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समय से पहले पैदा हो रहे प्री-मैच्योर बच्चे, वजह हैं गंभीर

News18Hindi
Updated: December 9, 2019, 8:08 AM IST
समय से पहले पैदा हो रहे प्री-मैच्योर बच्चे, वजह हैं गंभीर
समय से पहले पैदा हो रहे प्री-मैच्योर बच्चे, वजह हैं गंभीर

शोधकर्ता एलान बारेका ने कहा, जिस समय काल का हमने अध्ययन किया उसमें हमने 25,000 हजार समय पूर्व जन्म के मामले देखे.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 8:08 AM IST
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मौसम में अचानक होने वाले परिवर्तन की वजह से न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है बल्कि गर्भवती मां और पैदा होने वाले बच्चों पर ही इसका काफी असर पड़ रहा है. जलवायु में होने वाले इस बदलाव की वजह से गर्भवती महिलाएं समय से पहले ही बच्चे को जन्म दे रही हैं, जिससे नवजातों पर खतरा बढ़ रहा है. एक हालिया शोध में यह खुलासा किया गया है.

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बच्चों के जन्म और वातावरण के बारे में शोध कर रहे अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, जिस दिन तापमान 32 डिग्री से ज्यादा था उस दिन जन्मदर में पांच फीसदी का इजाफा देखा गया. कुछ बच्चे अपने समय से कई दिनों पहले पैदा हो गए थे. वहीं कुछ बच्चे समय से दो हफ्ते पहले ही पैदा हो गए. शोधकर्ताओं का मानना है कि गर्मी से गर्भवती महिला में हॉर्मोनल बदलाव हो जाते हैं, जिससे प्रसव जल्दी हो जाता है. समय से पूर्व जन्म होने से बच्चे कम वजन के होते हैं, उनका विकास धीमा होता है और उनमें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि दिनोंदिन मौसम के गर्म होने के कारण यह समस्या और बढ़ती ही जा रही है.

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जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी पर बढ़ रही गर्मी : लॉस एंजेलिस की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने अमेरिका में 1969 से 1988 के बीच पैदा हुए 5.6 करोड़ बच्चों के डाटा का विश्लेषण किया. उन्होंने देखा कि गर्म दिनों में जिस दिन तापमान 32 डिग्री से ज्यादा था जन्मदर बहुत बढ़ गई. कई महिलाओं के बच्चे समय से पहले ही पैदा हो गए. जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी पर गर्मी बढ़ती ही जा रही है.

शोधकर्ता एलान बारेका ने कहा, जिस समय काल का हमने अध्ययन किया उसमें हमने 25,000 हजार समय पूर्व जन्म के मामले देखे. औसतन गर्भावस्था छह दिन पहले ही खत्म हो गई, लेकिन कुछ मामलों में बच्चे दो हफ्ते ही पैदा हो गए. शोधकर्ताओं के अनुसार उस समय की तुलना में वर्तमान में गर्मी बहुत बढ़ गई है. ऐसे में समय पूर्व जन्म के मामले अब ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. किंग्स कॉलेज लंदन के प्रो. एंड्रूय शेनान ने कहा, इस शोध के निष्कर्ष वैध व स्पष्ट हैं. कई स्वास्थ्य की परिस्थितियों की तरह तापमान भी शरीर के प्राथमिक कार्यप्रणालियों जैसे रक्त प्रवाह और सांस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. गर्भवती महिलाओं को गर्म तापमान में पर्याप्त पानी पीना चाहिए और खुद को ठंडा रखने का प्रयास करना चाहिए.

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First published: December 9, 2019, 8:06 AM IST
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