Home /News /lifestyle /

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

याददाश्त कमजोर होना, ध्यान न लगना ब्रेन फॉग के लक्षण हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-pexels)

याददाश्त कमजोर होना, ध्यान न लगना ब्रेन फॉग के लक्षण हैं. (प्रतीकात्मक फोटो-pexels)

Brain Fog Causes: कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, मीनोपॉज, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है.

    Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: अगर आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं. ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है. बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त कमजोर होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में दिक्कत होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि. ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित बीमारियों में भी दिखाई देते हैं. जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है.

    हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक शोध के अनुसार लिखा है गया है कि कोरोना से ठीक हो चुके करीब 28 प्रतिशत लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान व एकाग्रता में कमी की शिकायत की है.

    क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
    दिल्ली के उजाला सिग्नस अस्पताल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से बदलाव आता है. ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी काम में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के काम भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं. डॉक्टर खून की जांच में इसका पता लग सकते हैं. जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है.

    ब्रेन फॉग के कारण 
    – नींद पूरी न होना
    – स्क्रीन के साथ ज्यादा समय बिताना
    – सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
    –  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की आशंका रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है. जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया.

    यह भी पढ़ें- तिल या मस्से से जुड़ी स्किन कैंसर की ABCDE को समझिए, खुद ऐसे चेक करें

    कैंसर और कीमोथेरेपी
    कैंसर के इलाज में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर असर डाल सकती हैं. हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है.

    क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
    अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे ज्यादा समय तक बनी रह सकती है. इसमें व्यक्ति को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है.

    दवाओं का असर
    कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर असर डालती हैं.

    यह भी पढ़ें- बहुत ज्यादा सोचने से दिमागी सेहत हो सकती है खराब, विशेषज्ञ से समझिए पूरा केस

    खान-पान और सावधानियां
    – अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें.
    – दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें.
    – शराब और स्मोकिंग से परहेज करें.
    – रोज 15 मिनट धूप लें.
    – नियमित एक्सरसाइज जरूर करें.
    – लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं.
    – कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है.

    Tags: Health, Health News, Mental health

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर