Lunar Eclipse 2019: चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले लगेगा सूतक, सूतक काल में बंद रहेंगे चारों धाम और शुभ काम

Lunar Eclipse 2019, चंद्र ग्रहण 2019: हिंदू धर्म में सूतक काल में सारे शुभ कामों की मनाही है. यही वजह है कि इस दौरान चारों धाम के कपाट बंद रहेंगे.

News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 3:33 PM IST
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Lunar Eclipse 2019, चंद्र ग्रहण 2019: आज 16 जुलाई मंगलवार रात 1 बजकर 31 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी, लेकिन इससे पहले सूतक लगेगा. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. सूतक की अवधि 16 जुलाई दोपहर 4 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 17 जुलाई सुबह 4:40 मिनट तक है. चूंकि इस बार चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है इसलिए सारे धार्मिक कर्मकांड और पूजा पाठ सूतक काल से पहले ही कर लेना उचित होगा. आइए जानते हैं इसके बारे में.

चंद्रग्रहण का समय:
हिंदू धर्म के पंडितों और विद्वानों के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल की गुरु पूर्णिमा पर 16 जुलाई को चंदग्रहण 1:32 मिनट पर शुरु होकर अलगे दिन सुबह 4:30 तक रहेगा. ग्रहण काल 2 घंटे 58 मिनट का होगा. हिंदू धर्म में सूतक काल में सारे शुभ कामों की मनाही है. यही वजह है कि इस दौरान चारों धाम के कपाट बंद रहेंगे. इस दौरान भगवान की आराधना करना भी शुभ नहीं माना जाता है. सूतक खत्म होने पर चारों धामों और मंदिरों के पुजारी पवित्र गंगाजल से मंदिर का पवित्रीकरण करेंगे इसके बाद ही मंदिर में पूजा पाठ शुरू होगा और मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे.

चंद्र ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि जब क्षीर सागर के मंथन के बाद भगवान विष्णु मोहिनी रूप में देवताओं को अमृत पिला रहे थे तो उस समय असुर राहु देवताओं का रूप लेकर बीच में आ गया और उसने धोखे से अमृत का पान कर लिया. राहु के इस कर्म को चंद्रमा और सूर्य ने देख लिया और उन्होंने इस बारे में भगवान विष्णु को बता दिया. राहु के इस छल से क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट डाला. राहु ने अमृत का पान किया हुआ था जिस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई. गर्दन कटने के बाद असुर का ऊपरी हिस्सा राहु हो गया और बाकी शरीर केतु हो गया.

ब्रह्मा ने राहु-केतु को ग्रह बना दिया और इस घटना के बाद दोनों सूर्य और चंद्रमा के दुश्मन हो जाते हैं. इसी कारण से वो सूर्य और चंद्रमा को केतु-राहु के रूप में ग्रसते हैं, जिसे ग्रहण कहा जाता है. इसी के साथ ऋग्वेद के अनुसार माना जाता है कि अनसूया पुत्र राहु जब सूर्य और चंद्रमा पर तम से प्रहार कर देता है तो इतना अंधेरा हो जाता है कि धरती पर रौशनी नहीं आ पाती है. ग्रह बनने के बाद राहु-केतु दुश्मनी के भाव से पूर्णिमा को चंद्रमा और अमावस्या को सूर्य पर प्रहार करता है, इसे ग्रहण या राहु पराग कहा जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: July 16, 2019, 8:49 AM IST
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