Children's Day: क्यों मनाया जाता है बाल दिवस, क्या है इसका इतिहास और महत्व

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में जाना जाता है.
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में जाना जाता है.

बाल दिवस (Children's Day) के माध्यम से बच्चों को जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए उन्हें जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 14, 2020, 10:49 AM IST
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भारत में हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस (Children's Day 2020) मनाया जाता है. भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु (Pandit Jawaharlal Nehru) के जन्मदिन (Birthday) को बाल दिवस के रूप में जाना जाता है. 1889 में 14 नवंबर के दिन जवाहर लाल नेहरु का जन्म इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था. बच्चों से पंडित नेहरु का खास लगाव था और बच्चे भी प्यार से उन्हें चाचा नेहरु कहकर बुलाते थे. यही वजह है कि इस दिन को बच्चों को समर्पित करते हुए बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

बाल दिवस का इतिहास
अलग-अलग देशों में बाल दिवस मनाने की तारीख अलग है. यूनाइटेड नेशंस ने 1954 को बाल दिवस स्थापित किया और हर साल इसे 20 नवंबर को मनाने की घोषणा की थी. भारत में 1964 में पंडित जवाहर लाल नेहरु के निधन के बाद से 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाने लगा. सभी की सहमति से यह निर्णय लिया गया. बच्चों के प्रति पंडित नेहरु के स्नेह को देखते हुए उनके जन्मदिन को बाल दिवस घोषित कर दिया गया. आजादी के बाद पंडित नेहरु की प्राथमिकता बच्चों की शिक्षा रही और बच्चों के लिए बेहतर काम करना उनका एजेंडा हमेशा से रहा. बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरु कहकर बुलाते थे. आज भी बाल दिवस पर नेहरु को चाचा नेहरु ही कहते हैं.

बाल दिवस का महत्व
यह दिन पूरी तरह से बच्चों के लिए होता है. हालांकि अभी कोरोना के समय स्कूल बंद हैं, अन्यथा सामान्य परिस्थितियों में बाल दिवस स्कूलों में मनाया जाता है. स्कूलों में क्विज, भाषण, गायन, वाद-विवाद सहित कई प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है और पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किए जाते हैं. हर देश का भविष्य उनके बच्चों पर निर्भर करता है. अगर बच्चों को सही राह नहीं दिखाई जाएगी, तो उस देश का भविष्य भी अंधकार में चला जाएगा. बाल दिवस के माध्यम से बच्चों को जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए उन्हें जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है. अभिभावक और शिक्षक भी बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन का मूल्यांकन करेंगे और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. बाल दिवस पर इन सब बातों पर मंथन होता है और बच्चों को आगे आने का एक मंच भी मिलता है.
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