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भारतीयों के भोजन में रच-बस चुका है मक्का (भुट्टा), पॉपकॉर्न से लेकर बेबी कॉर्न तक, जानें इसके गुणों की कहानी

पूरे विश्व में उगाए जाने वाले अनाजों में सबसे अधिक खेती मक्का की होती है.

पूरे विश्व में उगाए जाने वाले अनाजों में सबसे अधिक खेती मक्का की होती है.

पूरे विश्व में उगाए जाने वाले अनाजों में सबसे अधिक खेती मक्का की होती है. वैसे पूरी दुनिया में जितना मक्का उगता है, उसका लगभग 20 प्रतिशत का ही खाने में उपयोग होता है, बाकी मक्का पोल्ट्री फीड, जानवरों का चारा, प्रसंस्कृत भोजन, उद्योगों के अलावा स्टार्च आदि बनाने के लिए इस्तेमाल होता है.

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मक्के की रोटी और सरसों दा साग, भई वाह क्या स्वाद! ये दोनों व्यंजन खाने में स्वादिष्ट भी हैं और पौष्टिक भी. मक्के के आटे की रोटी अधिकतर सर्दी में खाई जाती है, लेकिन मक्का (भुट्टा) तो कभी भी खाया जा सकता है. मक्के का आटा और भुट्टा हमारे जीवन में रच-बस चुका है और ऐसा लगता है कि यह हमारे देश की मिट्टी का ही है. लेकिन ऐसा नहीं है यह स्वादिष्ट मोटा अनाज विदेशी है और भारत में इसका प्रवेश कुछ सौ साल पहले ही हुआ है. वैसे अब विश्व में पैदा होने वाले अनाजों में मक्का सबसे अधिक उगाया जाता है. गुणों में तो यह भरपूर है ही.

आजकल तो भुट्टे की बहार है. जिस गली, मोड़, सड़क पर निकल जाओ, कोयले की आंच पर भुट्टा सिकता नजर आएगा. मसाला और नींबू रगड़कर जब इस सिके हुए भुट्टे को खाया जाता है तो खुशबू और स्वाद दिल-दिमाग में छा जाता है. बचपन के वो किस्से भी याद होंगे, जब उड़ती पतंग की डोर गिराने के लिए बच्चे भुट्टे की गांठ में धागा बांधकर फेंका करते थे. यह गांठ अपना सटीक काम करती थी, कारण, पत्थर की बजाय इसका साइज ग्रिप के लायक होता था और वजन भी ठीक. ऐसा लगता है कि भुट्टे का हमसे जन्म-जन्मांतर का साथ है. लेकिन आपको बता दें कि मक्का भारत देश का नहीं है और कुछ सौ साल पहले ही इसने भारत में अपनी पैठ बनाई है.

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मक्का भारत देश का नहीं है और कुछ सौ साल पहले ही इसने भारत में अपनी पैठ बनाई है.

9 हजार साल पहले का है इतिहास

खोजबीन में पाया गया कि मक्का की खेती लगभग 9000 वर्ष पूर्व दक्षिण मध्य मेक्सिको की बालसास नदी घाटी में हुई थी. बाद में मक्का यहीं से अमेरिका के दूसरे हिस्सों में गया. पुराने वक्त से ही अमेरिका में इसकी बंपर खेती हो रही है जो आज भी जारी है. मक्का भारत का अनाज नहीं है, क्योंकि भारत के धार्मिक ग्रंथों या प्राचीन आयुर्वेद की पुस्तकों में इसका कोई वर्णन नहीं है. इन ग्रंथों में सिर्फ गेहूं और जौ का ही वर्णन किया गया है. हिंदू धर्मग्रंथों में गेहूं व जौ की बाली की पूजा की जाती रही है और हवन-यज्ञ में इन्हें बेहद उपयोगी बताया गया है. भारत में मक्का की फसल 1600 ईस्वी के अंत में उगना शुरू हुई और आजकल अधिकतर राज्यों में इसकी खेती की जाती है.

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दुनियाभर में सबसे ज्यादा होती है खेती

आपको बता दें कि पूरे विश्व में उगाए जाने वाले अनाजों में सबसे अधिक खेती मक्का की होती है और अमेरिका में यह पहले नंबर पर है. दुनिया में मक्का की जितनी खेती की जाती है, उसका 35 प्रतिशत मक्का अमेरिका में ही पैदा होता है. उसके बाद मक्का उगाने वालों में चीन का नंबर दूसरा है. इसके बाद ब्राजील, मेक्सिको, अर्जेंटीना और भारत में मक्के की खेती की जाती है.

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पूरी दुनिया में जितना मक्का उगता है, उसका लगभग 20 प्रतिशत का ही खाने में उपयोग होता है.

विशेष बात यह भी है कि अमेरिका में ही मक्का सबसे ज्यादा खाया जाता है, उसके बाद चीन ओर ब्राजील. मक्का खाने में भारत का स्थान सातवां है. वैसे पूरी दुनिया में जितना मक्का उगता है, उसका लगभग 20 प्रतिशत का ही खाने में उपयोग होता है, बाकी मक्का पोल्ट्री फीड, जानवरों का चारा, प्रसंस्कृत भोजन, उद्योगों के अलावा स्टार्च आदि बनाने के लिए इस्तेमाल होता है.

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पॉपकॉर्न का भी बढ़ा चलन

आधुनिक युग में पॉपकॉर्न व बेबी कॉर्न के रूप में मक्के की खपत में जबर्दस्त इजाफा हुआ है. भोजन के रूप में पूरी दुनिया में इनका चलन बढ़ रहा है. आहार विशेषज्ञों का कहना है कि पॉपकॉर्न खाना एक आदत (लत) है और अमेरिकी व ब्रिटेनवासी इसके दीवाने हैं. बेबी कॉर्न का चलन इसलिए बढ़ा है क्योंकि यह पौष्टिक, स्वादिष्ट व व बिना कोलेस्ट्रॉल का खाद्य है. इसमें फाइबर भी खूब होता है और इसकी उगती फसल में कीटनाशक रसायन भी प्रवेश नहीं कर पाते हैं.

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पॉपकॉर्न व बेबी कॉर्न के रूप में मक्के की खपत में जबर्दस्त इजाफा हुआ है.

पौष्टिक गुणों से भरपूर है मक्का

अगर गुणों की बात करें तो मक्का की प्रवृत्ति मधुर व ठंडी है. यह पोषक तो है ही कफ और पित्त को भी कंट्रोल करती है. आहार विशेषज्ञ व होमसेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार मक्का हार्ट के लिए लाभकारी है. यह पाचन तंत्र को भी सुधारता है. इसमें सूजन व दर्द को कम करने वाले पोषक तत्व भी होते हैं. उन्होंने कहा कि ज्यादा मक्का खाने से पेट फूलने की समस्या आ सकती है. जिन लोगों को डाइजेशन की समस्या है, उन्हें मक्के का कम सेवन करना चाहिए, उसका कारण यह है कि यह पचने में वक्त लगाता है. मक्के को उबालकर खाएंगे तो वह सबसे लाभकारी है. पच भी जाएगा और फाइबर के चलते पेट को भी फिट रखेगा.

Tags: Food, Lifestyle

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