Virtual Life Side Effects: ऑनलाइन एजुकेशन से कपल्‍स में तनाव, बच्चे भी परेशान

ऑनलाइन एजुकेशन के साइड इफेक्ट : वर्चुअल दुनिया में खो रहे बच्‍चे, कपल्‍स में बढ़ रहा तनाव

ऑनलाइन एजुकेशन के साइड इफेक्ट : वर्चुअल दुनिया में खो रहे बच्‍चे, कपल्‍स में बढ़ रहा तनाव

लंबे समय तक इसी तरह वर्चुअल दुनिया (Virtual world) का हिस्‍सा हो जाने के बाद अब बच्‍चों को अपनी रीयल लाइफ ये ही लगने लगी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 12:18 PM IST
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कोविड (Covid 19) पेंडेमिक के बाद से ऑनलाइन एजुकेशन (Online education) का ट्रेंड बढ़ा है. बड़े तो बड़े, स्‍कूल के बच्‍चों के लिए भी अब मोबाइल और लैपटॉप मजबूरी बन गई है. स्‍कूलों का संचालन पूरी तरह से वर्चुअल हो चुका है. बच्‍चे अब स्‍कूल के क्‍लास रूम की जगह मोबाइल पर ही साइंस, मैथ से लेकर एक्‍ट्रा करिकुलर एक्‍टीविटी भी कर रहे हैं. यह हाल पिछले एक साल से चल रहा है. लंबे समय तक इसी तरह वर्चुअल दुनिया (Virtual world) का हिस्‍सा हो जाने के बाद अब बच्‍चों को  अपनी रियल लाइफ ये ही लगने लगी है.

मुश्किल की बात यह है कि पेरेंट्स इसमें कुछ भी नहीं कर सकते. ऐसे में परिवार एक अलग ही परिस्थितियों से गुजर रहा है. घर घर में ऐसी ही समस्‍या देखने को मिल रही है. ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता-प्रभाव पर एक 100 दिन का एक शोध किया गया जिसमें कई चौंकाने वाले फीडबैक मिले.

दरअसल, शुरू में तो ऑनलाइन क्‍लास को बहुत ही सराहा गया. लेकिन धीरे धीरे इसके कई बुरे प्रभाव सामने आने लगे. मार्च से पहले जो पैरेंट्स बच्चों को मोबाइल देने तक से मना करते थे, उन्हें मजबूरी में बच्चों को मोबाइल देना पड़ा. यहीं से परेशानी शुरू हुई.

ऑनलाइन क्लासेस से नुकसान की बात की जाए तो बच्चों को क्लास जैसा वातावरण यहां नहीं मिल पा रहा है.जो विषय उनकी पहली पसंद होती थी अब समझ नहीं आ पाने की वजह से वह उन विषयों से भागने लगे है.
ऑनलाइन क्लासेस में टीचर्स के साथ बेहतर इंटरेक्ट का अभाव है, ऐसे में टीचर के लिए भी इस नई तकनीक के माध्‍यम से पढ़ाना आसान नहीं है. टीचर और स्‍टूडेंट के बीच अच्‍छी अंडरस्‍टैंडिंग भी यहां नहीं बन पा रही,  जिससे बच्‍चों के लिए पढ़ाई दबाव बन गया है.

मोबाइल, लैपटॉप व टैबलेट का ज्यादा उपयोग बढ़ गया है जिससे स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर इसका असर पड़ने का खतरा है. बड़ों के साथ बच्‍चों को भी रात की नींद अच्‍छी नहीं आ रही और कई बच्‍चों में तो डिप्रेशन की समस्‍या भी दिखने को मिल रही है.

लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से कई बार मोबाइल गर्म हो जाते हैं और ऐसे में दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है. बच्‍चों और माता पिता के बीच कई बार इसको लेकर तनाव बन जा रहा है जो पति पत्‍नी के बीच झगड़े की वजह भी बन रही है और घर में एक नकारात्‍मक माहौल तैयार हो जा रहा है. (Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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