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Bulleh Shah Kafian: 'हुण मैं अनहद नाद बजाया...' पढ़ें, पंजाबी कवि बुल्ले शाह की चुनिंदा काफियां

Bulleh Shah Kafian: 'हुण मैं अनहद नाद बजाया...' पढ़ें, पंजाबी कवि बुल्ले शाह की चुनिंदा काफियां

बुल्ले शाह की काफियां (Bulleh Shah Kafian)

बुल्ले शाह की काफियां (Bulleh Shah Kafian)

बुल्ले शाह की काफियां (Bulleh Shah Kafian): बुल्ले शाह का असली नाम अब्दुल्ला शाह था. उनकी पंजाबी कविताओं को 'काफ़ियां' कहा जाता है. उन्होंने काफ़ियों में 'बुल्ले शाह' तख़ल्लुस का इस्तेमाल किया था. उनकी कई कविताओं पर गाने भी बनाए गए हैं. रब्बी शेरगिल ने बुल्ले शाह की ही कविता 'बुल्ला की जाना मैं कौन' को अपनी आवाज दी थी. जिसे लोगों ने खूब पसंद किया.

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बुल्ले शाह की काफियां (Bulleh Shah Kafian): पंजाबी सूफ़ी संत और कवि बुल्ले शाह का जन्म 1680 में हुआ था. उनका मूल नाम अब्दुल्ला शाह था. जानकारी के मुताबिक उन्होंने शुरुवाती शिक्षा अपने पिता से ली थी. जिसके बाद उच्च शिक्षा क़सूर में ख़्वाजा ग़ुलाम मुर्तज़ा से ली थी, जो कि पंजाबी कवि वारिस शाह के भी गुरु थे. आपको बता दें कि बुल्ले शाह की पंजाबी कविताओं को ‘काफ़ियां’ कहा जाता है.

गौरतलब है कि रब्बी शेरगिल ने बुल्ले शाह की कविता ‘बुल्ला की जाना मैं कौन’ को अपनी आवाज दी. फ़िल्म ‘दिल से’ के ‘छइयां छइयां’ गाने के बोल इनकी काफ़ी “तेरे इश्क नचाया कर थैया थैया” पर आधारित हैं. वहीं बॉलीवुड फ़िल्म ‘रॉकस्टार’ में गाया गया गाना ‘कतया करूं’ भी इनकी कविता पर ही बनाया गया है. पढ़ें, बुल्ले शाह की चुनिंदा काफियां (Bulleh Shah Kafian)

बुल्ले शाह की काफियां (Bulleh Shah Kafian)

ओह इशक असाँ वल आया जे

ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

पहलो करदा आवण जावण,
फिर उँगली रक्ख के बन्न बहावण।
पिच्छों सभ समाया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

मैंने सबक खलीलों पढ़िआ,
नारों हो गुलज़ारों वड़ेआ।
ओधरों असर कराया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

हेठ आरे देहो खलोती,
कंधी जुल्म महबूबा चोटी।
ओस आपणा आप चीराया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

बसख दे विच्च मोती लटके,
रस लबाँ दी पीवो गटकें
इस सालम जिस्म पढ़ाया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

सानूँ आपणे काफर काफर,
गिला गुजारी करदे वाफरं
जिन्हाँ इश्क ना मूल लगाया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

मुँह दे उत्ते मली स्याही,
लज लेहादी धो सभ लाही।
असाँ नंग नामूस गवाया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

मज़हबाँ दे दरवाजे उच्चे,
कर कर झगड़े खले विगुच्चे।
बुल्लामोरिओं इश्क लँघाया जे,
ओह इशक असाँ वल आया जे।
ओह आया मैं मन भाया जे।

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अब लगन लगी कीह करीए?

अब लगन लगी कीह करीए?
ना जी सकिए ते ना मरीए!

तुम सुनो हमारी बैना,
मोहे रात दिने नहीं चैना,
हुण प्री[3] बिन पलक न सरीए।
अब लगन लगी कीह करीए?

एह एगन बिरहे दी जारी,
कोई हमरी प्रीत निवारी,
बिन दरशन कैसे तरीए?
अब लगन लगी कीह करीए?

बुल्ले पई मुसीबत भारी,
कोई करो हमारी कारी,
एह अजिहे दुख कैसे जरीए?
अब लगन लगी कीह करीए?
ना जी सकिए ते ना मरीए।
अब लगन लगी कीह करीए?

आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ

आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ,
केही चेटक लाया ई!

मैं तेरे विच्च ज़रा ना जुदाई,
सात्थों आप छुपाया ई।

मज्झीं आइआँ राँझा/यार ना आया,
फूक बिरहों डोलाया ई!
आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ।

मैं नेड़े मैनूँ दूर क्यों दिस्नाऐं,
सात्थों आप छुपाया ई।
आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ।

विच्च मिसरदे वाँग जुलैखां
घुँघट खोल्ह रूलाइआ ई।
आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ।

सहु बुल्ले दे सिर विच्च बुरका,
तेरे इशक नचाया ई।
आ खाँ वे दिल जानी प्यारेआ।
केही चेटक लाया ई।

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हुण मैं अनहद नाद बजाया

हुण मैं अनहद नाद बजाया,
तैं क्यों अपणा आप छुपाया,

नाल महिबूब सिर दी बाज़ी,
जिसने कुल तबक लौ साजी,
मन मेरे विच्च जोत बिराजी,
आपे ज़ाहिर हाल विखाया।
हुण मैं अनहद नाद बजाया।

जद ओह लाल लाली पर आवे,
सुफैदी सिआही दूर करावे,
अङणा अनहद नाद वजावे।

आपे प्रेमी भौर भुलाया।
हुण मैं अनहद नाद बजाया।(साभार-कविता कोश)

Tags: Books, Lifestyle, Literature

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