Covid 19: कोरोना की चपेट में दोबारा आ सकते हैं ठीक हुए मरीज, जानिए कैसे ?

कोरोना की चपेट में  दोबारा आ सकते हैं ठीक हुए मरीज
कोरोना की चपेट में दोबारा आ सकते हैं ठीक हुए मरीज

कोरोना (Covid 19) के पुनः संक्रमण ( Reinfection) का कारण अपर्याप्त रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 6:08 PM IST
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कोरोनावायरस (Corona virus) ने वैज्ञानिक और डॉक्टरों की एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. एक नए शोध के मुताबिक, कोविड-19 से उबरे मरीजों में इसके दोबारा पनपने की संभावना बढ़ सकती है. अमेरिका में कोविड-19 पुनः संक्रमण ( Covid-19 Reinfection) का पहला मामला अप्रैल में आया था. अब तक दुनियाभर में ऐसे मुठ्ठीभर मामले सामने आ चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगा. इस सप्ताह द लैंसेट इंफेक्शियस डिजीज में प्रकाशित इस अध्ययन ने बेल्जियम, नीदरलैंड्स, हांगकांग और इक्वाडोर में अन्य कोविड-19 पुनः संक्रमितों की पुष्टि की है.

कोविड-19 के दोबारा संक्रमण का कारण
येल यूनिवर्सिटी में इम्यूनोबायोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर, सेल्युलर एंड डेवलपमेंटल बायोलॉजी के प्रोफेसर अकीको इवासाकी ने बताया कि लोगों में कोरोना के पुनः संक्रमण ( Reinfection) का कारण अपर्याप्त रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) है. नेवादा में मिले कोरोना के पहले पुन: सक्रमण केस के आधार पर शोधकर्ताओं ने इसके दोबारा फैलने के कई स्पष्टीकरण भी पेश किए हैं. उन्होंने कहा है कि हो सकता है कि रोगी ने कोरोना के इलाज के दौरान अधिक खुराक ली हो और ठीक होने के बाद भी वायरस दोबारा उसके शरीर में सक्रिय हो गया. वैकल्पिक रूप से यह भी हो सकता है कि मरीज में वायरस को लेकर अधिक तनाव हो जिसके कारण वह पुनः संक्रमण का शिकार हो गया.

टेस्टिंग के दौरान हुई चूक
ऑन्कोर्मोलॉजी सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी नेंट्स-एंजर्स में इम्यूनोलॉजी के निदेशक फ्रेडरिक अल्टेयर ने कहा कि कोविड-19 पुनः संक्रमण के बहुत कम सबूत मिले हैं जो इसके कारण जानने के लिए नाकाफी हैं. वहीं, अन्यों का कहना है कि महामारी के पहले चरण की टेस्टिंग के दौरान हुई चूक के कारण कोविड-19 के पुनः संक्रमण मामलों को पता नहीं चल पाया होगा, क्योंकि महामारी के शुरुआती स्तर में जिन संक्रमितों में कोरोना के हल्के लक्षण थे, बाद में वे दोबारा टेस्टिंग के दौरान कोरोना पॉजिटिव मिले थे.



वायरस का तुलनात्मक अध्ययन
हालांकि यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल है कि कोविड-19 के पुनः संक्रमण की व्यापकता कितनी होगी लेकिन वैज्ञानिक अन्य वायरस के जरिए इसके सुराग का पता लगा रहे हैं. एक अन्य वैज्ञानिक ने कोविड-19 पुनः संक्रमण की शंका को कम करते हुए एक अध्ययन का तुलनात्मक आंकड़ा पेश कर बताया कि एक अध्ययन में 30 वर्षों तक 10 स्वस्थ व्यक्तियों का चार्ट बनाया गया था और पाया कि ये सभी व्यक्ति कई बार एक ही वायरस से संक्रमित हुए थे. जिसमें अध्ययन के दौरान एक व्यक्ति अलग-अलग मौकों पर 17 बाहर एक ही वायरस से संक्रमित हुआ था. ठीक इसी तरह कोरोनावायरस भी अपना प्रभाव छोड़ रहा है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना आवश्यक
सोमवार को नीदरलैंड में शोधकर्ताओं ने उस 89 वर्षीय महिला का केस स्टडी जारी किया, जिसने कोविड-19 से दो बार संक्रमित होने के बाद दम तोड़ दिया. महिला की कैंसर के इलाज के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो गई जिसके कारण वह दोबारा वायरस की चपेट में आ गई. वैज्ञानिक इवासाकी का कहना है हालांकि दुनिया कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाने में जुटी हुई है लेकिन फिलहाल लोगों में उच्च स्तर और लंबे समय तक चलने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता को उत्पन्न करने की जरुरत है.

वायरस का अंत मुश्किल
कई सरकारें कोरोना के खिलाफ वैक्सीन पर पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक वान डेर होक का कहना है कि दुनियाभर में व्यापक तौर पर अपना प्रभाव छोड़ने वाला यह वायरस इतनी आसानी से नहीं जाने वाला है. क्योंकि लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता का तेजी से खत्म होना चिंता का विषय है और इसकी कमी के चलते लोग फिर वायरस से संक्रमित होते रहेंगे. इसके लिए आपको हर समय कोरोना की वैक्सीन की जरूरत पड़ती रहेगी.
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