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दिमाग के लिए घातक हो सकता है सोयाबीन के तेल का इस्तेमाल

भाषा
Updated: January 21, 2020, 10:06 AM IST
दिमाग के लिए घातक हो सकता है सोयाबीन के तेल का इस्तेमाल
दिमाग के लिए घातक हो सकता है सोयाबीन का तेल

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने बताया कि सोयाबीन के तेल का इस्तेमाल फास्ट फूड को पकाने में किया जाता है. इसे पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में डाला जाता है और दुनिया के कई हिस्सों में जानवरों को भी खिलाया जाता है.

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सोयाबीन तेल के सेवन से न सिर्फ मोटापा और डायबिटीज हो सकता है बल्कि इससे दिमाग में भी कई तरह के जेनेटिक बदलाव हो जाते हैं. चूहों पर किए गए एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है. शोधकर्ताओं के अनुसार सोयाबीन का तेल ऑटिज्म और अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों को भी प्रभावित करता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने बताया कि सोयाबीन के तेल का इस्तेमाल फास्ट फूड को पकाने में किया जाता है. इसे पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में डाला जाता है और दुनिया के कई हिस्सों में जानवरों को भी खिलाया जाता है.

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पत्रिका इंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित शोध में चूहों को तीन समूहों में बांटकर उन्हेंे तीन तरह के वसा युक्त आहार का सेवन कराया गया. एक समूह को सोयाबीन का तेल, दूसरे समूह को कम लिनोलेइक एसिड वाला सोयाबीन तेल और नारियल के तेल का सेवन कराया गया. सोयाबीन के तेल का सेवन करने से मोटापे, मधुमेह, इंसुलिन प्रतिरोध और फैटी लिवर की समस्या बढ़ती है.



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सभी सोया उत्पाद खराब नहीं होते:

शोधकर्ता फ्रांसिस स्लाडेक ने कहा कि अपना टोफू, सोयामिल्क या सोया सॉस न फेंके. कई सोया उत्पादों में बहुत कम मात्रा में सोयाबीन का तेल होता है. इन सोया उत्पादों के कई स्वास्थ्यकारी गुण हैं. इसमें कई जरूरी फैटी एसिड और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो लाभदायक भी है.

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First published: January 21, 2020, 8:07 AM IST
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