो समर्थक भी पुलवामा, बालाकोट से उपजे राष्ट्रवाद के संकुचित दायरे में देखते हैं. लेकिन, इस मिथक को तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर लिखी गई वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार की पुस्तक- “भारत कैसे हुआ मोदीमय” तोड़ती है, जो पूरी तरह से भाजपा की चुनावी रणनीति की इनसाइड स्टोरी है. अगर इस पुस्तक को देखें तो पुलवामा-बालाकोट उस स्पंज पर पानी गिराने जैसा था, जिसे भाजपा ने पिछले पांच साल में संगठन के महामंथन के जरिए तैयार किया था.

लेखक संतोष कुमार लिखते हैं कि यह विचार उन्हें लोकसभा चुनाव नतीजों से छह दिन पहले 17 मई, 2019 को भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री मोदी के उद्बोधन से आया, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘एक संगठन के आधार पर चुनाव कैसे लड़ा जाता है और कितनी बड़ी ताकत व परिश्रम लगता है, यह अपने आप में लोकतंत्र की असली ताकत है. इस पर आपको रिसर्च करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को पता चले कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे ही नहीं चलती हैं और बड़े मानव शक्ति समूह को संगठन के काम में लगाया जाता है. हमारी कोई योजना ऐसी ही नहीं होती, सबको विस्तृत सोच तथा योजनाबद्ध तरीके से आयोजित किया जाता है.’’

लेखक ने उन सभी तथ्यों और उन तमाम घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है, जिनके जरिए 2014 की मोदी की आंधी को 2019 में सुनामी में बदल दिया गया. संगठन और सरकार के कारगर समन्वय, गरीबों-वंचितों के लिए मोदी सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक परिणामों का उपयोग, जातियों-उपजातियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों का इंद्रधनुषी समीकरण, उनको संगठन में महत्त्व तथा निर्णय प्रक्रिया में सहभाग, छोटे दलों से तालमेल, दूसरे दलों के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को पाले में खींच लाना, पार्टी के हरेक कार्यक्रम-अभियान की मॉनिटरिंग, फीडबैक, उम्मीदवारों का व्यावहारिक धरातल पर चयन, निर्धारित आयु सीमा के पार वाले नेताओं की चुनावी झंझावात से मुक्ति के कठोर निर्णयों की प्रक्रिया जैसी कितनी ही बातें हैं, जिनका समग्र विवरण संतोष कुमार ने क्रम से दिया है.

भाजपा की जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया 130 करोड़ देशवासियों की जीत. Prime Minister Narendra Modi said BJP's victory was the victory of 130 crore countrymen.

हार्डिंग्‍स के बैकड्रॉप भी खुद तय करते हैं अमितशाह
जिला-मंडल स्तर पर लगाई जाने वाली होर्डिंग्स का बैकड्रॉप तक कैसा होगा, शाह खुद दिल्ली से तय करते थे. दिल्ली-बिहार की हार हो या फिर दलित एक्ट पर देश भर में आंदोलन, मोदी-शाह की जोड़ी ने हार नहीं मानी और इस तरह से रणनीति बनाई जिसे माइक्रो नहीं, लेखक ने नैनो स्ट्रेटजी की संज्ञा दी है. लेखक यह भी बताते हैं कि मोदी और शाह ने पार्टी के पूर्वावतार जनसंघ के युग की तरह अनगिनत कार्यक्रमों के जरिए पार्टी तंत्र को चाक-चौबंद और हमेशा सक्रिय रखने की लीक का पालन किया, साथ ही किस तरह सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और संपर्कों-समन्वय के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों में पार्टी की पैठ बढ़ाई.
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संगठन तंत्र को कॉर्पोरेट तरीकों में ढाल दिया गया है
संगठन तंत्र को किन-किन उपायों के जरिए कॉर्पोरेट तरीकों में ढाला गया, ताकि संगठन और सरकार में वांछित परिणाम निर्धारित समय सीमा में मिल जाएं. अपने नेताओं, सांसदों, मंत्रियों से उनके परफॉर्मेंस का विवरण मांगने जैसे आधुनिक प्रबंधन के कई किस्से इस पुस्तक में हैं.

यह जानना दिलचस्प है कि नतीजों से पहले किस तरह मोदी और शाह आसन्न शपथ ग्रहण की तैयारियों में व्यस्त थे, किस तरह तीन राज्यों में सत्ता हाथ से जाने का असर शाह की लोकसभा चुनाव की तैयारी पर रत्ती भर भी नहीं पड़ा, किस तरह पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार की उपलब्धियों और विकास, न्यू इंडिया बनाने जैसे मुद्दों को लेकर बूथ स्तर तक प्रो-ऐक्टिव चुनावी तंत्र खड़ा करने की महती योजना को जरा सा पीछे रख देश में हिलोरें ले रही राष्ट्रवाद की भावना तथा एक निर्णयक्षम, ईमानदार और जोखिम उठाने वाले तथा राष्ट्र को हर मोर्चे पर शक्तिशाली बनाने में समर्थ नेता के बतौर प्रधानमंत्री मोदी में देश के लोगों के अगाध विश्वास को चुनावी रणनीति में किस तरह सबसे आगे रखा गया!

'भारत कैसे हुआ मोदीमय' के लेखक एवं वरिष्‍ठ पत्रकार संतोष कुमार. Santosh Kumar, author and senior journalist of 'How did India become ModiMay'

बीजेपी ने बरकरार रखा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का अपना चिंतन
तथ्यों, घटनाओं और उद्धरणों के विश्वसनीय डाटा के बूते संतोष कुमार यह सिद्ध करने में सफल रहे हैं कि मोदी-शाह की जोड़ी की अगुआई में यह नई भाजपा किस तरह खड़ी हुई और दमदार तरीके से आगे बढ़ रही है. संतोष की रिपोर्टर डायरी के पन्नों से निकलकर आए तथ्य यह बताते हैं कि पार्टी ने अपना कायाकल्प करते हुए न तो अपना मूल त्यागा और न ही ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का अपना चिंतन. पुस्तक भले 2014 से लेकर 2019 तक की नई, साहसी भाजपा की सफल यात्रा के पांच वर्षों का विवरण दिखती हो, लेकिन इसमें दर्ज तथ्य भावी भाजपा की ही नहीं, भविष्य के भारत की भी स्पष्ट झलक देते हैं.

किताब के बारे में

नाम - भारत कैसे हुआ मोदीमय
लेखक - संतोष कुमार
प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन

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First published: October 9, 2019, 5:29 PM IST
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