Book Review: 'इतिहास के 50 वायरल सच' किताब में खुलते हैं कई ऐतिहासिक मुद्दे

Book Review: 'इतिहास के 50 वायरल सच' किताब में खुलते हैं कई ऐतिहासिक मुद्दे
विष्णु शर्मा की किताब में ऐसे 50 मुद्दों के बारे में साक्ष्य जुटाए गए हैं.

विष्णु शर्मा (Vishnu Sharma) की नई किताब 'इतिहास के 50 वायरल सच' (Itihas Ke 50 Viral Sach) इस कन्फ्यूजन को पूरी तरह दूर तो नहीं करती, लेकिन फैक्ट चैक वेबसाइट्स की तरह ही इतिहास के 50 दावों की पड़ताल तो करती ही है, सो एक बड़ा प्रयास तो है ही.

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(रिंकी बंसल)


मुश्किल भरा दौर है, जहां सोशल मीडिया में तमाम इतिहासकार पैदा हो गए हैं. जो कोई भी एजेंडा (Agenda) पोस्ट अपने वॉल पर शेयर करते हैं और उनके फॉलोअर्स (Followers) सच मानकर उसे कॉपी, फ़ॉरवर्ड, शेयर कर देते हैं. ऐसे में विष्णु शर्मा (Vishnu Sharma) की नई किताब 'इतिहास के 50 वायरल सच' (Itihas Ke 50 Viral Sach) इस कन्फ्यूजन को पूरी तरह दूर तो नहीं करती, लेकिन फैक्ट चैक वेबसाइट्स की तरह ही इतिहास के 50 दावों की पड़ताल तो करती ही है, सो एक बड़ा प्रयास तो है ही. इस किताब (Book) में कोशिश की गई है कि पिछले 2-3 साल में सोशल मीडिया (Social Media) पर जो बड़े ऐतिहासिक मुद्दे उठे हैं, उनकी पड़ताल की जाए. ऐसे में कई नेताओं ने जो इतिहास से जुड़े जो बयान दिए गए, उन पर तथ्यों के साथ सच जानने की कोशिश की गई है.

तमाम मुद्दे सोशल मीडिया पर विचरते रहते हैं



इसमें पचास चैप्टर्स हैं जो पचास मुद्दों की छानबीन करते हैं. अमित शाह ने कहा था गांधीजी की अंतिम इच्छा कांग्रेस को खत्म करने की थी, पदमावती पर मूवी बनाने के बाद उनके ऐतिहासिक वजूद पर सवाल उठे थे, सावरकर-भगत सिंह की तुलना तो होती है लेकिन उनके बीच के रिश्तों की नहीं, कमला नेहरू का पूरा इलाज सुभाष चंद्र बोस ने करवाया था, बिनोवा भावे ने इमरजेंसी को अनुशासन पर्व बताया था, अमरीश पुरी संघ के अधिकारी रहे थे, ताजमहल तेजोमहालय मंदिर था, शास्त्रीजी की मौत सीआईए-केजीबी की साजिश का नतीजा थी, जैसे तमाम मुद्दे सोशल मीडिया पर विचरते रहते हैं.



पब्लिक का मिजाज सोशल मीडिया पर पता चलता है
विष्णु शर्मा की किताब में ऐसे 50 मुद्दों के बारे में साक्ष्य जुटाए गए हैं. इस किताब की खास बात यही है कि आप को जब समय मिले एक चैप्टर में एक मुद्दे की पड़ताल पढ़िए और फिर बाद में जब मर्जी आए या सच जानने की जरूरत पड़े, तब पढ़िए. सो आपको एक बार में पढ़ने का दवाब नहीं रहता और हर तथ्य को संदर्भों के साथ बताया गया है. विष्णु शर्मा पेशे से पत्रकार हैं, इतिहास से एमफिल हैं, नेट भी क्वालीफाइड हैं, सो इतिहास में तथ्यों की छानबीन के तरीके से भलीभांति परिचित हैं. लेकिन पत्रकारिता फील्ड में होने के नाते केवल दुरूह ऐतिहासिक किताबें या शोध करने के बजाय केवल पब्लिक से जुड़े मुद्दों पर ही काम करते हैं और पब्लिक का मिजाज सोशल मीडिया पर पता चलता है, सो वो उन्हीं मुद्दों पर शोध परक लेख लिखते हैं, ताकि पब्लिक का कन्फ्यूजन दूर हो. ऐसे सभी लेख उनकी इस किताब में समेटे गए हैं.

दूसरे साल में दूसरी किताब
प्रभात प्रकाशन से ये उनकी लगातार दूसरे साल में दूसरी किताब है. इससे पहले वो 'गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं' लिख चुके हैं, उस किताब को मुंबई आईआईटी की सेंट्रल लाइब्रेरी में शामिल भी किया गया है. एबीपी न्यूज ने उन्हें 2016 में हिस्ट्री के ब्लॉग के लिए बेस्ट ब्लॉगर अवॉर्ड से सम्मानित भी किया था. अब उनकी दूसरी किताब 'इतिहास के 50 वायरल सच' भी चर्चा में है, तमाम पुस्तक मेलों में रखी जा रही है. किताब हार्ड बैक, पेपरबैक और ई-बुक तीनों फॉरमेट में उपलब्ध है. अमेजन, फ्लिपकार्ट और तमाम प्लेटफॉर्म्स पर उनकी ये दोनों किताबें तीनों फॉरमेट में उपलब्ध हैं.

किताब- इतिहास के 50 वायरल सच
लेखक- विष्णु शर्मा
प्रकाशक- प्रभात प्रकाशन
मूल्य- 159 रुपए
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