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गर्भावस्था में भी बच्चे को हो सकता है पार्किंसन का खतराः रिसर्च

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 12:04 PM IST
गर्भावस्था में भी बच्चे को हो सकता है पार्किंसन का खतराः रिसर्च
21 से 50 वर्ष के बीच लगभग 10 फीसदी लोगों में ही इस बीमारी का पता चल पाता है.

पार्किंसन दिमाग से जुड़ी बीमारी है, जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों की गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ता है. यह समस्या तब होती है जब मस्तिष्क की तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त या मृत पड़ जाती हैं.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 12:04 PM IST
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एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि जिन लोगों को 50 वर्ष की उम्र से पहले पार्किंसन की समस्या होती है, उसकी मस्तिष्क की तंत्रिकाएं जन्म के पहले से ही विकृत हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने कहा कि बच्चे के जन्म से पहले ही उसके मस्तिष्क की तंत्रिकाएं कमजोर होने के चलते इस रोग के विकसित होने की संभावना अधिक रहती है.

शोध के मुताबिक, पार्किंसन दिमाग से जुड़ी बीमारी है, जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों की गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ता है. यह समस्या तब होती है जब मस्तिष्क की तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त या मृत पड़ जाती हैं. दिमाग की तंत्रिकाओं के क्षतिग्रस्त या मृत हो जाने से डोपामाइन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है.

इस बीमारी की पहचान अधिकतर 60 या इससे अधिक उम्र में होती है.
इस बीमारी की पहचान अधिकतर 60 या इससे अधिक उम्र में होती है.


इस उम्र में होती है पार्किंसन की पहचान

इस रोग में कोई भी गतिविधि करने में परेशानी होना, मांसपेशियों का कठोर होना, कंपकंपी होना और संतुलन बनाने में मुश्किल होना जैसे लक्षण समय के साथ और बिगड़ते जाते हैं. शोधकर्ताओं ने कहा, हालांकि इस बीमारी की पहचान अधिकतर 60 या इससे अधिक उम्र में होती है. 21 से 50 वर्ष के बीच लगभग 10 फीसदी लोगों में ही इस बीमारी का पता चल पाता है.

 

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पार्किंसन में लार का अधिक आने जैसी समस्या हो सकती है.
पार्किंसन में लार का अधिक आने जैसी समस्या हो सकती है.


पार्किंसन के लक्षणों को पहचानें

- रास्ते में चलते हुए शरीर को अचानक झटका लग सकता है, जिससे आप गिर सकते हैं.

- अचानक से आवाज का धीमा हो जाना, कंपकंपाना, हकलाने जैसी समस्या होना.

- पेशाब या मल त्याग करने में रूकावट पैदा होना.

 

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- मुंह में ज्यादा मात्रा में पानी आना, लार का अधिक आना जैसी समस्या होना.

- पसीना का ज्यादा आना या रात में सोते वक्त पसीना.

अगर, आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कुछ भी महसूस होता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

पार्किंसन की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान को खाने पीने पर संयम बरतना जरूरी होता है.
पार्किंसन की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान को खाने पीने पर संयम बरतना जरूरी होता है.


इन चीजों का सेवन करने से बचें
पार्किंसन की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान को खाने पीने पर संयम बरतना जरूरी होता है. पार्किसन की समस्या होने पर इन चीजों का सेवन करने से बचें.

- खमीर युक्त भोजन
- सूखी या पैकेट फिश या मीट प्रोडक्ट्स
- रात का रखा हुआ या कई दिनों तक स्टोर किया हुआ खाना
- सोया उत्पादित खाद्य पदार्थ जैसे टोफू, सोया सॉस

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First published: February 2, 2020, 11:52 AM IST
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