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Book Review : जिंदगी का स्वाद समझने के लिए जरूरी है ये 'नमक'

News18Hindi
Updated: January 21, 2020, 1:02 PM IST
Book Review : जिंदगी का स्वाद समझने के लिए जरूरी है ये 'नमक'
हिमानी द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में जिंदगी के छोटे-छोटे लेकिन अहम पलों को संजोया गया है.

हिमानी (Himani) की पुस्तक 'नमक' (Namak) में 80 कहानियां हैं. इन कहानियों में कैद किए गए जिंदगी के छोटे-छोटे पल हमारी-आपकी सबकी जिंदगी का हिस्सा हैं.

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  • Last Updated: January 21, 2020, 1:02 PM IST
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हिमानी (Himani) की छोटी-छोटी 80 कहानियों का संग्रह है ‘नमक’ (Namak). सात खंडों में बंटी इन कहानियों का मूल स्वर है प्रेम. यह संग्रह औथर्स प्राइड पब्लिशर (Authors Pride Publisher) से छपकर आया है. ये कहानियां अपने आकार और विषय में ‘लप्रेक’ के काफी करीब दिखती हैं. पर यह बात द्वंद्व रहित होकर कही जा सकती है कि हिमानी (Himani) की कहानियां लप्रेक का हिस्सा नहीं हैं.

दरअसल, इन कहानियों में जिंदगी के छोटे-छोटे पल कैद हैं. खास यह कि ये पल खास नहीं, बेहद आम हैं. हमारी-आपकी सबकी जिंदगी का हिस्सा हैं. कहन का तरीका इतना सांकेतिक कि अचानक कोई कहानी आपको अपनी जिंदगी का कोई हिस्सा लगने लगे.

कुछ कहानियां इतनी सांकेतिक हो गई हैं कि अधूरी सी लगती हैं. लगता है विस्तार की जरूरत थी. पर जब आप कहानी पर रुक कर विस्तार तलाशने लगते हो, तो कहानी का विस्तार आपको मिलने लगता है. इस अर्थ में देखें तो हिमानी (Himani) की ऐसी कहानियां पाठकों को भी लेखक की भूमिका निभाने पर बाध्य करती हैं.  इस संग्रह के भाग दो की चौथी और संग्रह की 18वीं कहानी मजह तीन वाक्यों में सिमटी है. कहना-सुनना शीर्षक की यह कहानी पढ़ें –

‘मैं कह नहीं पाता हूं। क्या तुम सुन पाओगी?’ लड़के ने पूछा

‘हां...’ लड़की ने कहा।

लड़के को कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी।

तीन वाक्यों की इस कहानी में आप महसूस सकते हैं प्रेम की तीक्ष्णता. लड़के-लड़की के बीच की वह अंडरस्टैंडिंग, जिसके अभाव में आज बसे-बसाये घर उजड़ जाते हैं. हिमानी की इस कहानी में यह जो अबोले प्रेम की अभिव्यक्ति है, क्या वह आज आपको कहीं अपने आसपास दिखती है? यकीनन, ऐसे कई पल आपके जीवन में भी होंगे जब आपको अपने प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए शब्दों की या कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी होगी. इस कहानी को पढ़ने के बाद पाठक जब इसके विस्तार पर विचार करने लगता है तो उसे अपने कई संदर्भ इससे जुड़ते हुए मिलने लगते हैं. वह इन संदर्भों को अपने तरीके से जोड़ता चलता है. थोड़ी देर पहले जो कहानी अधूरी लग रही थी, वह अचानक पूरी होती सी महसूस होने लगती है. हिमानी के इस संग्रह की ऐसी छोटी कहानियों की यही ताकत है कि वह पढ़ने के बाद भी खत्म नहीं होती, बल्कि वह पाठकों के भीतर एक नई कहानी के रूप में शेप लेने लगती हैं.इस संग्रह की किसी भी कहानी में किसी भी पात्र को कोई नाम नहीं दिया गया है. हर जगह लड़का, लड़की या सहेली जैसे संबोधन का इस्तेमाल हुआ है. पात्रों को नाम में न बांधने का एक मनोवैज्ञानिक फायदा यह महसूस हो रहा है कि पाठक जिस भी कहानी से खुद को जुड़ा हुआ पा रहा है, उस लड़के, लड़की या सहेली में खुद को बहुत आसानी से शिफ्ट कर ले रहा है. लेखक लिखते वक्त जितनी मशक्कत से परकाया प्रवेश करता है, वह काम बगैर किसी कसरत के पाठक बेहद सहज रूप में कर पा रहा है.

