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ब्रेन को हेल्दी रखने के साथ खून को साफ करती है गाजर, विटामिन से भरपूर इस सब्जी का है दिलचस्प इतिहास

कई बीमारियों में बेहद फायदेमंद होती है गाजर. Image - Canva

कई बीमारियों में बेहद फायदेमंद होती है गाजर. Image - Canva

गाजर एक गुणकारी सब्जी है जिसका उपयोग कई तरह से किया जा सकता है. कहा जाता है कि गाजर का शुरुआती रंग नारंगी नहीं था. गाजर गुणों से भरपूर होती है और खून को शुद्ध रखने के साथ दिमाग के लिए भी लाभकारी होती है. आइए जानते हैं गाजर का इतिहास.

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गाजर एक ऐसी सब्जी है जिसे कच्चा तो खाया ही जा सकता है, साथ ही सब्जी बनाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है. इसलिए गाजर गुण में दोगुना है. इसका सेवन दिमाग को दुरुस्त रखता है तो यह खून को साफ करने में भी मदद करती है. विटामिन ए भरपूर होने के कारण गाजर आंखों के लिए भी हितकारी है. आयुर्वेद में भी इसे शरीर के लिए गुणकारी माना है. इस जानदार सब्जी का इतिहास शानदार है.

गाजर का हजारों साल पुराना इतिहास

गाजर का इतिहास जंगली रहा है. हजारों साल पूर्व गाजर का रंग नारंगी नहीं था. तब इसका रंग पीला, बैंगनी या सफेद हुआ करता था. जब यह नारंगी हुई तो इसमें गुण भी बढ़े और इसकी खेती का प्रचलन भी तेजी से बढ़ा. गाजर की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग विचारधाराएं हैं. एक का स्पष्ट कहना है कि गाजर का उत्पत्ति केंद्र सेंट्रल एशियाटिक सेंटर है, जिसमें उत्तर पश्चिमी भारत के अलावा ईरान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान आते हैं. भारत के वनस्पति विज्ञानी तो यह भी कहते हैं कि गाजर की मूल उत्पत्ति स्थल पंजाब व कश्मीर की पहाड़ियां हैं. जहां के कुछ इलाकों में आज भी इसकी जंगली नस्लें उगाई जाती हैं.

दवा के तौर पर इस्तेमाल होती थी गाजर

एक विचारधारा यह कहती है कि इसका दूसरा उत्पत्ति केंद्र भूमध्य सागरीय क्षेत्र के आसपास हो सकता है, जिसमें उत्तरी अफ्रीका व यूरोप भी शामिल है. कहा यह भी जा रहा है कि एशिया क्षेत्र में गाजर का प्रयोग 1000 ईसा पूर्व होने लगा था, लेकिन तब वह जंगली रूप में थी और दवा के रूप में इसका प्रयोग होता था, जब इसका रंग नारंगी नहीं था. सालों तक यह इसी रूप में उपयोग में लाई जाती रही और बाद में 10वीं शताब्दी में इसका रंग नारंगी हुआ और इसे खाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा. गाजर की कहानी के अनुसार आठवीं शताब्दी में यह स्पेन पहुंची.

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एक मत ये भी है कि गाजर की मूल उत्पत्ति स्थल पंजाब व कश्मीर की पहाड़ियां हैं. (Image-Canva)

अफगानों ने 10वीं शताब्दी में पहली आधुनिक गाजर उगाई. उसके बाद 14वीं शताब्दी में चीनियों ने गाजर उगाना शुरू किया. यूरोपीय लोग 17वीं शताब्दी में गाजर को अपने साथ अमेरिका ले आए और 18वीं शताब्दी में जापान में भी गाजर उगने लगी.

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आयुर्वेदिक ग्रंथों में है जानकारी

भारत में गाजर का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में गाजर (गृजंनक) के गुणों को पारिभाषित किया गया है. कहा गया है कि यह वात व कफ का शमन करती है, लेकिन जिन्हें पित्त रोग है, उसे इसका सेवन नहीं करना चाहिए. ग्रंथ में इसे तीक्ष्ण और पसीना लाने वाली भी बताया गया है, इसका अर्थ यह है कि यह जानकारी जंगली गाजर के बारे में दी जा रही है. जैसे संहिता से जुड़े अनेक ग्रंथ हैं, ऐसे ही प्राचीन भारत में वनस्पतियों व पादकों की जानकारी देने के लिए करीब 20 निघंटु लिखे गए हैं, इनमें से एक राज निघंटु में गाजर को मधुर, रुचि बढ़ाने वाली, पेट फूलने या एसिडिटी दूर करने वाली, कृमि निकालने में, जलन-दर्द से पित्त और प्यास से राहत दिलाने वाली कहा गया है.

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प्राचीन भारत में वनस्पतियों व पादकों की जानकारी देने के लिए करीब 20 निघंटु लिखे गए हैं. (Image-Canva)

कई बीमारियों में राहत देती है गाजर

आधुनिक रिसर्च के अनुसार गाजर के पोषक तत्वों में आयरन, सोडियम, कॉपर के अलावा बीटा-कैरोटीन व विटामिन ए व सी भी मौजूद है. इसके अलावा 100 ग्राम गाजर में 0.2% वसा, 86% नमी, 0.9% प्रोटीन, 1.1 मिनरल्स और 47 कैलोरी पाई जाती है. इन्हीं गुणों के चलते गाजर दिमाग को दुरुस्त रखती है, खून को साफ करती है और आंखों की रोशनी को बरकरार रखती है.

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गाजर रक्त में पित्त व वात को कम करती है, ये पाइल्स, दस्त और कफ में भी राहत दिलाती है. (Image-Canva)

आयुर्वेदाचार्य व योग गुरु आचार्य श्री बालकृष्ण के अनुसार आयुर्वेद में गाजर को कई बीमारियों के लिए इलाज के तौर पर प्रयोग किया जाता है. क्योंकि गाजर में फैट न के बराबर होता है लेकिन पौष्टिकता भरपूर मात्रा में होती है, जिससे आधासीसी, कान का दर्द, मुंह में बदबू, पेट दर्द जैसी बीमारियों में लाभ मिलता है. गाजर रक्त में पित्त व वात को कम करती है, साथ ही पाइल्स, दस्त और कफ में भी राहत दिलाती है.

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ज्यादा खाने से पेट में हो सकती है जलन

आहार विशेषज्ञ व योगाचार्य रमा गुप्ता के अनुसार गाजर का रस पीने से रक्तविकार, गांठ, सूजन और स्किन के रोगों में लाभ मिलता है. गाजर को खूब चबा-चबाकर खाया जाए तो दांत व मसूड़े स्वस्थ व चमकीले हो जाते हैं. गाजर को कद्दूकस करके उसमें सेंधा नमक मिलाकर खाया जाए तो खाज-खुजली से राहत मिलती है. इसके रस में नमक, धनिया पत्ती, भूना व पिसा जीरा, काली मिर्च, नीबू का रस डालकर पीने से पाचन सिस्टम फिट रहता है. गर्मी में गाजर का मुरब्बा दिमाग के लिए लाभकारी होता है.
ज्यादा गाजर खाना नुकसानदेह हो सकता है. इसके अंदर का पीला भाग गरम होता है, जो पेट में जलन का कारण बन सकता है. इसमें फाइबर अधिक होता है, इसलिए ज्यादा सेवन से पेट दर्द की समस्या हो सकती है. ज्यादा गाजर खाने से नींद न आने की समस्या हो सकती है. ज्यादा गाजर का सेवन स्किन को शिथिल कर सकता है.

Tags: Food, Lifestyle

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