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चाइल्ड अब्यूज़: कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा शोषण का शिकार! एक्सपर्ट से समझिए

चाइल्ड अब्यूज़: कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा शोषण का शिकार! एक्सपर्ट से समझिए

बच्चा और बच्ची, दोनों के साथ, शोषण की घटनाएं सामने आती हैं.

बच्चा और बच्ची, दोनों के साथ, शोषण की घटनाएं सामने आती हैं.

Teach your child good touch bad touch: माता-पिता पहले खुद समझें कि चाइल्ड अब्यूज़ क्या है. यह सामान्य चुहल या फिर हंसी-ठठ्ठा भर नहीं है. हम जाने-अनजाने में इसे हल्के में ले लेते हैं जबकि किसी भी प्रकार का शोषण बच्चों के शारीरिक-मानसिक-भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर बुरी तरह से असर डालता है. काउंसलर और ट्रेनर उत्तम शर्मा ने बताया कि कैसे इसकी पहचान की जा सकती है और इसे रोका जा सकता है.

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Child abuse and parenting guidance: मां-बाप के लिए अपने बच्चे से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती. बच्चों की परवरिश में मां-पिता अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ते. बावजूद इसके, बचपन में कई बार ऐसी घटनाओं का सामना बच्चों को करना पड़ जाता है जो उनके लिए आजीवन तकलीफ का सबब बन जाती हैं. कोमल बाल मन पर पड़े प्रभाव सालोंसाल सालते हैं. मासूम बच्चे प्रताड़ना के दौरान न तो पहचान कर पाते हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है और न ही वे किसी से कुछ कह पाते हैं. ऐसे में सबसे पहले तो मां-बाप को यह समझना होगा कि हर कोई आपके बच्चे के साथ केवल स्नेह का रिश्ता ही नहीं बना रहा है. थोड़ा संदेह करना, अलर्ट रहना बुरा नहीं है. यदि ऐसा करने से किसी अनहोनी को होने से रोका जा सके तो यह ‘शक की निगाह’ जरूरी है. जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline) 1098 की भी मदद ली जा सकती है.

आज हम चाइल्ड अब्यूज़ यानी बाल शोषण के इर्द-गिर्द इस मसले पर लंबे समय से कार्यरत एक्सपर्ट से जरूरी जानकारी लेकर आए हैं. माता-पिता पहले खुद समझें कि चाइल्ड अब्यूज़ क्या है. यह सामान्य चुहल या फिर हंसी-ठठ्ठा भर नहीं है. हम जाने-अनजाने में इसे हल्के में ले लेते हैं जबकि किसी भी प्रकार का शोषण बच्चों के शारीरिक-मानसिक-भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर बुरी तरह से असर डालता है. काउंसलर और ट्रेनर उत्तम शर्मा ने बताया कि कैसे इसकी पहचान की जा सकती है और इसे रोका जा सकता है. साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि यह कितनी तरह का होता है और इसमें किस प्रकार का व्यवहार शामिल है.

क्या होता है चाइल्ड अब्यूज (What is Child Abuse)
किसी व्यक्ति (Adult) द्वारा बच्चे के साथ शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार (Physical or Mental Abuse of Child) बाल शोषण है. उत्तम शर्मा बताते हैं कि ऐसा कोई भी बर्ताव जो बच्चे के मानसिक या शारीरिक विकास/स्वास्थ्य को किसी न किसी रूप में नकारात्मक रूप से भी प्रभावित करता है, वह इस श्रेणी में आएगा. यह शारीरिक प्रताड़ना जैसे कि मारना- पीटना, काटना, जलाना भी हो सकती है और यौन प्रताड़ना भी हो सकती है. यौन प्रताड़ना में बच्चे के साथ किसी व्यक्ति का सेक्सुअल ऐक्ट करना आता है. यौन भावना के साथ बच्चे को यहां वहां छूना, दबाना, या उसके यौनांगो समेत किसी अन्य हिस्से छेड़छाड़ भी इसमें शामिल हैं. इसमें बच्चे के जनांगों में कुछ डालना या ऐसी कोशिश करना भी शामिल है. गौरतलब है कि चाइल्ड अब्यूज़ एक कानून सम्मत अपराध है.