इस संग्रह की कहानियों में देह से लेकर मन तक की लगभग वे सारी मनोदशाएं हैं जो युवा जोड़ियों के बीच बनती-बिगड़ती रहती हैं. रिश्तों का अंतर्द्वंद्व भी है. मन के उहापोह भी आपको मिल जाएंगे. खीज और प्रेम, समर्पण और इंतजार जगह-जगह दिखेंगे. प्रेम को व्यक्त न कर पाने का कश्मकश भी मिलेगा. उसके साइड इफेक्ट्स भी मिलेंगे. युवा मन की नासमझियां भी दिखेंगी. कहानियों में गिरती-संभलती जोड़ी से भी मुलाकात होगी.

इस संग्रह के तीसरे भाग की दूसरी और संग्रह की 26वीं कहानी है ‘कार्ड’ (Card). यह कहानी इस संग्रह की सबसे दमदार कहानी है. यह छोटी सी कहानी अपनी बुनावट में लंबे अंतराल को समेटती है और बताती है कि इनसान का स्वभाव बदलता नहीं. उसका प्रेम कभी मरता नहीं. उसे व्यक्त करने का तरीका अलग हो सकता है, पर अबोला प्रेम भी व्यक्त हो जाया करता है. कहानी शुरू होती है दसवीं क्लास के पेपर वाले दिन की चर्चा से. लड़के ने लड़की को ‘ऑल दे बेस्ट’ कहते हुए कार्ड दिया, पर कार्ड में लिखा था ‘आई लव यू’। लड़की ने जब टोका तो लड़के ने बहाना बनाया कि हड़बड़ी में यही कार्ड मिला. फिर वर्षों बीत गए मुलाकात को. इस बार मौका था लड़की की शादी का. लड़के ने फिर एक कार्ड खरीदा और लड़की से कहा ‘आई लव यू’ पर कार्ड के अंदर लिखा था ‘ऑल द बेस्ट’.

सही वक्त पर अपनी बात न कह पाने के ऐसे कई-कई मलाल हमसब के भीतर कहीं गहरे दबे होते हैं. इन दबाव को झेलते हुए हम अपने-अपने हिस्से का सुख-दर्द भोग रहे होते हैं. पर यह सच है कि ऐसे मलाल गाहे-बगाहे सिर उठाते रहते हैं. ये कहानियां ऐसे मलालों को सपने की तरह विरेचित करती हैं. हमें दुरुस्त करती हैं.

इस संग्रह से गुजरते हुए, इसके पात्रों को महसूसते हुए बार-बार हृषिकेष मुखर्जी की फिल्म बावर्ची की याद आई. उस फिल्म में राजेश खन्ना ने जिस बावर्ची की भूमिका निभाई थी, वह इनसानियत के स्तर पर बहुत उम्दा चरित्र था. हिमानी की लगभग हर कहानी में इनसानियत की ऊंचाई छूते पात्र आपको मिल जाएंगे और मुमकिन है कि आपको हृषिकेश मुखर्जी का वह बावर्ची बार-बार याद आए.

कहानी संग्रह : नमक

लेखक : हिमानी

प्रकाशक : औथर्स प्राइड पब्लिशर

मूल्य : 125 रुपए

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First published: January 20, 2020, 5:23 PM IST
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