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जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही है विषाक्तता, फूड चेन पर भी पड़ रहा है असर-रिसर्च

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही है विषाक्तता, फूड चेन पर भी पड़ रहा है असर-रिसर्च

तापमान और घुलशीलता बढ़ने से पानी के गर्म व बदले रंग की स्थिति में फूड चेन बेस लेवल पर पानी से मिथाइल मरकरी का ट्रांसफर ज्यादा होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

तापमान और घुलशीलता बढ़ने से पानी के गर्म व बदले रंग की स्थिति में फूड चेन बेस लेवल पर पानी से मिथाइल मरकरी का ट्रांसफर ज्यादा होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Climate change will reduce nutrition : स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस (Swedish University of Agricultural Sciences) और डार्टमाउथ कालेज (Dartmouth College) के रिसर्चर्स ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज का असर जल तंत्र यानी वाटर सिस्टम (water system) पर भी हो रहा है और इससे फूड चेन यानी खाद्य श्रृंखला (food chain) में पोषण का स्तर (Nutritional level) कम हो रहा है. दूसरी ओर, इससे विषाक्तता यानी पॉइजनिंग (poisoning) बढ़ती जा रही है. इस स्टडी के नतीजों को साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल (Scientific Reports Journal) में प्रकाशित किया गया है. इस रिसर्च में पानी का तापमान बढ़ने (वॉर्मिंग) और इस कारण कार्बनिक तत्वों की घुलनशीलता बढ़ने से उसका रंग बदलने (ब्राउनिंग) के असर का अध्ययन किया गया है.

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    Climate change will reduce Nutrition : जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के साइडइफैक्ट्स दिनों-दिनों लाइफ को मुश्किल करते जा रहे है. इसे कंट्रोल रखने के तमाम दावे बौने साबित हो रहे हैं. दूसरी ओर, दुनियाभर में इस मसले पर हो रही रिसर्च के नतीजे चिंता बढ़ाने वाले हैं. इसी फेहरिस्त में स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस (Swedish University of Agricultural Sciences) और डार्टमाउथ कालेज (Dartmouth College) के रिसर्चर्स ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज का असर जल तंत्र यानी वाटर सिस्टम (water system) पर भी हो रहा है और इससे फूड चेन यानी खाद्य श्रृंखला (food chain) में पोषण का स्तर (Nutritional level) कम हो रहा है. दूसरी ओर, इससे विषाक्तता यानी पॉइजनिंग (poisoning) बढ़ती जा रही है.  इस स्टडी के नतीजों को साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल (Scientific Reports Journal) में प्रकाशित किया गया है. दैनिक जागरण अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च में पानी का तापमान बढ़ने (वॉर्मिंग) और इस कारण कार्बनिक तत्वों की घुलनशीलता बढ़ने से उसका रंग बदलने (ब्राउनिंग) के असर का अध्ययन किया गया है.

    डार्कमाउथ कालेज की रिसर्चर और इस स्टडी की मुख्य लेखक पियानपियन वू (Pianpien wu) ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ने और जमीन से पानी में कार्बनिक तत्वों (organic elements) की आपूर्ति पर असर होने की संभावना व्यक्त की गई है. लेकिन हमने पहली बार बढ़ते तापमान के कारण पानी के बदलते रंग के बारे में स्टडी की है.

    पोषक और विषाक्त तत्व पर असर का अध्ययन
    उन्होंने बताया कि इसके लिए मेसोकोस्म सिस्टम (mesocosm system) का प्रयोग किया गया है. यह एक प्रायोगिक प्रणाली है, जो नियंत्रित परिस्थितियों में प्राकृतिक वातावरण की जांच करती है. मेसोकोस्म सिस्टम फील्ड सर्वे और हाईली कंट्रोल लेबोरेट्री एक्सपेरिमेंट्स के बीच एक कड़ी प्रदान करता है. इसका इस्तेमाल क्लाइमेट चेंज के कारण पारिस्थितिकी तंत्र यानी ईकोसिस्टम (Ecosystem) पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने के लिए किया जाता है. क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ते तापमान की वजह से कार्बनिक तत्वों की अधिक घुलनशीलता (high solubility) का फूड चेन में पोषक तत्व पोलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (Nutrient Polyunsaturated Fatty Acids) और  विषाक्त तत्व मिथाइल मरकरी (toxic element methyl mercury) पर होने वाले असर का अध्ययन किया गया है.

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    प्रयोग का नतीजा
    रिसर्चर्स ने पाया कि तापमान और घुलशीलता बढ़ने से पानी के गर्म व बदले रंग की स्थिति में फूड चेन बेस लेवल पर पानी से मिथाइल मरकरी का ट्रांसफर ज्यादा होता है. इसके साथ ही फाइटोप्लैंकटॉन (phytoplankton) में आवश्यक पोषक तत्व पोलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की सांद्रता (concentration) कम होती है. फाइटोप्लैंकटॉन स्थलीय पौधे (terrestrial plants) की तरह होते हैं, जिसमें क्लोरोफिल (chlorophyll) होता है और उसे जीवित रहने के लिए सनलाइट की जरूरत होती है. पोलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की लंबी श्रृंखला ओमेगा-3 तथा ओमेगा-6 बनाते हैं, जो एनिमल और प्लांट्स में इम्यून सिस्सटम को कंट्रोल रखते हुए विकास और जीवन के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं. मिथाइल मरकरी- जीवित प्राणियों द्वारा आसानी से अवशोषित होने वाला न्यूरोटाक्सिन (तंत्रिकाओं के लिए जहर) है.

    पैदा हो रही चिंताजनक स्थिति
    पियानपियन वू (Pianpien wu)  ने कहा कि प्रयोग के दौरान पानी की गर्मी और रंग में बदलाव (ब्राउनिंग) के असर से पोलीअनसैचुरेटेड एसिड की मात्र में कमी होना काफी चिंताजनक है. फाइटोप्लैंकटॉन ((phytoplankton)) जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (aquatic ecosystem) में पोलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड का मुख्य स्नोत है.

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    स्टडी के मुताबिक, फाइटोप्लैंकटान के कम होने से मछली और अन्य वन्यजीव तथा मनुष्य के लिए मिथाइल मरकरी के उपभोग का खतरा बढ़ जाता है. स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के प्रोफेसर केविन बिशप (Kevin Bishop) के मुताबिक, इस स्टडी से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण फूड चेन बेस लेवल  (जलीय खाद्य) पर कमजोर होता है. रिसर्चर्स का दावा है कि चूंकि यह स्टडी मेसोकोस्म वातावरण (mesocosm atmosphere) में हुई है, इसलिए परिणामों पर भरोसा किया जा सकता है. स्टडी में 24 ऊष्मारोधी प्लास्टिक सिलेंडरों का प्रयोग किया गया, ताकि वॉर्मिग और ब्राउनिंग के विभिन्न लेवल के असर का आकलन किया जा सके.

    Tags: Climate Change, Health, Health News

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