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बच्चे की बुरी तरह से उपेक्षा करना (Negligence of Child)
भारतीय समाज में उपेक्षा करने और उपेक्षित होने को बहुत अधिक गंभीरता से लिया ही नहीं जाता है. यही वजह है कि कब यह सामान्य सी लगने वाली उपेक्षा एक बड़े जलजले में तब्दील हो जाती है और एक इंसान के संपूर्ण व्यक्ति को तोड़ मरोड़ने लगती है, पता ही नहीं चलता. उत्तम शर्मा बताते हैं कि बच्चे की उपेक्षा भी एक प्रकार का चाइल्ड अब्यूज है जो उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है. उपेक्षा का मतलब, बच्चे का बहुत कम ध्यान देना या फिर बिलकुल ध्यान न देना, उसकी अलग-अलग प्रकार की जरूरतों को इग्नोर करना या उसका ख्याल न रखना इसमें शामिल हैं.

बच्चे का भावनात्मक शोषण (Emotional Abuse of Child)
कई बार जिसे हम हंसी-मजाक या बच्चों का खेल समझ रहे होते हैं, वह असल में बच्चे का भावनात्मक शोषण होता है. बच्चे का भावनात्मक शोषण स्कूल, घर कहीं भी हो सकता है. जैसे कई बार उसे यह बार-बार कहते रहना कि तू कुछ नहीं कर सकता/सकती है, तुझे कुछ नहीं आता है. इस ट्रॉमा का असर बच्चे पर बहुत गहरा पड़ता है. हमेशा के लिए एक डर मन में बैठ जाता है. काउंसलर उत्तम शर्मा बताते हैं कि कई बार यह असर इतना ज्यादा गहरा होता है कि वह खुद भी बड़ा होकर अपने से छोटे के साथ भी यही व्यवहार करने लगता है.

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पहचानें कि बच्चा अब्यूज़ का शिकार हो रहा है… (Recognize child abuse)
बच्चा और बच्ची, दोनों के साथ, शोषण की घटनाएं सामने आती हैं. दोनों ही जेंडर के बच्चे अपने आप से इसे अक्सर सामने नहीं ला पाते हैं. समाज में लड़कों को कहा जाता है कि तुम तो लड़के हो तुम्हें कौन छे़ड सकता या फिर लड़के रोते नहीं, जैसे स्टीरियोटाइप बातों के कारण बच्चा कभी यह नहीं बता पाता कि उसके साथ क्या घटित हो रहा है.

काउंसलर शर्मा बताते हैं, शोषण अनजान लोगों द्वारा ही किया जाता हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अड़ोस-पड़ोस से लेकर कई बार रिश्तेदार, ट्यूशन सेंटर, बस, दुकान, स्कूल या कहीं पर भी उसके साथ ऐसी घटनाएं हो सकती हैं. यह भी कोई जरूरी नहीं कि गरीब परिवारों में ही ऐसी घटनाएं होती हैं. अमीर और पढ़े-लिखे परिवारों में भी बच्चा शोषण का शिकार हो रहा होता है. कई बार शोषक जानकार ही निकलता है. ऐसे में वक्त रहते माता-पिता थोड़ा सतर्कता बरतें तो पहचान जल्दी की जा सकती है और समय रहते बच्चे को इससे बाहर निकाला जा सकता है.

बच्चे को ऐसे समझाएं जरूरी बातें.. (Train your child)
3-4 साल के बच्चे को नहलाते समय उन्हें अपने बॉडी पार्ट्स के बारे में समझाएं. उन्हें यह बताएं कि इन पार्ट्स को मां के अलावा कोई और टच करे तो घर में आकर मां को बताएं. उसे गुड टच और बैड टच (Good touch, Bad touch) के बीच का फर्क समझाएं. घर में मां या पिता नहीं हैं तो बड़ी बहन, भाई या दादा-दादी को बताएं. कोई स्कूल में बार-बार छेड़ रहा हो या फिर बार-बार चिल्लाकर बात कर रहा हो तो घर में आकर मां और पिता को बताएं. यदि बच्चा पिता के साथ शेयर न कर पा रहा हो तो मां को बताए, ऐसा प्रोत्साहन दें. बेहतर तो यह होगा कि पिता भी बच्चे के साथ वह रिश्ता डेवलप करे कि वह उनसे शेयर कर सके, यदि बाहर कहीं बच्चे को कोई शख्स छेड़ रहा है, छू रहा है या ऐसा कुछ बोल रहा है जिससे बच्चे को तकलीफ हो रही है तो ये बात बच्चा घर में आकर बात करे.

यह जरूरी है कि पैरेंट्स खुद को जागरूक करें, ताकि वे बच्चे के व्यवहार में आ रहे बदलावों को भी देख सकें. कहीं बच्चा उदास तो नहीं रहने लगा, यह भी गौर करें. उसके शरीर पर कोई चोट आदि तो नहीं है. जरूरत पड़ने पर काउंसलर, पुलिस या संबंधित अधिकारियों की मदद लें.

Tags: Child Care, Child sexual abuse, Lifestyle, Parenting tips

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