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पॉजिटिव थिंकिंग भी जीवन में धकेल सकती है पीछे, जानें क्या है सच्चाई

कई बार पॉजिटिव थिंकिंग भी पीछे ले जा सकती है. Image Credit: Belle-co/Pexels
कई बार पॉजिटिव थिंकिंग भी पीछे ले जा सकती है. Image Credit: Belle-co/Pexels

सकारात्मक (Positive) रहना अच्छा है, लेकिन बेहद सकारात्मकता का साथ भी आपको आगे बढ़ने से रोकता है. यह समझना जरूरी है कि सकारात्मक सोच कब आपकी मदद कर रही है और कब नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 2:39 PM IST
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यदि आप इंटरनेट ब्राउजर में टाइप करते हैं, 'सकारात्मक सोच आपके लिए क्यों अच्छी है?', तो कई लिंक खुल जाएंगे और हर कोई सकारात्मक क्यों सोचना चाहिए और ऐसा नहीं करने का क्या नतीजा होगा, इसी पर ज्ञान बांट रहा होगा. लेकिन तब क्या हो जब आपको पता चले कि सकारात्मक सोच जिंदगी में पीछे भी धकेल सकती है. हालांकि सभी शोध भी यही बताते हैं कि सकारात्मक नजरिया रखने से लोगों का जीवन तनाव रहित और सेहतमंद रहता है, लेकिन कुछ लोगों पर सकारात्मक सोच नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती है. इसलिए यह समझना भी जरूरी है कि सकारात्मक सोच कब आपकी मदद कर रही है और कब नहीं. यहां इसे जानने के 4 तरीके हम आपको बताने जा रहे हैं.

1. असल भावनाओं की अनदेखी
अक्सर कहा जाता है कि सकारात्मक विचार सोचकर आप सकारात्मक महसूस करेंगे और फायदे में रहेंगे. इसका एक बड़ा नकारात्मक पहलू भी है. इससे आप अपनी भावनाओं को स्वीकार करने में नाकाम रहते हैं. यदि आप लगातार बहादुर चेहरा बनाकर अपनी भावनाओं को नजरअंदाज करते हैं, तो आप खुद का बेहद नुकसान कर रहे हैं. आप मान रहे हैं कि बाकी सब आपसे अधिक महत्वपूर्ण हैं. इससे आपकी सेहत और मेंटल वेल्बीइंग (Wellbeing) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

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2. गलतियों से सीखें


प्लान के मुताबिक कुछ न होने पर नकारात्मक नतीजे पर सकारात्मक सोच आपको सीखने के मौकों से वंचित कर सकती है. यह आपको पल में बेहतर महसूस करा देती है. आपको पता ही नहीं लगता कि आप व्यवहार के बेकार के तरीकों को दोहरा रहे हैं. हम गलतियों पर यकीन में विश्वास नहीं करते हैं,लेकिन ये सीखने के शानदार अवसर देती हैं और आप सीख रहे हैं, तो आप बढ़ रहे हैं.

3. बेहतर करने के लिए प्रेरणा
अक्सर जीवन में सबसे बड़े मोटिवेटर्स (motivators ) तब होते हैं जब हम कुछ भी महसूस नहीं करना चाहते. उदाहरण के लिए यदि आप कभी अधिक कमाने के लिए प्रेरित हुए हैं. वह इसलिए कि आप कम पैसा कमा रहे थे. यह कमी आपके उन कामों में बाधा बन रही थी, जो आप करना चाहते थे. लगातार लंबे वक्त बगैर सकारात्मक प्रेरणा के रहने की अपनी चुनैतियां हैं, लेकिन यही हमें बदलाव के लिए उकसाती हैं और आगे बढ़ने में मदद करती हैं.

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4. जिम्मेदारी स्वीकार करना
हर कोई सकारात्मक, आशावादी दृष्टिकोण रखने वाले इंसान के साथ काम करना पसंद करता है, लेकिन बेहद सकारात्मक होना भी नुकसान पहुंचा सकता है. सकारात्मकता का ये जोश जवाबदेही और जिम्मेदारी से भागने की वजह भी बन सकता हैं. (Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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