ऑनलाइन क्लास बच्चों को मानसिक रूप से बना रही बीमार, रखें इन बातों का ध्यान

ऑनलाइन क्लास बच्चों को मानसिक रूप से बना रही बीमार, रखें इन बातों का ध्यान
कोरोना वायरस के दौर में ऑनलाइन क्लास से बच्चों को मानसिक बीमारी का खतरा है.

लॉकडाउन (Lockdown) में पढ़ाई (Study) के लिए या मनोरंजन (Entertainment) के लिए बच्चे दिन भर गैजेट्स (Gadgets) का उपयोग करते हैं. ऐसे में बहुत सारे बच्चों (Children) में स्‍क्रीन एडिक्‍शन से भाषा और बोलने की प्रक्रिया का विकास बाधित हो सकता है. बच्चों को स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

  • Last Updated: August 18, 2020, 6:09 PM IST
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लॉकडाउन (Lockdown) के चलते एक तरफ जहां बच्चों को स्कूल (School) से छुटकारा मिल गया है, वहीं दूसरी ओर कई बच्चों को गैजेट्स (Gadgets) की लत लग गई है. साथ ही ऑनलाइन क्लास के कारण भी कई बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा रहा है. हाल ही में बच्चों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ (UNICEF) ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है. यूनिसेफ ने कहा कि बच्चे जब भी गैजेट्स का इस्तेमाल करें तो माता या पिता में से कोई उनके साथ रहे और उन्हें आधे घंटे से ज्यादा गैजेट्स का इस्तेमाल न करने दें. लॉकडाउन के दौरान यदि आपके बच्चे की भी ऑनलाइन क्लास चल रही है तो इन बातों विशेष सावधानी रखें...

बहुत ज्यादा पास से गैजेट्स का इस्तेमाल न करें
डिजिटल गैजेट्स का इस्‍तेमाल बच्‍चों में बढ़ गया है. इसके सबसे ज्यादा गंभीर परिणाम बच्चों की आंखों और दिमाग पर होता है. कई बच्चों में स्‍क्रीन एडिक्‍शन से भाषा और बोलने की प्रक्रिया का विकास बाधित हो सकता है. myUpchar के अनुसार, भारतीय बच्‍चों में स्‍मार्टफोन, टैबलेट, आईपैड और लैपटॉप की वजह से मानसिक विकास प्रभावित होता है. बहुत पास से स्क्रीन का इस्तेमाल न करने दें क्योंकि बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं.

ऑनलाइन क्लास के बाद कराएं कुछ क्रिएटिव वर्क
जो बच्चे डिजिटल स्क्रीन के साथ अधिक वक्त गुजारते हैं, उनकी क्रिएटिविटी कम हो जाती है. यह उनके मानसिक विकास के लिए बेहतर नहीं है. ऐसे में यदि बच्चा रोज ऑनलाइन क्लास ले रहा है तो उसके साथ कुछ शारीरिक खेल और बगैर गजैट्स वाले क्रिएटिव गेम या होम वर्क भी जरूर करवाना चाहिए ताकि दिमागी कसरत भी होती रहे.



बच्चों को डिजिटल उपकरणों के बुरे प्रभाव समझाएं
myUpchar के अनुसार, आमतौर पर बच्चों में डिजिटल गैजेट्स के प्रति बहुत ज्यादा आकर्षण होता है और कुछ बच्चे इनके प्रति बहुत ज्यादा जिद भी करते हैं. ऐसे बच्चों को इनका नकारात्मक प्रभाव समझाना चाहिए, लेकिन इस बात का जरूर ध्यान रखें कि बच्चे को डांटे या मारे बिल्कुल नहीं. अन्यथा इसका भी उसके व्यवहार पर बुरा असर होगा. बच्चे को प्यार से समझाएंगे तो जल्दी आपकी बात मानेगा और सुधार भी होगा.

बच्चे के पर्याप्त आराम का भी रखें ध्यान
महामारी की वजह से ऑनलाइन क्लास चल रही है. यदि बच्चा ज्यादा समय तक स्क्रीन से सामने बैठा है तो उसके सोने के टाइम का भी पर्याप्त ध्यान रखें. बच्चों के कंधों, पीठ और आंखों में दर्द होने लगा है तो पीठ व कंधों पर तेल लगाकर मालिश भी की जा सकती है. कम्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर ब्लू स्क्रीन लगाएं.

बच्चा ऑनलाइन क्लास के दौरान जिस गैजेट्स का इस्तेमाल कर रहा है, उस पर आंखों की सुरक्षा के लिए एंटी लेयर आई गार्ड जरूर लगाएं या बच्चों के लिए ब्लू रे वाला चश्मा भी लिया जा सकता है. इससे बच्चों की आंखों पर हानिकारक किरणों का प्रभाव कम हो जाता है. बच्चे को स्क्रीन के सामने से हर 10 से 15 मिनट से लिए दूर भी कर देना चाहिए. ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चे के साथ माता या पिता में से किसी का साथ बैठना फायदेमंद साबित होता है. इससे बच्चे को गैजेट्स के फंक्शन समझने में भी आसानी होती है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ऑनलाइन पढ़ाई का बच्चों की मानसिक ही नहीं, शारीरिक सेहत पर भी पड़ रहा गंभीर असर, जानें पढ़ें।

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